Monday, September 20, 2021
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Homeसंवादअब जातीय समीकरण का सहारा

अब जातीय समीकरण का सहारा

- Advertisement -


केंद्र में नरेंद्र मोदी के बहुप्रतीक्षित मन्त्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल में कारपोरेट हितों का ध्यान, दलबदलुओं से किए गए वादों को निभाने और यूपी, गुजरात में जातीय संतुलन साध कर अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा की सफलता को दोहराने की संभावना सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। लेकिन इसके और भी निहितार्थ हैं। मसलन, गुजरात से पाटीदार मनसुख मंडाविया और पुरुषोत्तम रुपाला को प्रोन्नति देकर कैबिनेट मंत्री बनाए जाने से जहां गृहमंत्री अमित शाह के पर कतरने की कोशिश हुई है, वहीं कैबिनेट में प्रमुख कारपोरेट्स के चहेतों, विशेषकर पूर्व नौकरशाहों को कैबिनेट मंत्री बनाकर, को जगह दी गई है ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में कॉरपारेट्स् के हितों को सुरक्षित रखा जा सके। यही नहीं, एक पूर्व नौकरशाह को रेल मंत्री बनाकर उड़ीसा में अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा का चेहरा बनाने की तैयारी भी की गई है।

दरअसल भाजपा के लिए अब राम मंदिर, 370 और ट्रिपल तलाक का मुद्दा खत्म हो गया है। बिहार-बंगाल में ईवीएम का खेला हो नहीं पाया। आगे चुनावों में भी ईवीएम का खेला होने पर प्रश्न चिन्ह है, क्योंकि मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। अब सवाल है कि भाजपा और नरेंद्र मोदी किस मुद्दे पर अगला चुनाव लड़ेंगे। मोदी का मकसद है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव जातीय समीकरण और बेहतर काम पर लड़ें। 2022 के यूपी चुनाव में तो अर्थव्यवस्था में कुछ बेहतर स्थिति में होने की संभावना अत्यंत क्षीण है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव तक मोदी की कोशिश विकास दर को पटरी पर लाने और रोजगार के अवसर को बढ़ाने के साथ सामाजिक समीकरण को साधने की रहेगी। गुजरात में भी वर्ष 2023 में चुनाव होना है। बीजेपी को करीब 55 फीसदी हिंदू वोट देते हैं, लेकिन जितना वोट सवर्ण जाति और वैश्य वोट देते हैं, उतना पिछड़ी, दलित और आदिवासी के वोटर नहीं देते हैं।

अपनी नई कैबिनेट में उन्होंने सात मंत्रियों को 10 महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए हैं। सबसे ज्यादा चर्चित मामला अश्विनी वैष्णव का है, जो कुछ साल पहले राजनीति में आए और सीधे रेल और टेलिकॉम जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय उन्हें दे दिए गए हैं। अश्विनी वैष्णव पूर्व नौकरशाह हैं और उनका न केवल कॉरपोरेट्स से अच्छा तालमेल रहा है, बल्कि आईएएस से रिटायरमेंट लेकर उन्होंने खुद कई कंपनियां खड़ी कीं, जिनका गुजरात कनेक्शन भी रहा है, आज भी उनकी पत्नी कई कंपनियों में हैं। उन्होंने अमेरिका से एमबीए किया है और लौटकर नौकरी से इस्तीफा दे दिया। यानी उनका भी अमेरिका कनेक्शन है। फिर रेलवे के निजीकरण के पहले चरण में प्रमुख रेलवे स्टेशन निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं, जिसमें सबसे बड़े खिलाड़ी गौतम अडानी हैं। फिर टेलिकॉम में एयरटेल, वोडाफोन-आईडिया के साथ मुकेश अंबानी को जिओ अगली पायदान पर है जिसके हितों की रक्षा का दायित्व अश्विनी वैष्णव पर है।

इसके अलावा हरदीप सिंह पुरी और आरके सिंह को पदोन्नति देकर कैबिनेट मंत्री बना दिया। हरदीप पुरी को शहरी विकास मंत्रालय के साथ पेट्रोलियम जैसे बड़े मंत्रालय सौंपे गए हैं। पेट्रोलियम में मुकेश अंबानी की आरआईएल सबसे बड़ी प्लेयर है। फिर जिस तरह मुकेश अंबानी ने सऊदी अरब के तेल की प्रमुख कंपनी आरामको के साथ समझौता किया है और रिलायंस इंडस्ट्री के बोर्ड में शामिल किया है, उससे भारत को इस्लामिक दुनिया में पाकिस्तान पर बढ़त मिल गई है। हरदीप पुरी विदेश सेवा के नौकरशाह हैं और उनके अंतर्राष्ट्रीय जगत में संपर्क रहे हैं। पूर्व गृह सचिव आरके सिंह मालेगांव ब्लास्ट में हिंदू आतंक की अवधारणा उजागर करने में अग्रणी रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें कैबिनेट में पावर और रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय मिला है। इस क्षेत्र में भी अडानी और अंबानी के हित जुड़े हुए हैं।

मंत्रिमंडल में 27 ओबीसी, 20 आदिवासी-दलित और 11 महिला को जगह मिली है। मोदी के कैबेनिट में 7 आईएएस, 3 एमबीए, 7 पीएचडी, 13 वकील, 6 डॉक्टर और 5 इंजीनियर हैं। मोदी ने मंत्रिमंडल में सामाजिक समीकरण और अच्छे शासन के लिए नए मंत्रियों की योग्यता और अनुभव पर जोर दिया है, लेकिन गेम प्लान सफल होगा या नहीं, ये अभी कहना बेहद मुश्किल है। ओबीसी और दलितों को वरीयता देने के कारण सवर्ण विशेषकर ब्राह्मण मतदाताओं में बहुत क्षोभ है, जिसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ सकता है।

यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर जातीय समीकरणों पर दांव चल दिया है। मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में तीन ओबीसी, तीन अनुसूचित जाति और एक ब्राह्मण सांसद को शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि यूपी चुनाव 2022 में जातियों में संतुलन बैठाकर भाजपा एक बार फिर बहुमत हासिल करने की फिराक में है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए बदायूं के बीएल वर्मा लोध जाति से हैं। साथ ही वह काफी समय से भाजपा संगठनके साथ जुड़े रहे। एसपी सिंह बघेल भी आगरा सुरक्षित से सांसद हैं। वह कई बार सांसद रहे हैं और भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। वह भी संगठन का हिस्सा रहे हैं।

मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में तीन अनुसूचित जाति के सांसदों को शामिल किया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के तीन सांसदों महाराजगंज से पंकज चौधरी, मिजार्पुर से अनुप्रिया पटेल और बीएल वर्मा को शामिल किया गया है। ब्राह्मण चेहरे के रूप में लखीमपुरखीरी से सांसद अजय कुमार को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। मंत्रिपरिषद में विस्तार के दौरान गुजरात को खास तवज्जो दी गई। पीएम मोदी की नई कैबिनेट में गुजरात के चार चेहरों को जगह मिली है। चार सांसदों को जगह मिलने के पीछे वर्ष 2022 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं।

पीएम मोदी ने कैबिनेट विस्तार में गुजरात के क्षेत्रीय और जातीय दोनों ही समीकरण साधने का दांव चला है। सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात और मध्य गुजरात को प्रतिनिधित्व मिला है। खेड़ा के देवू सिंह चौहान, सुरेंद्रनगर के डॉ. महेंद्र मुंजपुरा और सूरत के दर्शन जरदोश को जगह मिली है। इस तरह राज्य के सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात और मध्य गुजरात क्षेत्रों को पीएम मोदी ने महत्व दिया है। देवू सिंह चौहान ओबीसी हैं जबकि दर्शना जरदोश दक्षिण गुजरात का प्रतिनिधित्व करती हैं। डॉ. महेंद्र मुंजपुरा कोली समुदाय से आते हैं।

गुजरात में पटेल समुदाय राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। पटेल समुदाय में कड़वा और लेउवा पटेल होता हैं और मोदी ने अपनी कैबिनेट में दोनों ही पाटीदार समुदाय को तव्वजो दी है। पुरुषोत्तम रूपाला कड़वा पाटीदार और मनसुख मांडविया लेउवा पाटीदार हैं। इस तरह से पीएम मोदी दोनों को नेताओं को राज्य मंत्री से प्रमोशन कर कैबिनेट मंत्री बना दिया है। पुरुषोत्तम रूपाला और मनसुख मांडविया का कद बढ़ने को गृह मंत्री अमित शाह का पर कतरने की कोशिश मना जा रहा है क्योंकि गुजरात से अमित शाह के साथ ये दोनों भी कैबिनेट मंत्री बन गए हैं।


What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

- Advertisment -spot_img

Recent Comments