Tuesday, April 21, 2026
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आधी आबादी को आधा हिस्सा क्यों नहीं?

Samvad 1


ashok madhupमहिला आरक्षण बिल बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया। इस बिल में महिलाओं को संसद और विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था है। महिला आरक्षण बिल 1996 से ही अधर में लटका हुआ है। उस समय एचडी देवगौड़ा सरकार ने 12 सितंबर 1996 को इस बिल को संसद में पेश किया था, लेकिन पारित नहींं हो सका था। बार- बार ये बिल संसद में आया किंतु राजनैतिक दलों की इच्छाशक्ति न होने और अड़ंगेबाजी के कारण ये संसद के दोनों सदनों में पारित नहीं हो पाया। अब भाजपा के बहुमत और उसके रवैये से लगता है कि ये बिल पास हो जाएगा। किंतु देश में महिलाओं की आबादी आधी है। आधी आबादी को उनका आधा हिस्सा क्यों नहीं दिया जा रहा। संसद और विधान सभाओं में ही क्यों सभी नौकरी और राजकीय सेवाओं में महिलाओं को आधा हिस्सा क्यों नहीं दिया जाता? अभी ऐसा लग रहा है कि 2026 के लोक सभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण का लागू होना संभव नहींं है। ये आरक्षण लागू हो जाने के बाद महिला आरक्षण केवल 15 साल के लिए ही वैध होगा, लेकिन इस अवधि को संसद आगे बढ़ा सकती है। ज्ञातव्य है कि एससी-एसटी के लिए आरक्षित सीटें भी केवल सीमित समय के लिए ही थीं, लेकिन इसे एक बार में 10 साल तक बढ़ाया जाता रहा है। पहले बिल में संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव था।

इस 33 फीसदी आरक्षण के भीतर ही अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए उप-आरक्षण का प्रावधान था, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहींं था। इस बिल में प्रस्ताव है कि लोकसभा के हर चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए। आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन के जरिए आवंटित की जा सकती हैं। संसद के विशेष सत्र के तीसरे दिन बुधवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन विधेयक) पास हो गया। पर्ची से हुई वोटिंग में बिल के समर्थन में 454 और विरोध में दो वोट पड़े । बिल पर चर्चा में 60 सांसदों ने अपने विचार रखे।

राहुल गांधी ने कहा- ओबीसी आरक्षण के बिना यह बिल अधूरा है, जबकि अमित शाह ने कहा- यह आरक्षण सामान्य, एससी और एसटी में समान रूप से लागू होगा। चुनाव के बाद तुरंत ही जनगणना और डिलिमिटेशन होगा और महिलाएं की भागीदारी जल्द ही सदन में बढ़ेगी। विरोध करने से रिजर्वेशन जल्दी नहींं आएगा। चर्चा के दौरान टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण देने की मांग की।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महुआ मोइत्रा का नाम लिए बगैर कहा-मुस्लिम आरक्षण मांगने वालों को मैं बताना चाहती हूं कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण वर्जित है। कांग्रेस नेत्री और सांसद सोनिया गांधी बोलीं- तुरंत अमल में लाएं। सरकार को इसे परिसीमन तक नहींं रोकना चाहिए। इससे पहले जातिगत जनगणना कराकर इस बिल में एसी-एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाए।

खैर यह लगभग तय है कि बिल पाए हो जाएगा, किंतु सबसे बड़ी बात यह है कि जब ये आरक्षण 2026 से लागू होना है, तो अब पास कराने की क्या जरूरत थी? अब बिल को पास कराने के पीछे भाजपा का सीधा मकसद आगे आने वाले चुनाव में इसका लाभ उठाना है। ये राजनीति है। सब दल अपने हित के लिए काम कर रहे हैं, तो सवाल है कि भाजपा ही क्यों पीछे रहे। उसे ये लाभ उठाने मौका मिला और वह लाभ उठा रही है। मजे की बात यह है कि भाजपा के इस तुरप के इक्के के सामने सारा विपक्ष चित्त नजर आ रहा है।

पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार की हर बात का विरोध करने और संसद में बहस की जगह हंगामा करने वाला विपक्ष भी इस बिल के विरोध करने की हालत में नहीं। वह जान रहा है कि इस बिल के विरोध का मतलब महिलाओं को नाराज करना होगा। वह इसका समर्थन करके, अपना बिल बताकर वाहवाही लूटना चाहता है, जबकि सब जानते हैं नाम उसका होता है जो खेल में गोल करता है। इस बिल को पास कराकर भाजपा विपक्ष को चारों खाने में चित्त करने और महिलाओं की वाहवाही लेने में कामयाब हो गई। विपक्षी दल अपने गठबंधन का नाम इंडिया रखकर बहुत प्रसन्न थे।

सोच रहे थे कि भाजपा के पास इसका कोई तोड़ नहीं है, किंतु उन्हें पता नहीं था कि भाजपा महिला आरक्षण बिल लाकर महिलाओं की आधी आबादी के वोट पर अपना दावा बना सकेगी। उधर महिलाओं को अभी संसद और राज्य सभा में 33 प्रतिशत हिंस्सा मिला है, उम्मीद है कि आने वाली सरकारें उनकी आधी दुनिया को उनका आधा हिंस्सा देंगी।
आज सब क्षेत्र में महिलाएं आगे आ रही हैं। पैरामिलेट्री फोर्स और सेना तक में वह अग्रिम मोर्चों पर आगे आ रही हैं। आईएएस और आईपीएस में पहले से ही वे अपनी प्रशासनिक क्षमताएं दिखाती रही हैं। चिकित्सा और तकनीकि क्षेत्र में भी उनका पहले से ही दबदबा है।

अब तक राजनीति में प्रशासनिक अधिकारियों की पत्नी या चुनाव के लिए अयोग्य घोषित लालू यादव जैसों की पत्नी आकर मुख्यमंत्री तक बनती रहीं हैं। अब आरक्षण लागू करने के बाद राजनीति में शिक्षित और योग्य महिलाएं आकर देश को नई दिशा देंगी। उनकी देश की नीति निर्माण में भागीदारी बढ़ेगी। आरक्षण पाकर महिलाएं मायावती, जयललिता, ममता बैनर्जी, इंदिरा गांधी और सुषमा स्वराज की तरह कार्य कर अपनी पहचान बनाएंगी।


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