जनवाणी ब्यूरो |
सहारनपुर: दक्षलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म की पूजा अर्चना और आराधना की। प्रभात में सूर्य की किरण के साथ मंदिर में श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक करने के पश्चात इंद्र वेश में पूजा अर्चना का प्रारंभ किया।
संगीतमय पूजा अर्चना को देख और सुनकर हर कोई भक्ति भाव में सराबोर होता दिखाई दिया। उत्तम शौच धर्म अर्थात क्रोध मान माया और लोग से मुक्त होना ही उत्तम सोच कहलाता है आत्मा की निर्मलता होना उत्तम शौच धर्म है। आवास विकास के चौधरी संदीप जैन ने बताया कि जैन श्रावको के लिए दक्ष लक्षण धर्म सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। अशुभ कर्मों से मलिन आत्मा को शुद्ध करने के लिए मिट्टी,अग्नि,जल समर्थ नहीं है। इसके लिए ज्ञान,तप,ध्यान,धर्म रूप एंजेल से आत्मा का प्रक्षालन कर उसे शुद्ध किया जा सकता है।

