जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही हिजरी संवत 1448 का आगाज़ हो गया। पहली मुहर्रम के अवसर पर शहर के विभिन्न इमामबाड़ों में अज़ादारी का सिलसिला शुरू हो गया। मातमी अंजुमनों ने अलम के जुलूस निकालकर करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मुहर्रम की चांद रात को इमामबारगाह सामानियान में मजलिस आयोजित की गई। मजलिस से पूर्व मरसियाखानी का कार्यक्रम हुआ, जिसमें आसिफ अल्वी, हमज़ा ज़ैदी और सलीम आब्दी सहित अन्य लोगों ने मरसिए पेश किए। मजलिस को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हसन हैदर सादिकी ने कहा कि मुहर्रम का महीना हज़रत इमाम हुसैन (अ.) और उनके साथियों की कुर्बानियों की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि करबला का संदेश इंसाफ, मानवता और अत्याचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने की शिक्षा देता है।
इस दौरान अंजुमन इमामिया ने अपने कार्यालय बड़तला अंसारियान से अलम का जुलूस निकाला, जबकि अंजुमन अकबरिया ने मोहल्ला ख्वाजा ज़ादगान से अलम निकालकर इमामबाड़ा अंसारियान तक पहुंचाया। अंजुमन-ए-सोगवारे अकबरिया के सदस्यों ने भी नौहाखानी और मातम करते हुए अलम के साथ इमामबाड़ा अंसारियान पहुंचकर अकीदत का इज़हार किया।मुहर्रम का चांद दिखाई देने के बाद शहर के इमामबाड़ों में अलम और ताज़ियों को सजाया गया तथा सोगवारों की आमद शुरू हो गई। आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में विभिन्न इमामबारगाहों में मजलिसों और मातमी जुलूसों का आयोजन किया जाएगा।

