Tuesday, January 20, 2026
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शिक्षा से महिलाएं अपने परिवार का करती हैं उद्धार

जनवाणी संवाददाता |

कांधला: कांधला के जामिया आइशा लीलबनात में अर्धवार्षिक परीक्षा के समापन के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन का आयोजन किया गय। जिसमें मौलाना मजहर हुदा ने कहा शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं है बल्कि अच्छे संस्कार, अच्छे स्वभाव, अच्छे रहन-सहन के लिए आवश्यक है। इस क्षेत्र में केवल पुरुषों को ही नहीं प्रवेश करना चाहिए बल्कि महिलाएं भी इस मैदान में आकर अपने और अपने परिवार को अच्छी शिक्षा दें।

सुमैय्या खातून ने कहा कि कुछ लोगों की धारणा है कि महिलाएं सिर्फ किचन के लिए पैदा होती हैं और उनकी जिंदगी किचन से शुरू होकर टेबल पर खत्म होती है। ऐसी बाते बिल्कुल भी सही नहीं हैं। महिलाएं भी इंसान हैं, ज्ञान का प्रकाश मनुष्य को जीना सिखाता है। मंतशा ने कहा कि इस्लाम के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं महिलाओं के साहस और सरलता से महान क्रांतियां लाई गईं। तूबा फलक हाशमी ने कहा कि पैगंबर मुहम्मद साहब की पत्नी हजरत खदीजा ने उनसे शादी करने के बाद अपनी सारी संपत्ति इस्लाम की सेवा में समर्पित कर दी।

इसी तरह हजरत मुहम्मद (सल्ल.) की बेटी हजरत फातिमा ने हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन जैसे बच्चों को पाला। हजरत इमाम हसन ने शांति बनाकर देश को रक्तपात से बचाया। दो गुटों के बीच अपने प्राणों की आहुति देकर इस्लाम की रक्षा की।
इस मौके पर मौलाना सैयद बदरूल हुदा कासमी ने तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया इस मौके पर सबीहा खातून, तशरीबा, जीनत मारुफी, कारी मुद्दसिर, मौलाना सुल्तान आदि मौजूद रहे।

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