एक वर्ष के भीतर शहर में जितने निर्माण हुए हैं, उतने 10 वर्षों में भी नहीं हुए। प्राधिकरण का सुनियोजित विकास को अवैध निर्माणकर्ता ठेगा दिखा रहे हैं। एक तरह से शहर को बदसूरत बनाया जा रहा हैं। मास्टर प्लान पर कोई काम नहीं हुआ। यही वजह है कि रिकॉर्ड तोड़ अवैध निर्माण एक वर्ष के भीतर क्रांतिधरा पर करा दिये गए। इसके लिए प्राधिकरण अफसरों व इंजीनियरों की सीधे जिम्मेदारी हैं। बड़ा सवाल ये भी है कि इंजीनियरों का प्रत्येक तीन माह के भीतर कार्यक्षेत्र बदल दिया जाता हैं, लेकिन इंजीनियर से ये जवाबदेही नहीं ली जाती है कि कितने अवैध निर्माण हुए हैं, उनके लिए जिम्मेदारी किसकी हैं? इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती तो ये तय मानियेगा कि एक वर्ष के भीतर इतने अवैध निर्माण नहीं हुए होते। तमाम अवैध कॉलोनी विकसित कर दी गई। अवैध कॉपलेक्स बना दिये गए। आखिर इनका जिम्मेदार कौन हैं? मास्टर प्लान बनता किसके लिए हैं? सिर्फ खानापूर्ति के लिए…। अवैध निर्माणों को देखकर तो ऐसा ही लग रहा है।
- एनएच-58 पर अवैध निर्माणों की बाढ़
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कांवड़ यात्रा बीत गई, लेकिन मेरठ विकास प्राधिकरण इंजीनियरों की अभी नींद नहीं टूटी हैं। एनएच-58 स्थित ग्रीन वर्ज में निर्माणाधीन रेस्टोरेंट को खुली छुट क्यों दे रखी हैं? प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने जीरो टोलरेंस प्राधिकरण में करने के लिए तमाम इंजीनियरों को भी बदल दिया, लेकिन फिर भी इंजीनियर निर्माण तक नहीं रुकवा पा रहे हैं। अवैध निर्माणकर्ता के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।
रोहटा बाइपास पर स्थित है ईरा गार्डन कॉलोनी। इसके मुख्य गेट के दोनों तरफ ग्रीन वर्ज में दो रेस्टोरेंट बन गए हैं। कांवड यात्रा के दौरान दोनों में तेजी से काम किया गया, जिसको ‘जनवाणी’ ने प्रकाशित भी किया, मगर इसके बावजूद अवैध निर्माणकर्ता को रोका-टोका नहीं गया। निर्माण अवैध हैं, ये प्राधिकरण के इंजीनियर भी जानते हैं, मगर अब इंजीनियर अवैध निर्माणकर्ताओं को प्राधिकरण लॉ का ज्ञान देकर एक अर्जी प्राधिकरण में लगवा रहे है कि उनकी बिल्डिंग कपाउंडिंग की जाए।

ग्रीन वर्ज में दस प्रतिशत जमीन को कवर किया जा सकता हैं, बाकी को खाली दर्शाया जाता हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि ग्रीन वर्ज में ज्यादातर बिल्डिंग पूरी कवर कर ली गई हैं। जितने भी रेस्टोरेंट खुले हैं, उनमें पार्किंग तक की जगह नहीं हैं। हाइवे पर रात्रि में वाहनों की पार्किंग कर दी जाती हैं। ऐसे में कोई हादसा हो गया तो क्या इसके लिए मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारी जिम्मेदार होंगे? सड़कों पर पार्किंग की तस्वीर भी ‘जनवाणी’ के पास मौजूद हैं।
आखिर प्राधिकरण के अधिकारियों को ग्रीन वर्ज में अवैध निर्माणों को सख्ती से लेना चाहिए, तभी हाइवे पर बढ़ रही भीड़ से राहत मिल सकती हैं। गरम-धर्म, पंडित ढाबा, सुखदेव रेस्टोरेंट, चौटीवाला, पगडीवाला, जैन शिकंजी आदि बड़ी तादाद में हाइवे पर रेस्टोरेंट की भीड़ लग गई हैं। इनके पास पार्किंग तक नहीं हैं। जो भी यहां आता है, उनकी सड़कों पर ही वाहनों की पार्किंग होती हैं। बसों को भी सड़क पर लगा दिया जाता हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हाइवे पर हो सकता हैं।
ये होटल बन गया, इंजीनियरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
रोहटा बाइपास पर स्थित है शोभापुर पुलिस चौकी। इसके ठीक पीछे एक बड़ा होटल ग्रीन वर्ज में बनकर तैयार हो गया। एक वर्ष से ये होटल बनता रहा और प्राधिकरण के इंजीनियर देखते रहे। जब अवैध निर्माणकर्ता इंजीनियरों की नहीं सुन रहा था तो इसमें एफआईआर क्यों नहीं कराई गयी। इसके ध्वस्तीकरण के आदेश पारित क्यों नहीं किये? इसमें कहीं न कहीं इंजीनियरों की संलप्तिा स्पष्ट दिखाई दे रही हैं।
आखिर प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? इंजीनियरों को प्रवर्तन से ही हटा देना सजा नहीं हैं। इस तरह से तो कोई भी इंजीनियर पहले अवैध निर्माण करायेगा, फिर खुद को प्रवर्तन से अलग कर अपनी गर्दन बचा लेगा। इसमें तो ऐसा ही दिख रहा हैं। अवैध निर्माण कराने वाले इंजीनियरों पर ये कैसी मेहरबानी? ऐसे तो मेडा में जीरो टोलरेंस संभव नहीं होगा।
बन गया दुकान और मकान
बागपत बाइपास सर्विस रोड पर राज रिसोर्ट की दीवार से सटकर बाइपास चौराहे तक कई बड़े निर्माण कर प्लास्टर कर पुताई कर दी गई हैं। ये निर्माण कांवड यात्रा के दौरान हुए हैं। इनको रोकने की दिशा में कोई प्रयास नहीं हुआ। सर्विस रोड पर ही अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही हैं।

इसमें भी दुकान का निर्माण कर दिया गया हैं। एक मकान भी बिल्डिर ने प्राधिकरण की कार्रवाई से बचने के लिए बना दिया हैं। ये ज्ञान भी मेडा के इंजीनियर दे रहे हैं कि साहब मकान पर कार्रवाई नहीं करते, इसलिए पहले मकान बनवा दो। वहीं बिल्डर भी कर रहे हैं।
बन रहा कॉम्प्लेक्स
रोहटा बाइपास सर्विस रोड पर ही एक नया कॉम्प्लेक्स बन रहा हैं। लिंटर डालने की तैयारी चल रही हैं। ये पूरा निर्माण ग्रीन वर्ज में हैं, मगर इसे भी नहीं रोका जा रहा हैं। जब लिंटर डाल दिया जाएगा, इसके बाद मेडा इंजीनियरों की नींद टूटती हैं। तब मेडा की जेसीबी और मैन पावर का दुरुपयोग होता हैं। इसकी गिनती कहीं नहीं होती। ग्राउंड स्तर पर ही अवैध निर्माण को रोक दिया जाएगा तो फिर शायद अवैध निर्माण आगे नहीं बढ़ पायेगा।

