Monday, September 20, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutयोजना के आंकड़ों में अव्वल, धरातल पर जीरो

योजना के आंकड़ों में अव्वल, धरातल पर जीरो

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  • उद्यमियों की मांगे 20 साल बाद भी न हुई पूरी, खेल सामग्री उत्पादन में अव्वल
  • सुविधाओं का अभाव, कई बार कमिश्नर, सांसद के सामने रखीं गईं मांगे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर भले ही एक जनपद एक उत्पाद योजना में पूर प्रदेश में अव्वल हो, लेकिन यहां धरातल पर स्थिति कुछ ओर है। सरकार नए उद्योग खोलने को लोगों को ऋण देने की बात तो कर रही है, लेकिन जिन खेल उद्योगों के चलते मेरठ अव्वल है उन्हीं उद्यमियों की मांगे पिछले कई वर्षों से पूरी नहीं हो पा रही है।

जहां उद्योग संचालित है वो क्षेत्र आज तक विकसित नहीं हो पाए हैं। उद्योग लगाने के लिए मिलने वाले प्रमाण पत्रों व करों के लिए भी उन्हें चक्कर काटने पड़ते हैं।

शहर के उद्यमी पिछले कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है। खेल उद्योग की बात करें तो यहां क्रिकेट बॉल, बेट, बेडमिंटन, फुटबॉल समेत सभी खेलों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री का निर्माण होता है।

बड़ी-बड़ी कंपनियों से माल बनकर विदेशों में जाता है। जिससे मेरठ का नाम विदेशों तक मशहूर है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उद्यमी अपनी मांगों को लेकर परेशान हैं, जिनका समाधान नहीं हो रहा है। जबकि वह अपनी मांगों को कमिश्नर, नगर निगम, एमडीए विभाग के अधिकारियों के सामने रख चुके हैं।

उधर, सरकार की इस योजना की बात करें तो प्रदेश में ओडीओपी योजना में ऋण देने में मेरठ अव्वल आया है, लेकिन जो पहले से खेल उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं उनकी सुविधा के नाम पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है।

ये हैं प्रमुख मांगे                                                                             

  • उद्यमियों को मिले औद्योगिक क्षेत्र।
  • उद्योग स्थापित किए जाने में आ रहीं समस्याओं का हो समाधान।
  • गृहकर के नाम पर उद्यमियों को परेशान कर रहा नगर निगम।
  • पीएनजी उपलब्ध कराई जाए।
  • उद्योग बंधु की बैठक में उपस्थित हो सभी विभाग के अधिकारी।
  • प्रदूषण अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए किया जाता है परेशान।
  • उद्योग क्षेत्रों का नहीं हुआ विकास, सड़के टूटी, जल निकासी नहीं।
  • निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का नहीं मिलता लाभ।
  • विदेशों में नमूने भेजने पर होता है अतिरिक्त खर्च।
  • कश्मिीरी विलो आसानी से प्राप्त हो।
  • टैक्स व अन्य करों में दी जाए छूट।

जब इस संबंध में आईआईए अध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल से फोन पर वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि इन सभी समस्याओं को लेकर लोकल स्तर पर लगातार उद्योग बंधु की बैठक होती है। जिसमें कमिश्नर व अन्य अधिकारियों के सामने मांगे रखी जाती हैं, लेकिन मांगों पर कार्य नहीं हो पा रहा है।

नगर निगम और एमडीए स्तर पर तो उद्यमियों को परेशान किया जाता रहा है। उनकी कई मांगे अभी तक अधर में है। ओडीओपी को लेकर अभी 14 अगस्त को मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की गई है। उनकी ओर से रोडटेप की दरे भी लागू कर दी गई हैं। अन्य मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया गया है।

औद्योगिक क्षेत्र की मांग को सरकार तक पहुंचाया जा चुका है। इस पर वार्ता चल रही है। उम्मीद है जल्द ही इस पर कोई निर्णय निकल कर आएगा। इसके अलावा उद्यमियों की कई डिमांड को मंत्री पीयूष गोयल ने पूरा कराया है। इसके लिए उनका धन्यवाद और अन्य मांगों को जल्द पूरा कराने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा जिला स्तर पर आने वाली समस्याओं को अधिकारियों से बात कर उद्यमियों की समस्याओं का जल्द निपटारा कराया जाएगा।
-राजेन्द्र अग्रवाल, सांसद मेरठ-हापुड़ लोकसभा

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