Wednesday, May 29, 2024
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मंडी में आने वाली राजस्व गिरावट में अब हो रही बढ़ोत्तरी

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  • सरकार के बदलते शासनादेश, कोरोना महामारी
  • रैपिड रेल लाइन निर्माण के चलते मंडी में कम प्राप्त हुआ राजस्व
  • पांच वर्ष पूर्व नौ करोड़ 33 लाख 97 हजार रुपये से घटा राजस्व
  • बीते वर्ष दो करोड़ 85 लाख रुपये तक आ पहुंचा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मंडी में सरकार के बदलते शासनादेश, कोरोना महामारी के साथ रैपिड रेल लाइन निर्माण के चलते कई वर्षों से राजस्व में भारी गिरावट आई है। इस वर्ष फल व सब्जी, जिसमें फलों में आम व केला पर मंडी के अंदर आवक होने पर एक प्रतिशत यूजर्स चार्ज लगाया गया। जिसके चलते इस वर्ष मंडी के राजस्व की गिरावट कुछ हद तक थमी है।

वहीं, फलों में आम व केले पर मंडी के बाहर होने वाली आवक पर यूजर्स चार्ज नहीं लिया जाता है। जिसके चलते अधिकतर फलों के आढ़ती मंडी के बाहर ही आम व केला के फलों के कारोबार को करते हैं, यदि यह दोनों फलों की आवक पूरी तरह से मंडी में हो जाये तो मंडी के राजस्व में कुछ बढ़ोत्तरी और भी संभव है।

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मंडी सचिव विजन बालियान ने बताया कि मंडी के राजस्व में कई कारणों से लगातार गिरावट होती चली आ रही है। जिसमें यदि चार या पांच वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाये तो मंडी के राजस्व में भारी गिरावट आई हैं। जिसमें वर्ष 2019-20 में मंडी शुल्क की आय को देखा जाये तो वह नौ करोड़ 33 लाख 97 हजार रु पये रही है। वहीं, अन्य श्रोतों को मिलाकर कुल आय 16 करोड़ 98 लाख 39 हजार रुपये रही है।

वहीं, यह आय वर्ष 2020-21 में घटकर मंडी शुल्क तीन करोड़ 39 लाख 39 हजार रुपये रह गया और कुल आय सात करोड़ 29 लाख 59 हजार रह गई, यदि आधे से भी कम हो गई। वर्ष 2021-22 में यह आय और भी घट गई, जिसमें दो करोड़ 85 लाख रह गई है और कुल आय सात करोड़ 47 लाख 98 हजार रुपये रह गई, लेकिन इस वर्ष बीते वर्ष की अपेक्षा होेने वाली गिरावट में कुछ कमी जरूर हुई हैं।

जिसमें वर्ष 2022-23 में जनवरी माह तक दो करोड़ 96 लाख छह हजार रुपये की राजस्व वसूली हुई हैं। वहीं, कुल वार्षिक आय में बढ़ोत्तरी नहीं हुई और वह सात करोड़ 30 लाख 43 हजार रुपये की हुई हैं। मंडी सचिव विजन बालियान ने बताया कि जून 2020 से पहले फल व सब्जी पर मंडी शुल्क दो प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया था। वर्ष 2021 में घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया।

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वहीं, मार्च 2020 में कोरोना महामारी रही हो या फिर 2021 से रैपिड रेल लाइन निर्माण का कार्य रहा हो, जिसके चलते लगातार मंडी के राजस्व में गिरावट आती चली जा रही है। वहीं, आम और केले के फल की मंडी में कम आवक होती है और अधिक आढ़ती इस कारोबार को मंडी के अंदर न करके बाहर करते हैं।

जिसके चलते मंडी को जो एक प्रतिशत का राजस्व प्राप्त होना चाहिए वह भी नहीं हो पाता और मंडी समिति के अधिकारी या कर्मचारी मंडी के बाहर होने वाले इस कारोबार पर एक प्रतिशत राजस्व या कोई जुर्माना आदि नहीं वसूल सकते। यदि मंडी के बाहर होने वाले इस कारोबार पर राजस्व वसूली का प्रावधान हो तो राजस्व में कुछ बढ़ोत्तरी जरूर हो सकती है।

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