Thursday, December 11, 2025
- Advertisement -

Supreme Court ने मोहम्मद शमी और पश्चिम बंगाल सरकार से मांगा जवाब, हसीन जहां ने गुजारा भत्ता बढ़ाने की लगाई गुहार

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उनकी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां के बीच चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में शमी और पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा है। यह नोटिस हसीन जहां की उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें उन्होंने अपने और बेटी के लिए गुजारा भत्ता (maintenance allowance) की राशि बढ़ाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा तय की गई अंतरिम राहत की राशि फिलहाल उचित लगती है, लेकिन अंतिम आदेश देने से पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनना आवश्यक है। कोर्ट ने शमी और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी लिखित प्रतिक्रियाएं (written replies) अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

हाई कोर्ट का पिछला आदेश

इससे पहले, कलकत्ता हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि मोहम्मद शमी को अपनी पत्नी हसीन जहां को ₹1.50 लाख प्रति माह, और अपनी बेटी को ₹2.50 लाख प्रति माह देना होगा। इस तरह कुल ₹4 लाख रुपये का मासिक भरण-पोषण भत्ता तय किया गया था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि, “पति (शमी) को बच्चे की शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों में अपनी इच्छा से अतिरिक्त सहायता करने की स्वतंत्रता होगी।”

हसीन जहां की सुप्रीम कोर्ट में अपील

हसीन जहां ने अब इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि तय की गई राशि वर्तमान जीवन-यापन, शिक्षा और मेडिकल खर्चों के लिए अपर्याप्त है।
उन्होंने अदालत से भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग की है।

विवाद की पृष्ठभूमि

मोहम्मद शमी और हसीन जहां के बीच विवाद साल 2018 में सार्वजनिक हुआ था। हसीन जहां ने शमी पर घरेलू हिंसा, धोखाधड़ी और विवाहेतर संबंधों के आरोप लगाए थे। इसके बाद दोनों अलग रहने लगे और मामला अदालत में चला गया। पिछले सात वर्षों से यह मामला विभिन्न अदालतों में लंबित है — पहले परिवार न्यायालय, फिर कलकत्ता हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति का अवलोकन

न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने अपने आदेश में कहा था — “मेरे विचार में, याचिकाकर्ता (हसीन जहां) को ₹1.5 लाख और उनकी बेटी को ₹2.5 लाख प्रति माह देना मामले के निपटारे तक दोनों के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा।”

आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में दोनों पक्षों के जवाब आने के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट इस दौरान यह भी देखेगा कि शमी की वर्तमान आय और संपत्ति विवरण क्या हैं, ताकि वास्तविक वित्तीय क्षमता के अनुसार अंतिम निर्णय दिया जा सके।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Bijnor News: पटाखा फैक्ट्री में हुआ धमाका अधिकारियों ने की फैक्ट्री सील

जनवाणी संवाददाता | नहटौरः एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक धमाका...

Shah-Bhagwat Andaman Visit: सावरकर की प्रतिमा का अनावरण, अमित शाह और भगवत का अंडमान दौरा

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह...
spot_imgspot_img