Sunday, June 21, 2026
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चुस्ती और तंदुरूस्ती के लिए क्या करें

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शरीर के लिए चुस्ती और तंदुरूस्ती का होना नितांत आवश्यक है। बिना चुस्ती, तंदुरूस्ती के शरीर आलस्य का शिकार हो जाता है और तरह-तरह की बीमारियां हावी हो जाती हैं। फलत: शरीर की ताजगी और उत्साह देखते ही ठंडा पड़ जाता है और शरीर में उमंग की लहर खत्म सी हो जाती है। शरीर को संतुलित बनाये रखने और चुस्त दुरूस्त रखने के लिए स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख बातों पर अमल करना नितांत आवश्यक है।

शरीर में रोगों का बोलबाला, असमय बीमार पड़ जाना, पेट विकार तथा सिर दर्द जैसी समस्याओं से लेकर भयानक बीमारियों की जड़ भी शरीर का असंतुलित होना है। जब तक शरीर की कार्य प्रणाली विधिवत नहीं रहती, तब तक समस्याएं तो बनी ही रहती हैं। इन सभी के कारण ही शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इसलिए चुस्ती और तंदुरूस्ती बरकरार रखने के लिए कुछ प्रमुख मापदण्ड हैं जिनके आधार पर आजीवन चुस्ती और तंदुरूस्ती का आलम बना रह जाता है।

नियमित व्यायाम करें

शरीर को रोगों से बचाने और स्फूर्ति के लिए व्यायाम करना बहुत जरूरी है। व्यायाम करने से रक्त का संचार भी विधिवत बना रहता है और हृदय संबंधी रोग भी पनपने नहीं पाते। व्यायाम करने का समय कम से कम 4० मिनट अवश्य होना चाहिए। इतने समय में संपूर्ण शरीर में सक्रियता लाई जा सकती है। व्यायाम करने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी एकत्र नहीं होने पाती और शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है।

नियमित व्यायाम करने से शरीर में रोगों से लड़ने की तीव्र शक्ति जागृत हो जाती है जिससे शरीर में असमय रोग नहीं पनप पाते। व्यायाम करते रहने से श्वास संबंधी रोग भी नहीं होते क्योंकि इससे आक्सीजन की पर्याप्त मात्र श्वास द्वारा अंदर प्रवेश कर जाती है और कार्बन डाइआक्साइड को बाहर निकालती है।

संतुलित आहार लें

शरीर में ताजगी और उत्साह लाने के लिए संतुलित आहार सर्वोत्तम है। संतुलित आहार की संज्ञा उस आहार को दी गई है जिसमें वसा, प्रोटीन, विटामिन एवं काबोर्हाइडेऊट की पर्याप्त मात्र उपस्थित हो। दूध, छाछ, संतरा, हरी सब्जियां, घी, टमाटर, नींबू, पालक, केला, अमरूद और आम सर्व सुलभ पौष्टिक एवं सस्ते आहार हैं। इनमें भरपूर पौष्टिक तत्व समाहित होते हैं। ये शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। संतुलित आहार लेने से पाचन शक्ति मजबूत रहती है एवं पेट संबंधी विकार भी नहीं होने पाते। तले हुए खाद्य पदार्थ, होटलों की निर्मित मिठाइयां एवं चाट पकौड़ी से परहेज रखना चाहिए। भीगे चने, अरहर की दाल, सोयाबीन तथा मटर से भी पर्याप्त पौष्टिक तत्व हासिल किये जा सकते हैं।

फलाहार एवं उपवास को महत्त्व दें

शरीर की आन्तरिक सफाई के लिए सप्ताह में एक बार उपवास करना आवश्यक होता है। उपवास रखने से पेट की विधिवत सफाई तो होती ही है, साथ ही शरीर के अनावश्यक पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं। उपवास करने से आंतों में सक्रि यता आती है एवं रक्त स्वच्छ रहता है। उपवास के दौरान अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। उपवास के दिन मात्र छाछ, नींबू पानी, संतरा या अन्य फलाहार लेना चाहिए। उपवास के दिन बार बार आहार नहीं लेना चाहिए।

सुबह से शाम तक मात्र जल ग्रहण करके ही रहना चाहिए। शाम को फल या दूध, दलिया या खीर लेकर व्रत का समापन कर देना चाहिए। हर सप्ताह उपवास करने से पेट में कब्ज की शिकायत भी नहीं होने पाती और पेट हल्का एवं साफ स्वच्छ बना रहता है। इसकी महत्ता पौराणिक ग्रन्थों में भी दर्शाई गई है। पूर्व काल के ऋषि मुनि आजीवन उपवास रखने की प्रक्रि या जारी रखते थे। तभी ओजस्वीपन और उत्साह उनकी रग रग में बसा रहता था। व्रत की महत्ता आजकल भी है परन्तु बहुत कम लोग ही इस नियम का पालन कर पाते हैं। यूं व्रत रखने से शरीर में बीमारी भी नहीं होने पाती।

नियमित स्नान करें

नियमित रूप से ठंडे पानी से स्नान करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। इससे शरीर में ताजगी तो महसूस होती है, मन भी प्रसन्न रहता है। ठंडे जल से स्नान करने से तन मन में स्फूर्ति आती है तथा त्वचा की सफाई भी विधिवत हो जाती है। गर्म जल की अपेक्षाकृत ठंडा जल स्नान के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। चूंकि ठंडे जल में ताजे पानी में आक्सीजन का मिश्रण होता है वह त्वचा के छिद्रों से अंदर प्रवेश कर जाता है।

इससे शरीर के नाड़ी तंत्र तथा स्नायुओं में ताजगी आती है। बीच-बीच में गर्म जल से स्नान करने से त्वचा संबंधी विकृति हो सकती है, इसलिए हमेशा एक प्रकार के जल ठंडे या गर्म जल से स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय पानी में गुलाब जल डालकर स्नान करने में और भी आनन्द आता है। नहाते समय अच्छे किस्म के साबुन का भी प्रयोग कर सकते हैं।

मानसिक तनाव से बचें

तंदुरूस्तीपूर्ण जीवन के लिए तनाव रहित रहना आवश्यक होता है। जो व्यक्ति तनाव भरी जिंदगी जीने के आदी हो जाते हैं, वे हमेशा रोगग्रस्त तो रहते ही हैं, साथ ही अल्पायु भी होते हैं। इसलिये आनन्दमय जीवन बिताने के लिए तनावरहित रहना आवश्यक है। निद्रा का अभाव, शोकावस्था में रहना, दहशत तथा वैचारिक मतभेद भी तनाव का कारण बन जाता है। इसके अतिरिक्त कुछ खान पान तथा रहन सहन भी मानसिक तनाव का कारण बन जाता है। कुछ हास्य एवं मनोरंजनपूर्ण किताबों का अध्ययन करते रहें। इससे बोरियत भी महसूस नहीं होगी और समय भी आराम से कट जायेगा।

उक्त बताये अनुसार यदि संयमित रूप से जीवन जीने की आदत डाल ली जाये तो आजीवन चुस्ती तंदुरूस्ती का आलम बनाये रखना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। हां, स्वास्थ्य संबंधी आयामों को नियमित रूप से पालन करना जरूरी होता है। फिर देखिये आप कैसे तरोताजा बने रहते हैं।

अमरलाल साहू


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