Wednesday, March 18, 2026
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शहर में हो गए हजारों अवैध निर्माण

  • खामोश है आवास विकास के अफसर, आवास विकास की ओर से कार्रवाई केवल नोटिस भेजने तक ही सीमित

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आवास विकास और मेडा विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते शहर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण खड़े हो गए हैं। आलम ये है कि आवास विकास परिषद द्वारा लगभग तीन हजार अवैध निर्माण की सूची प्राधिकरण को सौंपे हुए लगभग दो माह से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक एक भी अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई है।

हालांकि मेडा ने अपने दायरे में आने वाले अवैध निर्माणों पर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन आवास विकास के अधिकारी अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने नाम पर सिर्फ नोटिस भेज कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। जिसके चलते अवैध निर्माणकर्ताओं के हौसले दिन-प्रतिदिन बुलंद होते जा रहे हैं।

बता दें कि शहर में बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर प्रशासन और शासन तक शिकायतों के बाद आवास विकास परिषद की ओर से मेडा को अवैध निर्माणों की सूची भेजी गई थी। जिनमें तकरीबन तीन हजार अवैध निर्माणों को चिन्हित किया गया था। जिसमें शास्त्रीनगर, जागृति विहार, माधवपुरम आदि क्षेत्रों में 2973 अवैध निर्माण बताए गए थे। इनमें रिहायशी क्षेत्र में अवैध अस्पताल, शोरूम, रेस्टोरेंट्स व्यवसायिक गतिविधियां और दुकानें शामिल हैं, लेकिन आवास विकास के अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय महज सूची भेजकर हाथ थाम लिया।

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साथ ही सीलिंग का अधिकार न होने का बहाना बनाते हुए कार्रवाई करने से परहेज किए हुए हैं। आवास विकास की ओर से अवैध निर्माण पर कार्रवाई केवल नोटिस तक ही सीमित रह गई है। आलम ये है कि आवास विकास के शास्त्रीनगर स्थित मुख्य कार्यालय से कुछ दूरी पर ही एक ब्लॉक में अवैध निर्माण खड़ा हुआ है, इसके अलावा दर्जनों बड़े अवैध निर्माण शहर में तेजी से चल रहे हैं।

वहीं, आवास विकास चौराहे पर अवैध रेस्टोरेंट मेडा की सीलिंग की कार्रवाई और एफआईआर के बाद भी चल रहे हैं, जबकि प्रशासन ने निगरानी का जिम्मा आवास विकास को दिया हुआ है। इस संबंध में आवास विकास परिषद के अधिकारियों का कहना है कि आवास विकास परिषद ने अवैध निर्माण का विस्तृत ब्योरा मेडा को उपलब्ध करा दिया है। कई भवनों को चिन्हित कर ध्वस्तीकरण सूची की मांग की गई है, लेकिन पुलिस फोर्स की उपलब्धता नहीं होने के कारण कार्रवाई नहीं हो रही है।

अपने मार्गों की खुद निगेहबानी करेगा पीडब्ल्यूडी

मुख्य मार्गों पर आवारा पशुओं की चहलकदमी व झुंड के रूप में इक्ट्ठा होकर बैठने के चलते आवागमन में होने वाली परेशानियों को देखते हुए पीडब्ल्यूडी अब खुद बीड़ा उठाएगा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष अरविन्द जैन ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्यमार्गों, प्रमुख जिला मार्गों एवं अन्य जिला मार्गों पर प्राय: यह देखने में आया है कि यहां कई जगहों पर आवारा पशुओं की चहलकदमी होती है तथा कई बार यह आवारा पशु झुंड की शक्ल में बीच सड़क पर बैठ जाते हैं।

इस कारण जहां आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है। वहीं सड़क दुर्घटनाओं का अंदेशा भी बना रहता है। क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं को भेजे गए पत्र में ऐसे मार्गों का पूरा विवरण मांगा गया है। जो प्रारूप क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं को भेजा गया है। उसमें संबंधित जनपद के नाम से लेकर संबंधित मार्गों के नाम एवं मार्गों की श्रेणी का ब्योरा मांगा गया है। यह पत्र क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं के पास सोमवार को पहुंच गए तथा एक सप्ताह के भीतर भेजे गए प्रारूप पर विवरण तलब किया गया है।

पीडब्ल्यूडी से जुड़े सूत्रों के अनुसार संभव है कि प्रदेश भर से विवरण आने के बाद विभाग इस पर कोई कार्ययोजना तैयार करेगा ताकि आए दिन आवारा पशुओं के चलते होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसी जा सके। इन आवारा पशुओं के चलते जहां दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। वहीं जाम की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है।

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