Saturday, May 25, 2024
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शिक्षण कार्य के दौरान खर्राटे भरने वाली शिक्षिका निलंबित

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  • एक दिन पहले उपस्थिति के हस्ताक्षर करने समेत और भी लगे थे आरोप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शिक्षा के मंदिर समझे जाने वाले स्कूलों में बच्चों को न सिर्फ पढ़ाया जाता है बल्कि उनके व्यक्तित्व का निर्माण भी यहीं से आरंभ होता है। स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने पहुंचने वाले बच्चों का भविष्य कैसे उज्जवल किया जाए इसकी जिम्मेदारी स्कूल में पढ़ानें वाले शिक्षकों की होती है।

शिक्षक ही बच्चों को पढ़ाई के साथ सामाजिक और व्यवहारिक ज्ञान देते है जिससे वह आगे बढ़कर अपने स्कूल व माता-पिता का नाम रोशन करते है। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ ऐसे भी विद्यालय है जिनमें बच्चों को पढ़ाने के लिए नियुक्त हुए शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही करते नजर आ रहें है। ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है जिसमें एक शिक्षिका अपनी जिम्मेदारी निभाने में भारी लापरवाही बरतने पर निलंबित की गई है।

प्राथमिक विद्यालय हसन रजापुर विकास खण्ड रोहटा की सहायक अध्यापिका सीमा देवी गौतम स्कूल में शिक्षण कार्य के दौरान खर्राटें भरती थी। साथ ही उनपर विद्यालय में समय से नहीं पहुंचने के साथ अपनी उपस्थिति के हस्ताक्षर एक दिन पहले करने जैसे गंभीर आरोप लगे। बीएसए को कई दिनों से शिक्षिका के खिलाफ तमाम तरह की शिकायते मिली जिनमें उनपर अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही बरतने जैसे आरोप शामिल रहे हैं।

शिक्षण कार्य में लापरवाही बरतने की शिकायत गांव के प्रधान व विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी से की गई थी। गांव के प्रधान का तो यहां तक कहना है कि शिक्षिका अपनी उपस्थिति के हस्ताक्षर एक दिन पहले ही कर देती है। दिनांक 14 मई को शिक्षिका ने अगले दिन यानी 15 मई की उपस्थिति पर हस्ताक्षर कर दिये और 15 मई को विद्यालय में अनुपस्थित रही।

निलंबित हुई शिक्षिका सीमा देवी पर कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ानें की जिम्मेदारी थी लेकिन वह इसमें लापरवाह नजर आई। सवाल यह कि बेसिक शिक्षा विभाग के आधीन आने वाले स्कूलों में बच्चों को शिक्षित करने के लिए सरकार शिक्षकों को अच्छी खासी तनख्वाह देती है। बावजूद इसके शिक्षिका बच्चों को पढ़ाने में लापरवाही क्यों बरतती रही। क्या उनकी इस लापरवाही से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो रहा था। उनकी इस कारगुजारी से बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ रहा था।

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जल जीवन मिशन का विरोध

प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत पानी की टंकियों का निर्माण होना है। लेकिन इस योजना का कई जगह स्कूलों के प्रधानाध्यापकों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है विद्यालयों के प्रांगण में पानी की टंकी बनने के बाद बच्चों का खेल का मैदान समाप्त हो जाएगा साथ ही इससे बच्चों की सुरक्षा को भी खतरा है। जल जीवन मिशन के तहत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगणों में पानी की टंकी का निर्माण कराने की तैयारी की है।

लेकिन सरकार की इस योजना का जिले के 12 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों द्वार विरोध किया जा रहा है। इनमें गांव सारंगपुर तहसील मवाना, परीक्षितगढ़ देहात मवाना, दबथला मवाना, कुन्हैडा मवाना, सैफपुर करमचंदपुर मवाना, कुंठी कमालपुर मवाना, नरीमपुर मवाना, अहमदपुरी उर्फ अमनपुरी मवाना, अकबरपुरी गढ़ी मवाना, महलवाला मवाना, अफजलपुर पावटी मेरठ व पावली खास सरधना के स्कूल शामिल हैं।

प्रधानाध्यापकों का कहना है यदि इन स्कूलों में पानी की टंकी बनाई जाती है तो इससे स्कूल के बच्चों के खेलने का मैदान समाप्त हो जाएगा जिससे सरकार की महत्वकांशी योजना खेलों इंडिया व फिट इंडिया समेत हर गांव स्टेडियम जैसी योजनाओं पर पानी फिर जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में पानी की टंकी बनने के बाद बच्चों की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो सकता है।

विद्यालयों में आधारशिला लैब व पुस्तकालय का निर्माण होने जा रहा है उन्हें भी रोकना पड़ सकता है। भविष्य में विद्यालय का उच्चीकरण होनें की स्थिति में विद्यालय की जगह कम पड़ेगी जिससे उसका विस्तार नहीं हो सकेगा। इन्हीं बातों को लेकर कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों द्वारा जल जीवन मिशन योजना को लेकर विरोध किया जा रहा है।

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