
संसद के बजट सत्र के लगभग दोनों हिस्से हंगामे की भेंट चढ़ गए। एक तरफ लोकतंत्र के संदर्भ में राहुल गांधी द्वारा लंदन में दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस पर हमलावर भाजपा राहुल गांधी की माफी पर अड़ी हुई है, तो दूसरी ओर विपक्षी दल अडाणी मुद्दे को लेकर लगातार जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) की मांग कर रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की सुलह की कोशिशों के बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त वार-पलटवार जारी रहने के कारण संसद के दोनों सदनों में काम-काज नहीं हो पा रहा। माननीय सांसदों के इस व्यवहार से न केवल सदन का, बल्कि ‘लोक’ और उसकी भावनाओं का भी अपमान हुआ है, क्योंकि लोकतंत्र के महापर्व से निकलकर ‘तंत्र’ का प्रमुख हिस्सा बने बैठे लोगों यानी सत्ता पक्ष और विपक्ष के माननीयों को यह अवसर ‘लोक’ और उसकी भावनाओं के कारण ही मिला है।