- इस मामले में एक दारोगा रतिभान को पहले ही लाइन हाजिर कर दिया गया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पूर्व राज्यमंत्री हाजी याकूब के पुत्र फिरोज उर्फ भूरा के फर्जी पासपोर्ट मामले में शुक्रवार की देर रात को एसएसपी ने मेडिकल थाना के दो सिपाहियों लोकेश व अन्य को सस्पेंड कर दिया है। ये दोनों थाना मेडिकल में पासपोर्ट का कार्य देखते हैं। इस मामले में एक दारोगा रतिभान को पहले ही लाइन हाजिर कर दिया गया है। मामला सामने आने के बाद एसएसपी ने एसपी सिटी को इस मामले की जांच सौंपी थी। जांच से पता चला कि फिरोज उर्फ भूरा के पासपोर्ट के वैरिफिकेशन का काम मेडिकल थाना के दो सिपाहियों ने ही किया था। उल्लेखनीय है कि मेडिकल थाने से कोड एक्सिस कर पासपोर्ट रिपोर्ट का सत्यापन कर दिया।
यह सब कैसे हुआ, इसकी अभी जांच एसपी सिटी ने की है। फिलहाल, थाना मेडिकल ने भी कोतवाली थाने की तरह पासपोर्ट कार्यालय रिपोर्ट भेजकर याकूब कुरैशी, पत्नी शमजिदा बेगम, बेटे इमरान कुरैशी और फिरोज उर्फ भूरा समेत सात लोगों का पासपोर्ट निरस्त करने की रिपोर्ट गाजियाबाद पासपोर्ट आॅफिस भेजी पहले ही भेज दी है। फर्जी पासपोर्ट के जरिये देश से भागने की कोशिश कर रहे फिरोज उर्फ भूरा ही नहीं बल्कि उसके पिता समेत परिवार के जिन सदस्यों के खिलाफ मामले चल रहे हैं उन सभी का लाइसेंस निरस्त होने जा रहा है।
प्रदेश व्यापी सत्याग्रह टला अफसरों ने ली राहत की सांस
मेरठ: पीवीवीएनएल समेत प्रदेश भर के तमाम डिस्कॉम के संविदा कर्मचारियों को शुक्रवार से प्रस्तावित सत्याग्रह फिलहाल टाल दिए जाने से प्रदेश के पावर अफसरों ने राहत की सांस ली है। वहीं, दूसरी ओर विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रदेश व्यापी सत्याग्रह का विकल्प पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है, यूपीपीसीएल चेयरमैन के आग्रह पर केवल इसको स्थगित किया गया है। उन्होंने बताया कि यदि संविदा कर्मचारियों की बात नहीं सुनी जाती।
सरकार में बैठे अफसर उनका दुख दर्द नहीं समझते तो प्रदेश भर के संविदा कर्मचारी तो आस्तीन चढ़ाए बैठे हैं। उन्हें एक इशारे भर की देर है वो सत्याग्रह पर उतर आएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी यूपीपीएसीएल को चलाने वाले अफसरों की होगी। संविदा कर्मचारियों की शिकायतों व समस्यों की यदि बात करें तो उसकी गठरी बहुत भारी है। कुछ समय पहले फरमान जारी किया गया है कि तीन साल से एक बिजलीघर पर जमे संविदा कर्मचारी का ट्रांसफर किया जाएगा। विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह यूपीपीसीएल के इस फरमान से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका तर्क है कि नियमित कर्मचारियों पर ट्रांसफर पॉलिसी लागू होती है।
जहां तक प्रदेश भर के संविदा कर्मचारियों का सवाल है तो हर साल ठेकेदार बदलता है। जो नया ठेकेदार आता है वह नए सिरे से भर्ती करता है। वैसे भी ठेकेदार प्रथा में ट्रांसफर का कोई कांसेप्ट नहीं है। इसके अलावा ड्यूटी पर काम के दौरान हादसों का शिकार होने खासतौर से ऐसे कर्मचारी जिंदगी मौत हो जाती है उसके बीमा की राशि बढ़ाकर 24 लाख तथा वेतन 24 हजार रुपए जाने मांग भी संगठन के जिलाध्यक्ष ने की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि यूपीपीसीएल के चेयरमैन से इन मुद्दों पर सहमति बनी तो ठीक वर्ना सत्याग्रह का विकल्प खुला है।

