Tuesday, May 28, 2024
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स्वच्छ भारत के नाम पर खजाना खाली

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  • नगर निगम में आडट सोर्सिंग कर्मचारी की कैसे कर दी वेतन वृद्धि की संस्तुति?

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर नगर निगम का खजाना खाली किया जा रहा है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए केंद्र और यूपी सरकार बड़ा बजट दे रही है, लेकिन सरकार की योजना को अधिकारी पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला एसबीएम सेल का सामने आया है। एसबीएम में 10 से 12 लोगों को आउटसोर्सिंग पर भर्ती किया गया है। इन सभी की वेतन स्वच्छ भारत मिशन से दी जा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मयंक मोहन नाम के एक व्यक्ति को एसबीएम में आउटसोर्सिंग पर भर्ती किया गया है,

जिसका वेतन वर्तमान में 60 हजार रुपये प्रति माह नगर निगम दे रहा है, लेकिन हाल ही में उनके वेतन में वृद्धि करने की संस्तुति कर दी गई है, जिसकी फाइल वर्तमान में नगर आयुक्त के टेबल पर पहुंच गई है। वृद्धि भी इतनी की आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। 60 हजार रुपये प्रति माह से बढ़ाकर सीधे 90 हजार रुपये प्रतिमाह करने की संस्तुति अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार के स्तर से की गई हैं।

दरअसल, अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार मेरठ से पहले गाजियाबाद में तैनात थे। गाजियाबाद में ही मयंक मोहन भी उनके साथ तैनाती पा रहे थे। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार और मयंक मोहन का आपस में गहरा गठजोड़ है, जिसके चलते कई मामलों में खेल करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। अब अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार की तैनाती मेरठ में हुई है तो अपर नगर आयुक्त ने मयंक मोहन की तैनाती भी अपने साथ एसबीएम सेल में करा ली हैं।

कबाड़ से जुगाड़ बनाने का खेल गाजियाबाद में भी किया गया और अब स्वच्छ भारत के तहत कबाड़ से जुगाड़ का खेल मेरठ में भी चल रहा है। अब इस कबाड़ से जुगाड़ में कितना खर्च किया जा रहा है, इसका कोई हिसाब किताब नगर निगम के अधिकारी देने को तैयार नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि 90 हजार रुपये प्रति माह वेतन की संस्तुति अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने मयंक मोहन की कैसे कर दी? यह बड़ा सवाल है।

हालांकि नगर आयुक्त डा. अमित पाल शर्मा ने इसे स्वीकृत नहीं किया है। फिलहाल उनकी टेबल पर यह फाइल विचाराधीन है। इससे भी बड़ा खेल यह है कि मयंक मोहन आउटसोर्सिंग पर नगर निगम के कर्मचारी है, लेकिन उन्हें सुविधा एक क्लास अफसर की दी जा रही हैं। ये भार सीधे नगर निगम के खजाने पर पड़ रहा हैं। उन्हें गाड़ी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है तथा उनके घर पर निगम के कर्मचारी भी तैनात हैं।

यह सुविधा आउटसोर्सिंग के कर्मचारी को देने कहां का औचित्य हैं? निगम बॉयलाज आउट सोर्सिंग कर्मी को ये सुविधा देने का कहीं उल्लेख नहीं हैं। इसका भी कोई जवाब नगर निगम के अफसरों के पास नहीं है। हालांकि बाइलॉज में एक्सईएन स्तर के अधिकारी को ही गाड़ी उपलब्ध कराई जा सकती है, लेकिन यहां आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को भी गाड़ी की सुविधा दी जा रही है,

जिसका खर्चा प्रतिमाह 30 हजार रुपये आ रहा हैं, इसका उल्लेख निगम की लॉग बुक में दर्ज हो रहा है। इसके लिए जवाबदेही किसकी बनती है? यही नहीं, बोर्ड बैठक में भी मयंक मोहन की 60 हजार रुपये प्रति माह वेतन को लेकर भी हंगामा हो चुका है।

मेयर सुनीता वर्मा की तरफ से भी शासन को इस मामले में लिखा गया कि उनकी किसी बिना अनुमति के 60 हजार का वेतन मयंक मोहन को कैसे दे दिया गया? यही नहीं, 10 अन्य कर्मचारी भी मनमाफिक तरीके आउटसोर्सिंग पर भर्ती कर दिये गए। इसकी शिकायत शासन स्तर पर की गई। फिलहाल नगर निगम का स्वच्छ भारत मिशन का खजाना आउटसोर्सिंग के नाम पर खाली किया जा रहा है।

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