Thursday, April 25, 2024
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धूर्त एक्सईएन का फर्जीवाड़ा

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  • पहले भी काली कमाई को लेकर कई बार सुर्खियों में रहे थे एक्सईएन प्रवीण कुमार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टोलरेंस की नीति को ऊर्जा निगम के एक्सईएन पलीता लगा रहे हैं। इनके लिए नियम कोई मायने नहीं रखते। पहले काली कमाई कई भू-माफियाओं से संबंध को लेकर एक्सईएन प्रवीण कुमार सुर्खियों में बन हुए हैं और अब निजी कार को प्राइवेट टैक्सी में प्रयोग कर रहे हैं, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार भी लिखवा रखा हैं, ऐसा करके एक्सईएन जनता में रौब गालिब कर रहे हैं।

उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेश है कि कोई भी सरकारी अधिकारी अपनी कार पर पदनाम नहीं लिखेगा। एक्सईएन उच्चतम न्यायालय की अवहेलना कर कार पर पदनाम लिखवाकर चलते हैं। लंबे समय से एक्सईएन मेरठ में ही जमे हुए हैं, कभी मवाना तो कभी मेरठ में तैनाती पा रहे हैं।

उनके कार्यकाल में कई फर्जीवाड़े हुए हैं। उनका एक मामला तो हाईकोर्ट में भी पहुंचा था, लेकिन विभाग के आला अफसर फिर भी उन पर खास मेहरबान हैं। भ्रष्टाचार हो रहा है तो होने दो, सरकार की छवि खराब हो रही है तो होने दो, लेकिन एक्सईएन को खुली छुट जो दे रखी हैं। बेलगाम एक्सईएन पर कार्रवाई कौन करेगा?

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ऊर्जा निगम के पास अपनी गाड़ियां नहीं हैं। इसी वजह से प्राइवेट टैक्सी नियमानुसार हायर की जाती हैं। जिन गाड़ियों को ऊर्जा निगम लेता हैं, उनका व्यवसायिक टैक्सी में पंजीकरण परिवहन विभाग में होना चाहिए। ये नियम कहता हैं, उसी कार को ऊर्जा निगम में हायर कर संचालित किया जा सकता हैं, लेकिन यहां तो एक्सईएन नियम ही मानने को तैयार नहीं हैं। उनके पास जो गाड़ी हैं, उसका आरटीओ में पंजीकरण व्यवसायिक टैक्सी में नहीं हैं।

निजी कार हैं, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखवाकर जनता पर रौब गालिब करने का काम किया जा रहा हैं। एक्सईएन ने निजी कार को प्राइवेट टैक्सी में कैसे प्रयोग किया? यह बड़ा सवाल हैं। जब उसी गाड़ी को ऊर्जा निगम में लगाया जा सकता हैं, जिसका पंजीकरण आरटीओ में व्यवसायिक में होगा, लेकिन यहां नियम के विरुद्ध एक्सईएन ने कई निजी कारों को साठगांठ करके ऊर्जा निगम में लगवा दिया हैं।

इसमें एक तरह से एक्सईएन ने फर्जीवाड़ा कर दिया। निजी कारों का प्रयोग व्यवसायिक कार्यों में किया जा रहा हैं, जो नियमविरुद्ध हैं। काली कमाई से अनेक साधन तो एक्सईएन ने बना रखे हैं। उनके घर में ऐसी भी लगा हैं, लेकिन सरकार से इसके खरीदने की अनमुति तक नहीं ली गई। फ्रीज भी घर में लगा हैं, इसकी अनुमति भी सरकार से नहीं ली गई। लग्जरी कार और बाइक भी हैं।

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इनके खरीदने की अनुमति भी नहीं ली गई। नियम ये कहता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी या फिर अधिकारी यदि कार या फिर अन्य कोई वस्तु खरीदता है तो उसके लिए सरकार से लिखित में अनुमति लेनी चाहिए, मगर एक्सईएन प्रवीण कुमार ने तमाम नियमों को ताक पर रख दिया। समाजसेवी मनोज चौधरी ने एक्सईएन प्रवीण कुमार की आय से अधिक सम्पत्ति एकत्र करने के मामले की सीएम योगी आदित्यनाथ से जांच कराने की मांग की हैं।

हाथ में राडो कंपनी की घड़ी पहनना तथा कई-कई अंगुठिया? क्या अंगूठी खरीदने की भी अनुमति सरकार से ली गई। गले में सोने की कई तौले की चेन, क्या इसके खरीदने से पहले अनुमति ली गई। इन तमाम बिन्दुओं को लेकर मुख्यमंत्री से एक्सईएन प्रवीण कुमार की जांच कराने की मांग की गई, ताकि एक्सईएन की काली कमाई की करतूत खुलकर सामने आ सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब जीरो टोलरेंस की नीति पर काम कर रहे तो अफसर भ्रष्टाचार में लिप्त क्यों हैं? इसमें अफसरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

निजी कार पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखवाना, क्या ये फर्जीवाड़ा नहीं हैं? उच्चतम न्यायालय की ये अवहेलना नहीं हैं। फर्जीवाड़ा है तो एक्सईएन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं? जैसा एक्सईएन प्रवीण कुमार पूछने पर बताते हैं कि कार उनकी नहीं हैं, विभाग ने किराये पर ले रखी हैं, लेकिन किराये पर प्राइवेट टैक्सी को ही लिया जा सकता हैं, निजी कार को नहीं।

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