Wednesday, April 22, 2026
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टिकटों को लेकर खूब मचा घमासान आखिरी क्षण तक दिखाए दांव पेंच

  • भाजपा के लिए एक तरह से ये 2024 के लोकसभा चुनाव का माना जा रहा सेमीफाइनल
  • सुमन को बसपा से टिकट मिलने पर बदले सरधना के समीकरण
  • भाजपा ने जनपद के सरधना, मवाना नगर पालिका परिषद के प्रत्याशियों के नामों की हुई घोषणा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भाजपा के टिकट को लेकर जितना घमासान इस बार हुआ, पहले कभी नहीं हुआ। भाजपा के लिए एक तरह से ये 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा हैं, तभी तो टिकटों को लेकर घमासान मची हुई थी। मेयर पद के लिए पहले दिन से भाजपा का एक ग्रुप हरिकांत अहलूवालिया के लिए जुटा था। पहले दिन से ही हरिकांत का नाम टॉप पर रहा।

कोर कमेटी की मीटिंग में इनके अलावा किसी दूसरे नाम पर चर्चा तक नहीं की गई। जिसने चर्चा भी की, तभी हरिकांत ग्रुप के लोग चर्चा करने वालों पर हावी हो जाते थे। दरअसल, आखिरी क्षणों तक दांव पेंच दिखाये, लेकिन भाजपा में जो पहले दिन नाम फाइनल किया, उसी पर आखिरी दिन मुहर भी लगी। भाजपा की एक बड़ी लॉबी हरिकांत के नाम को लेकर आगे बढ़ा रही थी, जिसके चलते उसके नाम पर फाइनल मुहर लगी।

इस बार टिकटों को लेकर सबसे अधिक खींचतान रही। खींचतान में खूब खेमेबंदी भी हुई और एक-दूसरे की टांग खिंचाई भी हुई। मेयर की सीट सबसे हॉट रही। यहां दावेदारों के बीच सबसे अधिक घमासान हुआ है। कई नाम दावेदारों के थे, लेकिन पार्टी को पूर्व मेयर हरिकांत पर ही भरोसा करना पड़ा। हरिकांत के नाम से पार्टी के कुछ नेता नाखुश हैं।
जिस तरह से सरधना में बगावत हुई हैं, ठीक वैसे तो मेयर पद को लेकर कोई उम्मीदवार चुनाव में उतरने वाला नहीं हैं,

लेकिन भितरघात का सामना हरिकांत को करना पड़ेगा। निकायों के टिकट को लेकर भाजपा के सिंबल पर दावेदारों ने इस बार अधिक रुचि दिखाई है। सपा से पहले सीमा प्रधान का टिकट घोषित हो चुका हैं। सबसे ज्यादा प्रत्याशी भाजपा के पास ही थे। सपा में शहर विधायक रफीक अंसारी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन बसपा में मुस्लिम प्रत्याशियों ने कोई खास तव्वजो टिकटों को लेकर नहीं दी।

बसपा नेता एवं पूर्व सांसद शाहिद अखलाक परिवार ने पहले तो टिकट मांगा था, लेकिन वर्तमान में अचानक चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद बसपा के पास कोई मजबूत प्रत्याशी सामने ही नहीं आया। इस तरह से बसपा के लिए मेयर का पद बेहद अहम रहा हैं। मुस्लिम और दलितों का गठजोड़ बनने के बाद बसपा को सफलता मिलती रही हैं, लेकिन इस बार बसपा खास चेहरा चुनाव मैदान में नहीं दे सकी। भाजपा में टिकट मांगने वालों की लंबी फेहरिस्त थी। यहां टिकट के लिए भी खेमेबंदी कम नहीं थी।

भाजपा से बांके की बगावत, बसपा का थामा दामन

सरधना: सरधना सीट पर भाजपा से प्रबल दावेदार रही सुमन पंवार ने पार्टी से बगावत करते हुए बसपा का दामन थाम लिया है। भाजपा ने सुमन को नजर अंदाज किया तो बसपा ने उन्हें टिकट देकर मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार किया है। रविवार रात सुमन को टिकट मिलने के बाद बसपा कार्यकर्ता भी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। वहीं, सुमन पंवार को सपा से टिकट मिलने पर चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

दरअसल, सरधना नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से टिकट लेने को सुमन पंवार पत्नी बांके पंवार तथा मंजू लता जैन पत्नी माणिक चंद जैन प्रबल दावेदार थे। इनमें माणिक चंद जैन की पत्नी को टिकट दिलाने में पूर्व विधायक संगीत सोम लगे हुए थे, जबकि बांके पंवार की पत्नी की सिफारिश केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद डा. संजीव बालियान कर रहे थे। इसमें संगीत सोम अपने समर्थक को टिकट दिलाने में कामयाब हो गए, जिसके चलते डा. संजीव बालियान के खेमे के बांके पंवार ने पार्टी से बगावत कर दी।

रविवार को दिन में भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित करते हुए मंजू लता जैन पर विश्वास जताया। सुमन को भाजपा से निराशा मिली तो बसपा ने इस मौके को बनाने का काम किया। रात होते-होते बसपा ने सुमन पवार को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। जैसे ही बसपा प्रत्याशी के रूप में सुमन का नाम सार्वजनिक हुआ तो राजनीति का समीकरण बदल गया। क्योंकि इससे पहले बसपा ने अपने प्रत्याशी के रूप में मेहरून्निसा पत्नी सुलेमान सा को उतारा था।

मगर भाजपा का प्रत्याशी घोषित होते ही बसपा ने भी अपने चुनावी रणनीति बदल दी। वहीं, सुमन पंवार के प्रत्याशी घोषित होते हुए बसपा कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए। कुल मिलाकर सुमन पंवार को बसपा से टिकट मिलने के बाद चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अब भाजपा को भी शुरू से मंथन करने की जरूरत पड़ेगी ।

पार्षद टिकट बदले जाने को लेकर भाजपा में बगावत, तीन पदाधिकारियों ने दिए इस्तीफे

महानगर के वार्ड-61 में राजेश रुहेला का टिकट काटे जाने को लेकर पार्टी में बगावत हो गई है। वार्ड अध्यक्ष समेत तीन पदाधिकारियों ने रात तक अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सोमवार को कुछ और इस्तीफे दिए जाने की चर्चा वार्ड में चल रही है। शास्त्री नगर स्थित वार्ड-61 में अभी तक राजेश रुहेला भारतीय जनता पार्टी के पार्षद के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

आगामी चुनाव में उन्होंने इस वार्ड से दावेदारी की। इनके साथ कुछ और पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं में पार्षद पद के लिए टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी की ओर से इस वार्ड के किसी निवासी को टिकट नहीं दिया गया है। इनके स्थान पर वार्ड-53 के निवासी निवर्तमान पार्षद वीरेंद्र शर्मा को वार्ड-61 से प्रत्याशी बनाया गया है। इसके विरोध में वार्ड अध्यक्ष विनोद गुप्ता, बूथ अध्यक्ष निखिल त्यागी और मूलचंद शर्मा ने लगभग एक जैसी भाषा का प्रयोग करते हुए अपना इस्तीफा महानगर अध्यक्ष को भेज दिया है।

तीनों पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफे में दो बातों की ओर मुख्य रूप से जानते लाया है पहला यह 30 वार्ड में क्या पार्टी नेतृत्व को कोई ऐसा कार्यकर्ता नहीं मिला, जिसको वार्ड पार्षद के रूप में चुनाव लड़ाया जा सके। इसके अलावा जिस व्यक्ति को यहां प्रत्याशी बनाकर भेजा गया है उन पर काफी गंभीर आरोप लगते रहे हैं।

17 जुलाई 2021 को नई सड़क नानू कंपाउंड में हुई एक घटना को लेकर 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में वीरेंद्र शर्मा के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो चुका है और वह जेल जा चुके हैं। इस पूरे प्रकरण पर निवर्तमान पार्षद राजेश रुहेला का कहना है कि पार्टी का जो भी निर्णय है, वह उन्हें स्वीकार है। वह पार्टी के एक सच्चे सिपाही के रूप में कार्य करते रहेंगे।

सरधना में मंजूलता जैन, मवाना में अखिल कौशिक पर चला दांव

भाजपा ने निकाय चुनाव के प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। अधिकांश जगह भाजपा ने नए चेहरों पर दांव चला है। सरधना नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर मंजूलता जैन व मवाना पालिका के अध्यक्ष पद पर अखिल कौशिक को प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा तमाम नगर पंचायतों के प्रत्याशियों के नामों की भी घोषणा कर दी।

आखिरकार भाजपा के प्रत्याशियों की सूची भी जारी हो गई है। कई दिनों से भाजपा की सूची आने की अटकले लगाई जा रही थी। भाजपा ने सरधना नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर नए चेहरे मंजूलता जैन को प्रत्याशी बनाया है। मानिकचंद जैन की पत्नी मंजूलता जैन भी लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही हैं। मवाना में अखिल कौशिक को चुनाव मैदान में उतरा गया हैं। हालांकि सरधना में भाजपा से टिकट मांग रहे बाके पंवार भी बागी बनकर चुनाव में ताल ठोंक सकते हैं,

ऐसी चर्चा चल रही हैं, जिससे भाजपा को खासी चुनौती का सामना करना पड़ सकता हैं। करनावल-सतीश कुमार, परीक्षितगढ़-सचिन अग्रवाल, लावड़-अर्चना सैनी, हस्तिनापुर-सुधा देवी, सिवालखास-रशीदा बेगम, बहसूमा-सचिन कुमार, खरखौदा-राजकुमार त्यागी, दौराला-अंजू गुप्ता, फलावदा-अशोक सैनी, शाहजहांपुर-नवनीत अग्रवाल, किठौर-मुमताज, खिवाई-मीरा चौहान, हर्रा-रामभूल चौहान को घोषित किया गया है।

राज्यमंत्री दिनेश खटीक की दो बहनों को मिला टिकट

भारतीय जनता पार्टी हाईकमान ने ऐलान किया था कि पार्टी के विधायक, सांसद के घर वालों को टिकट नहीं दिया जाएगा। जब स्थानीय निकायों के टिकट बंटने शुरू हुए तो पार्टी ने कुछ लोगों के लिये यह नियम लागू नहीं किया। परिवारवाद का विरोध करने वाली भाजपा ने राज्यमंत्री दिनेश खटीक की दो बहनों को चुनाव मैदान में उतारा है। मेरठ की हस्तिनापुर सीट से विधायक और राज्यमंत्री दिनेश खटीक की एक बहन वर्षा मोगा सहारनपुर के सरसावा से भाजपा के टिकट पर चेयरमैन का चुनाव लड़ रही है।

वहीं राज्यमंत्री की दूसरी बहन सुधा देवी को पार्टी ने हस्तिनापुर सीट से चेयरमैन प्रत्याशी घोषित किया है। जहां पार्टी में मंत्री नंदगोपाल नंदी की पत्नी और प्रयागराज से मेयर रहीं अभिलाषा नंदी का टिकट परिवारवाद के नाम पर काट दिया। वहीं राज्यमंत्री की दो बहनों का टिकट होने पर तमाम सवाल उठ रहे हैं। पूरे वेस्ट यूपी में मंत्री की बहनों के टिकट को लेकर चर्चाएं जोरों पर है। गौरतलब है कि सहारनपुर के सरसावा से वर्षा के पति निवर्तमान चेयरमेन हैं।

ये है भाजपा चेयरमैन पद के प्रत्याशियों की सूची

नगर पंचायत प्रत्याशी

करनावल सतीश कुमार

परीक्षितगढ़ सचिन अग्रवाल

लावड़ अर्चना सैनी

हस्तिनापुर सुधा देवी

सिवालखास रशीदा बेगम

बहसूमा सचिन कुमार

खरखौदा राजकुमार त्यागी

दौराला अंजू गुप्ता

फलावदा अशोक सेनी

शाहजहांपुर नवनीत अग्रवाल

किठौर मुमताज

खिवाई मीरा चौहान

हर्रा रामभूल चौहान

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