Sunday, January 23, 2022
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutमेडिकल में स्मृति ईरानी का भारी विरोध

मेडिकल में स्मृति ईरानी का भारी विरोध

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  • प्राइवेट कंपनी द्वारा तैयार किए गए पेड्रियाटिक इंसेटिव यूनिट का उद्घाटन करने पहुंची थी केंद्रीय मंत्री

जनवाणी संवाददाता  |

मेरठ: कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे रही है, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग हर संभव तैयारियों में जुटा है। मेडिकल कॉलेज में भी बारह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पीकू (पेड्रियाटिक इंसेटिव केयर यूनिट) वार्ड एक निजी कंपनी द्वारा बनाया गया है।

इसी वार्ड का उद्घाटन करने के लिए केन्द्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेरठ पहुंची थी, लेकिन यहां पर उद्घाटन के दौरान मेडिकल के कर्मचारियों ने उनका विरोध कर दिया, जिसके बाद वह आधा-अधूरा कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चली गई। बुधवार को गढ़ रोड स्थित लाला लाजपत रॉय मेडिकल कॉलेज में एक निजी कंपनी द्वारा बनाए गए पीकू वार्ड का उद्घाटन करने स्मृति ईरानी पहुंची थी।

इस दौरान उन्हे पीकू वार्ड में बने 50 बेड के अस्पताल का जायजा भी लेना था और वहां पर उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी जानकारी लेनी थी, लेकिन जैसे ही स्मृति ईरानी मेडिकल कॉलेज पहुंची, उनका वहां पर मौजूद मेडिकल के संविदा कर्मियों ने विरोध कर दिया। इस दौरान वह जैसे-तैसे सुरक्षा के घेरे में पीकू वार्ड तक पहुंची और गेट पर लगे फीता काटकर खानापूर्ति की।

इसके बाद वह वापस लौटी तो कर्मचारियों ने उन्हें सीढ़ियोें पर ही रोक लिया।
कर्मचारियों ने किया स्मृति ईरानी का घेराव सीढ़ियों से नीचे उतरते समय उन्हें रोक लिया गया।

नर्सिंग स्टाफ की महिलाओं ने कहा कि वह पिछले साल से कोरोना काल के दौरान जब दूसरी लहर अपने चरम पर थी काम कर रहे हैं, लेकिन उनका लगातार उत्पीड़न हो रहा है। उनको पिछले चार माह से तनख्वाह नहीं मिली है। ऐसे में वह किस तरह से अपना परिवार चलाएं इसका जवाब देने के लिए कोई अधिकारी उनसे नहीं मिला है।

मेडिकल प्रशासन के खिलाफ हुई नारेबाजी-स्मृति ईरानी के सामने ही मेडिकल प्रशासन के खिलाफ संविदाकर्मियों ने नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इस दौरान मेडिकल के डाक्टर्स ने कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। आरोप लगाया कि जिस कंपनी द्वारा उन्हें संविदा पर रखा गया था अब उस कंपनी ने दूसरा स्टाफ रख लिया है। इसके साथ ही उन्हे मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है।

संविदा कर्मियों को धमकाती नजर आई मंत्री

जिस समय संविदा कर्मियों ने मंत्री का घेराव किया उसी समय मंत्री ने कर्मचारियों को धमकाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी ने उन्हे नौकरी पर रखा था, वह निजी कंपनी है, सरकार ने कर्मचारियों से नहीं कहा था कि वह इस कंपनी के साथ काम करें। ऐसे में अगर कंपनी कोई कदम उठा रही है तो उसके लिए कंपनी व कर्मचारी दोनों ही जिम्मेदार है।

सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी ने भी लोगों को धमकाया

स्मृति ईरानी की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी ने भी विरोध कर रहे संविदाकर्मियों को धमकाया। जैसे ही नर्सिंग स्टाफ व वार्ड ब्वॉय ने उनके साथ हुए उत्पीड़न को लेकर मंत्री से बताना चाहा तो सुरक्षाकर्मी ने उसे रोकते हुए कहा कि चुप रहो। मैडम की बात सुनो, बीच में बोलने का कोई मतलब नहीं है।

संविदाकर्मियों को नहीं कर सकी संतुष्ट

जाते-जाते स्मृति ईरानी ने संविदाकर्मियों की बात तो सुनी, लेकिन उनको कोई आश्वासन नहीं दिया। न ही उनकी समस्या का समाधान कैसे हो इस पर कुछ कहा। जिससे मौके पर मौजूद संविदाकर्मियों में आक्रोश साफ नजर आया। उन्होंने आरोप लागाया कि मैडम तो उसी कंपनी का पक्ष ले रही है। जिसने हमारा उत्पीड़न किया है। ऐसे में जबतक हमारी समस्या का समाधान नहीं होगा हम हड़ताल पर ही रहेंगे।

ये है मेडिकल कर्मचारियों की मांग

मेडिकल के आउटसोर्सिंग स्टॉफ को डिग्निस कंपनी ने संविदा पर रखा था, जिसमें नर्सिंग स्टाफ, वार्ड ब्वॉय व सफाईकर्मी शामिल है। इनका आरोप है कि कंपनी ने कोरोना काल के दौरान पीक के समय में उनसे दिन-रात काम लिया, लेकिन अब नौकरी से निकाला जा रहा है।

स्टॉफ को पिछले चार माह से वेतन नहीं दिया। उनको भी स्थाई कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलना चाहिए, जो हर माह तीन से सात तारीख तक खाते में आ जाए। कोरोना काल में वादा किया था कि उनके वेतन में 25 प्रतिशत की वृद्धि होगी, लेकिन नहीं हुई, कोरोना काल में संक्रमण के कारण कर्मचारी की मौत होने पर परिवार को 25 लाख की सहायता राशि मिलनी चाहिए।

स्टॉफ नर्स को पूरे साल में 14 कैजुअल लीव मिलनी चाहिए। साथ ही 10 ईएल यानी वार्षिक अवकाश मिलना चाहिए। नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति मैटर्न रजिस्टर में होनी चाहिए न की किसी कंपनी के रजिस्टर में, डिग्निस कंपनी के स्टॉफ पर अभद्रता का आरोप लगाया है। किसी कारणवश स्टॉफ को देर होने पर बदसलूकी की जाती है और नौकरी से निकालने की धमकियां दी जाती है। तनख्वाह मांगने पर कुछ स्टॉफ को नौकरी से निकाल दिया है, जिनकी बहाली होनी चाहिए।

कंपनी के स्टॉफ पर आरोप लगा है कि फिर से नियुक्ति होने पर पैसे की मांग की जा रही है। जो गलत है, ऐसे कर्मचारियों को हटाया जाए। बताया कि अभी कुल 16250 रुपये प्रतिमाह मिल रहा है। जिसमें कुछ वेतन काट लिया जाता है। यह वेतन बढ़ना चाहिए, क्योंकि महंगाई के कारण इतने कम वेतन में घर चलाना मुश्किल है।

इन्ही मांगों को लेकर संविदाकर्मियों ने केन्द्रीय मंत्री के सामने विरोध दर्ज कराया, लेकिन उनके विरोध का कुछ खास असर नजर नहीं आया, अब कर्मचारियों ने पिछले दो दिन से चल रही हड़ताल पर बने रहने का फैसला किया है, लेकिन इसका असर मेडिकल में भर्ती मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। जिसका अभी समाधान होता नजर नहीं आ रहा है।

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