- ठंड से नसें ज्यादा सिकुड़ती है, इनको सक्रिय करने के लिये खून की गति बढ़ने से बीपी बढ़ता है
- सर्दी से दिल में आक्सीजन रक्त का प्रवाह कम होता है इससे हार्ट अटैक का खतरा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दिल दा मामला है और दिल को मजबूत रखना भी जरूरी है। इसके लिये सर्दी और कोहरे से दिल के मरीज हर संभव बचने की कोशिश करें। ठंड से नसें सिकुड़ती है और इनको सक्रिय करने के लिये खून की गति बढ़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है और वहीं भीषण सर्दी में दिल में आक्सीजन और रक्त का प्रवाह कम होता है और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
ठंड के दिनों में इसके लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे जिन्हें हार्ट की बीमारी है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ठंड के मौसम में नसें ज्यादा सिकुड़ती हैं और सख्त बन जाती हैं। इससे नसों को गर्म और एक्टिव करने के लिए ब्लड का फ्लो बढ़ जाता है। जिससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। हृदय गति यानी हार्ट रेट का अचानक बढ़ना या घटना, दिल के अस्वस्थ होने का संकेत है।
सर्दी में ठंड लग जाने के कारण, पुराने हृदय रोग की वजह से या फिर उम्रदराज लोगों में हार्ट रेट बढ़ने के मामले बढ़ जाते हैं। एक वयस्क व्यक्ति के हृदय की गति आमतौर पर 60 से 100 बीट्स तक होती है। चक्कर आने, सिर दर्द, छाती में दर्द, जबड़ों में खिंचाव या दर्द, आंखों से धुंधला दिखने जैसी स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सर्दी में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है।
हृदय, मधुमेह और ब्लड प्रेशर के मरीज सर्दी से बचें, तबीयत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श ले लें। ठंड के मौसम का हृदय रोगों से गहरा संबंध होता है। सर्दी की वजह से हृदय व रक्त संचार प्रभावित होते है। ठंडे मौसम की वजह से दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दिल में रक्त और आॅक्सीजन का संचार कम होने लगता है। इससे हाइपरटेंशन और दिल के रोगों वाले मरीजों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
ठंडे मौसम में ब्लड प्लेट्लेट्स ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं, इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है। इस मौसम में दिल और उच्च रक्तचाप के रोगियों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए। ठंड में खून का दौरा कम हो जाता और इसलिए रक्त धमनियां सिकुड़ जाती हैं।
इस कारण दिल के मरीजों में हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। थोड़ा बहुत शारीरिक व्यायाम अवश्य करें। बाहर ठंड ज्यादा होने पर घर के अंदर ही व्यायाम करें। सर्दियों में सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है और शरीर में कैटेकोलामिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो धड़कनों को बढ़ाकर ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है।
सर्दियों में शरीर के तापमान और ऊष्मा के स्तर को बनाए रखने के लिए रक्त के प्रवाह को रोकता है। इससे रक्त के संचरण के लिए अधिक बल लगाना पड़ता है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। शरीर में अल्फा रिसेप्टर होते हैं, जो सर्दियों में अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
![]() सर्दी और कोहरे से बचने का प्रयास करें। घर से निकलने से पहले इनर और स्वेटर आदि का प्रयोग करें। सिर में टोपी पहन कर निकले। गरम पानी का सेवन करें और गरम पानी से ही नहायें। समय समय पर बीपी और हार्ट के मरीज जांच कराते रहें। -डा. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजीशियन |
सर्दी और कोहरा दिल, ब्लड प्रेशर और ब्रेन के मरीजों के लिये खतरा पैदा करता है। बीपी और दिल के मरीज कोहरे और सर्द सुबह मार्निंग वॉक से बचें। घर से निकलते समय गर्म कपड़ों का प्रयोग करें। ज्यादातर लोगों को हार्ट अटैक सुबह के समय होता है। सुबह के समय, तनाव हार्मोन कोर्टिसोल पाक रक्त को मोटा और पंप करने के लिए कठिन कर देता है क्योंकि इस समय व्यक्ति आंशिक रूप से डिहाइड्रेट होता है।-डा. राजीव अग्रवाल, कार्डियोलाजिस्ट |



सर्दी और कोहरा दिल, ब्लड प्रेशर और ब्रेन के मरीजों के लिये खतरा पैदा करता है। बीपी और दिल के मरीज कोहरे और सर्द सुबह मार्निंग वॉक से बचें। घर से निकलते समय गर्म कपड़ों का प्रयोग करें। ज्यादातर लोगों को हार्ट अटैक सुबह के समय होता है। सुबह के समय, तनाव हार्मोन कोर्टिसोल पाक रक्त को मोटा और पंप करने के लिए कठिन कर देता है क्योंकि इस समय व्यक्ति आंशिक रूप से डिहाइड्रेट होता है।