Sunday, January 23, 2022
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सड़कों से तय होगा ‘सिंघासन’ का सफर

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कहावत है कि सड़कें प्रदेश की तरक्की का आईना होती हैं और यह कहावत उत्तर प्रदेश के मामले में मील का पत्थर साबित हो रही है। बीमारू राज्यों में शामिल यूपी ने पिछले पौने पांच सालों में सड़कों के कायाकल्प को लेकर बड़े कदम उठाए हैं। गांव की गलियों से लेकर, ब्लॉक मुख्यालय, जिला मुख्यालय, दूसरे राज्यों और दूसरे देशों को जोड़ने वाले सड़कों का निर्माण किया गया है। अत्याधुनिक एक्सप्रेस वे तक बनाए गए हैं और कई बनाए भी जा रहे हैं। निकट भविष्य में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाने का लाभ अगर मिलता है, तो यह कहने में गुरेज नहीं है कि सीएम योगी दुबारा सड़क से सिंघासन का सफर तय कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश की पहचान पहले टूटी सड़कें और उबड़-खाबड़ रास्तों से होती थी। सड़कों के निर्माण के लिए भी लोगों को धरना-प्रदर्शन और मंत्रियों का घेराव तक करना पड़ता था। इन वजहों से देश में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में सड़क हादसे होते थे। इसका असर निवेश और रोजगार पर भी पड़ता था। लोगों की मिनटों की दूरी घंटों में तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब वही उत्तर प्रदेश, एक्सप्रेस वे प्रदेश बनता जा रहा है। एक्सप्रेस वे के किनारे औद्योगिक गलियारे बसाने की तैयारी है, इसके लिए जमीनें चिह्नित की गई हैं। आपातकाल में वायु सेना के विमानों के लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए हवाई पट्टियां बनाई जा रही हैं। इन एक्सप्रेस वे से निवेश और तरक्की के रास्ते खुल रहे हैं, तो लोगों को आवागमन में भी सुविधा हो
रही है।

उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेस वे 185 किमी, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे 25 किमी, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे 302 किमी, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे 98 किमी और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे 341 किमी यानि कुल 929 किमी एक्सप्रेस वे संचालित है और इतनी ही लंबी करीब एक हजार किमी की विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है, यानि पिछले 70 वर्षों में प्रदेश में जितने एक्सप्रेस वे बने थे, उससे कई गुना एक्सप्रेस वे महज पांच सालों में बन रहे हैं। 296 किमी लंबी बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के मुख्य कैरिज वे का काम इस माह के अंत तक पूरा होने वाला है।

91 किमी लंबा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे का निर्माण भी अगले साल तक पूरा होने के आसार हैं। 594 किमी लंबी गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास 18 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं। गंगा एक्सप्रेस वे के माध्यम से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित देश के कई अन्य राज्यों के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा प्रयागराज से मेरठ होते हुए गंगा एक्सप्रेस वे एनसीआर से भी जुड़ेगा।

यूपी में सिर्फ सड़कों का निर्माण ही नहीं किया जा रहा, बल्कि गंगा एक्सप्रेस वे के किनारे पर्यावरण संरक्षण के लिए करीब 18 लाख 55 हजार पौधे भी लगाए जा रहे हैं। 63 किमी लंबी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे भी प्रस्तावित है। इसके अलावा बलिया लिंक एक्सप्रेस वे परियोजना प्रयागराज से बलिया तक चार लेन एक्सप्रेस वे भी बनाया जाना है। इसके अलावा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे भी बनाया जा रहा है, जिसमें पश्चिमी यूपी के कई जिलों को इसका लाभ मिलना है।

प्रदेश के लोक निर्माण विभाग का दावा है कि रोजाना 10 किलोमीटर के औसत से सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढीकरण किया जा रहा है। रोजाना 10 किलोमीटर के औसत से नए मार्गों का निर्माण और औसतन हर तीन दिन में एक सेतु का निर्माण पूरा किया जा रहा है। राज्य सरकार ने नवाचारों को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के लिए मेजर ध्यानचंद पथ के रूप में खिलाड़ियों के गांवों तक 20 सड़कें बनवाई हैं।

जय हिंद वीर पथ योजना के तहत प्रदेश के बलिदानी शहीदों के घरों तक 40 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम गौरव पथ योजना के तहत 10वीं और 12वीं कक्षा के (टॉप-20) मेधावी छात्रों के घर या स्कूलों तक 241 सड़कें बनाई गई हैं। इस साल अगस्त माह तक 3,39,698 किलोमीटर से अधिक सड़कें गड्ढा मुक्त कराई गई हैं।

जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 हजार किमी से अधिक सड़कें बनाई गई हैं और इतनी ही सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढीकरण किया गया है। करीब 125 बड़े पुल, 52 रेल ओवर ब्रिज और 344 छोटे पुलों पर आवागमन चालू हो चुका है। 305 बड़े पुलों, 767 छोटे पुलों और 121 आरओबी निर्माणाधीन हैं।

चौतरफा हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कार्यों को लेकर पिछले पौने पांच सालों में बदले माहौल का ही नतीजा है कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि तीन लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाएं शुरू हुई हैं। सबसे ज्यादा निवेश इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में आया है।

कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने प्रदेश में निवेश किया है। इसमें सैमसंग, ओप्पो, वीवो आईकिया और रिलायंस से लेकर ब्रिटानिया आदि प्रमुख हैं। यूपी को कोरोना की पिछली लहर में 56 हजार करोड़ के विदेशी निवेश प्रस्ताव मिले थे। जबकि इस बार 66,000 करोड़ रुपए के 96 निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसके अलावा नोएडा में फिल्म सिटी की स्थापना, जेवर एयरपोर्ट के निर्माण से निवेश और रोजगार के अवसर और बढ़ने वाले हैं।

केंद्र और यूपी सरकार ने सड़कों को लेकर प्रदेश में आमूलचूल परिवर्तन लाने का काम किया है। एक्सप्रेस वे के दोनों ओर औद्योगिक गलियारों के लिए भूमि चिह्नित की गई है। एक्सप्रेस वे जिन जिलों से होकर गुजर रहे हैं, उसके आसपास के जिले और दूसरे राज्यों के लोग भी लाभान्वित हो रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक एक्सप्रेस वे के किनारे की जमीनों के दाम कौड़ियों से करोड़ों में पहुंच गए हैं। इसके अलावा जो जमीनें अधिग्रहित की गई हैं, उसके मुआवजे के रूप में किसानों को अच्छी रकम मिल रही है, उस रकम से वह अपने जरूरत के काम कर रहे हैं।

लब्बोलुआब यह है कि यूपी में सड़कों के माध्यम से पूर्वी यूपी से लेकर पश्चिमी यूपी को एक सूत्र में पिरोने का काम किया गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से न सिर्फ यूपी के लोगों को लाभ मिल रहा है, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोगों का भी आवागमन सरल हुआ है। दशकों से पिछड़े पूर्वांचल के लिए एक्सप्रेस वे नई उम्मीदें और उमंग लेकर आया है। इसी तरह गंगा एक्सप्रेस वे पश्चिमी यूपी में विकास की नई इबारत लिखने वाला है।

प्रयागराज और मेरठ की यात्रा छह घंटे में पूरी होने से लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में कामकाज निपटाने में भी सुविधा होगी। बुंदेलखंड की बदहाली को बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे दूर करने वाला है। इससे दिल्ली की राह आसान होगी और बुंदेलखंड के तरक्के के रास्ते खुलेंगे।

इन एक्सप्रेस वे से प्रदेश में स्थानीय स्तर पर निवेश, रोजगार और पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में सड़कों को लेकर किए गए कार्यों का लाभ सीएम योगी को मिल सकता है और वह सड़कों से सत्ता के सिंघासन का सफर तय कर सकते हैं।
(नोट- लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह उनके निजी विचार हैं)


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