Tuesday, April 21, 2026
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आया समय रबी फसलों का

KHETIBADI 2


मानसून की बड़ी मेहरबानी से देश-प्रदेश में औसत से अधिक वर्षा इस वर्ष मिली है। अधिक वर्षा के चलते भूमिगत जलस्तर भी बढ़ा है। खरीफ मौसम में अतिवृष्टि से फसलों का जो नुकसान हुआ है किसानों को हानि पहुंची है, उसकी भरपाई मुश्किल है पर किसान भाईयों की हिम्मत है कि खरीफ में चोट खाने के बावजूद रबी की तैयारी में जुट जाएगा। रबी फसलों की तैयारी करने का समय आ गया है, तैयारी में सबसे अहम बात होती है बीज की व्यवस्था, उर्वरक की खरीदी चूंकि प्राकृतिक रूप से खरीफ की तुलना में रबी की बुआई के लिए पर्याप्त समय रहता है। कहावत भी है खरीफ के तीन दिन तो रबी के तेरह दिन परंतु फिर भी देखा गया है कि रबी फसलों की बुआई में ही गड़बड़ी हो जाती है और समय चूकने पर पछतावा ही रह जाता है।

रबी में दो तरह की संभावनाएं रहती हंै एक रबी पड़ती और दूसरी खरीफ काटने के बाद रबी फसलों की बोनी यह एक ऐसा समय रहता है कि बोआई के निर्णय लेने में चूक हो सकती है। खरीफ में पड़ती खेत की तैयारी सतत बखर पाटा करके करना चाहिये। ताकि भूमिगत नमी बनी रहे। भूमि का तापमान हमेशा बाहरी तापमान से अधिक होता है इस कारण इसका भी ध्यान रखना जरूरी होता है कि बुआई अधिक तापमान में नहीं हो जाए अन्यथा अंकुरण प्रभावित होना निश्चित है। रबी फसलों में सबसे पहले बुआई तोरिया, अलसी, चना, कुसुम तथा असिंचित गेहूं की करें। तोरिया एक ऐसी फसल है जिसे काटकर सिंचित चना-गेहूं सरलता से लगाया जा सकता है। रबी फसलों की बुआई किसी भी कीमत में अक्टूबर 15 के पहले ना की जाये, तोरिया की बुआई 30 सितम्बर के आसपास की जा सकती है परंतु ध्यान रहे अंकुरण उपरांत इसे माहो के प्रकोप से बचाना नितान्त जरूरी है।

चूंकि इस वर्ष सब जगह आवश्यकता से अधिक वर्षा हुई है भूमिगत जल स्तर भी बढ़ा है सिफारिश के अनुरूप सभी फसलों में भरपूर उर्वरक दिया जाए ताकि अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त हो सके। देखने में आया है कि ‘आल’ भूमिगत नमी के उड़ने की चिंता में उच्च तापमान पर गेहूं की बुआई कर दी जाती है जो सर्वथा गलत है रबी फसलों में बुआई का क्रम ठीक उपरोक्त बतलाये क्रम से ही की जाना चाहिये।

अलसी का बीज चिकना रहता है अतएव उसकी बुआई में विशेष ध्यान देना होता है अनुभवी श्रमिक ही यह कार्य ठीक से कर सकते हैं। सभी फसलों के बीज का उपचार फफूंदनाशी से किया जाना जरूरी होगा उपचारित बीजों का अंकुरण अच्छा होता है अच्छा अंकुरण अच्छी पौध तो निश्चित ही अच्छा उत्पादन। उल्लेखनीय है कि कहीं-कहीं कृषक भूलवश गेहूं की सिंचित किस्मों जिनकी बुआई 15 नवम्बर के बाद होनी चाहिए अक्टूबर में ही कर देते हंै, परिणामस्वरूप कंसे जल्दी फूट जाते हंै दाने कम आते हंै और श्रम एवं अर्थ दोनों की हानि होती है। विकसित जातियां जिनकी बुआई मौसम में ठंडक आने पर ही होनी चाहिए अन्यथा अधिक तापमान से प्रभावित होकर फसल में विचित्र स्थिति पैदा हो जाती है उद्यानिकी फसलों में अगेती मटर तथा आलू भी लगाया जा सकता है। मटर की हरी फल्लियां बेचकर तथा आलू निकाल कर सिंचित गेहूं की फसल सरलता से ली जा सकती है। रबी फसलों में सभी को बड़ी उम्मीद रहती है और मौसम की अनुकूलता ओस और ठंडक से फूल-फलन अच्छा होता है अतएव इन फसलों की बुआई पर विशेष ध्यान रखकर अच्छे उत्पादन की नींव पुख्ता करें।


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