Friday, June 14, 2024
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…तो स्टेडियम की जमीन पर बना है मवाना अड्डा-पेट्रोल पंप

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  • करीब 65 साल पुराना है कैलाश प्रकाश स्टेडियम
  • स्टेडियम की जमीन पर बनी 90 दुकानों पर हो चुका है कब्जा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ का खेलों से पुराना रिश्ता है, बताया जा रहा है 1958 में जिले में खिलाड़ियों को खेल मैदान की सुविधाएं देने के लिए कैलाश प्रकाश स्टेडियम का निर्माण हुआ था। उस समय जिले की आबादी काफी कम थी जिस वजह से स्टेडियम में आने वाले खिलाड़ियों की संख्या भी सीमित थी। वहीं खिलाड़ियों को खेल सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जरूरी पैसा कहां से आए इसके लिए स्टेडियम की जमीन पर 90 दुकानों का निर्माण कराया गया था जिन्हें किराए पर दिया गया।

इससे आने वाले पैसे से स्टेडियम में खेलों की सुविधाओं के लिए फंड मिलता था। मगर आज इन दुकानों पर अवैध रूप से कब्जा हो गया है। साथ ही मवाना बस अड्डा व पैट्रोल पंप भी स्टेडियम की जमीन पर बना दिए गये। लेकिन अब आरएसओं ने स्टेडियम की जमीन को कब्जा मुक्त करानें करने की तैयारी कर ली है।

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कैलाश प्रकाश स्टेडियम 1974 से पहले क्रीड़ा परिषद् के आधीन था लेकिन बाद में इसे खेल निदेशालय को सौंप दिया गया। तभी से स्टेडियम में प्रांतीय क्रीड़ा विभाग का कार्यालय बनाया गया और इसके पहले अधिकारी पीके मजूमदार थे जो 1 अप्रैल 1974 से 24 जुलाई 1974 तक रहे। उनके बाद से अब तक कुुल 17 प्रांतीय क्रीड़ा अधिकारियों की नियुक्तियां हो चुकी है।

12 सौ से अधिक रजिस्टर्ड खिलाड़ी है

स्टेडियम में कुल 16 खेलों के लिए खिलाड़ियों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा रखा है जिनकी संख्या 12 सौ से अधिक है। जबकि शौकिया तौर पर भी बड़ी संख्या में खिलाड़ी यहां खेलने आते है। वहीं स्टेडियम के निर्माण के समय यानी आज से करीब 65 साल पहले काफी कम संख्या में खिलाड़ी खेलने आते थे,

उसी को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम का क्षेत्रफल निर्धारित किया गया था। लेकिन आज आबादी के साथ खिलाड़ियों की संख्या भी कई गुना बढ़ गई है। जबकि क्षेत्रफल उतना ही है। ऐसे में स्टेडियम पर खिलाड़ियों की संख्या का दबाव भी बढ़ गया है।

स्टेडियम की जमीन पर हो चुका है कब्जा

1974 के बाद से अबतक स्टेडियम की जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है। बताया जा रहा है स्टेडियम के साथ आमदनी के लिए जिन 90 दुकानों का निर्माण हुआ था उनपर अब अवैध रूप से कब्जा हो गया है।

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सभी 90 आवंटियों में से 80 की मौत हो चुकी है और महज 10 दुकानों पर ही मूल आवंटी काबिज है। लेकिन बड़ी संख्या में दुकानों पर अवैध रूप से कब्जा हो गया है। अब कब्जा करने वाले कौन लोग है इसका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।

मवाना बस अड्डा और पेट्रोल पंप भी स्टेडियम की जमीन पर

बताया जा रहा है जिस जगह आज मवाना बस अड्डा व पैट्रोल पंप बना है वह स्टेडियम की ही जमीन है लेकिन यह किन परिस्थितियों में तैयार हो गए इसका भी कोई रिकार्ड नहीं है। स्टेडियम का दायरा बढ़ानें के लिए अब प्रांतीय क्रीड़ा अधिकारी ने तैयारी कर ली है जिससे खिलाड़ियों को प्रशिक्षण लेने के लिए ज्यादा जगह मिल सकेगी। अगले माह से क्रीड़ा अधिकारी स्टेडियम की जमीन कब्जामुक्त कराने के लिए कानूनी कार्रवाई करने का मन बना चुके है।

स्टेडियम में अब खिलाड़ियों के लिए जगह कम पड़ने लगी है। सबसे पहले उन 90 दुकानों का कब्जा लिया जाएगा जिनपर अवैध रूप से लोग काबिज है। साथ ही मवाना बस अड्डे व पैट्रोल पंप को भी हटवाने की कवायद शुरू की जाएगी। यह जमीन स्टेडियम की है और इसे खाली कराकर स्टेडियम का क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा।
-योगेन्द्र पाल सिंह, प्रांतीय क्रीड़ा अधिकारी, मेरठ।

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