Tuesday, March 24, 2026
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 31 मई धुएं में धुआं होती जिंदगी

 

Samvad 52

 


तंबाकू एक ऐसा भस्मासुर है जो इसका इस्तेमाल करने वाले को ही धीरे-धीरे मौत की नींद सुला देता है। तंबाकू के दुष्परिणामों से पूरी दुनिया वाकिफ है और इसका सेवन करने वाला खुद इस बात को जानता है। विश्व में तंबाकू सेवन मौत का दूसरा बड़ा कारण है। पहला कारण हृदयाघात व हृदय संबंधी बीमारियां हैं।

दुनियां भर में प्रतिवर्ष लगभग 1.5 करोड़ नये कैंसर मरीजों का निदान होता है जिसमें से लगभग 70लाख लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक 12.5 प्रतिशत मौत कैंसर की वजह से होती है जो कि एड्स, टीबी एवं मलेरिया की शामिल रूप से होने वाली मौतों से कहीं ज्यादा है।

सिगरेट की डिब्बी हो या तंबाकू का पैकेट, सभी में लिखी वैधानिक चेतावनी के बावजूद तंबाकू के विविध रुप में प्रयोग की लत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। यह समाज और देश के लिए अत्यंत घातक है। चिकित्सकीय शोधों से जो परिणाम सामने आए हैं, वे भयावह है। धूम्रपान से हृदय रोग, दमा, ब्रोंकाइटिस, उच्च रक्तचाप, मोतियाबिंद, बांझपन, नपुंसकता, लकवा, अल्सर, मिर्गी, अल्पायु एवं विभिन्न प्रकार के कैंसर आदि की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार मात्र एक सिगरेट का सेवन मनुष्य की पांच मिनट आयु कम करने की क्षमता रखता है।

तंबाकू अनेक रसायनों का मिश्रण है। इसमें 100 किस्म के जहरीले कैंसरकारक रसायन हैं। साथ ही इसमें 63 अन्य नशीले पदार्थ भी मौजूद हैं। सिगरेट का धुआं भी कम हानिकारक नहीं है। इसमें अनेक विषैले रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जैसे टार, निकोटिन, कार्बन मोनो आक्साइड, निकल, जस्ता, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन क्लोराइड आदि। इन रसायनों में टार और निकोटिन सबसे घातक है।

जब सिगरेट के माध्यम से निकोटिन हमारे खून में प्रवेश करता है तो यह 7 सेकंड के अंदर ही दिमाग को प्रभावित करना शुरू कर देती है। सिगरेट से उत्पन्न धुआं मानव हृदय की धमनियों को विकारग्रस्त कर देता है जिससे हृदय में खून का प्रवाह कम हो जाता है। इस वजह से हृदयाघात के खतरे बढ़ जाते हैं। कुछ लोग धूम्रपान करना अपनी शान समझते हैं। याद रखिए यह शान नहीं, नशा है और नशा नाश की जड़ है। बस शब्द और मात्रओं का हेर फेर है।

महिलाओं के लिए धूम्रपान अभिशाप

दुनिया भर में धूम्रपान करने वाले पुरुषों की संख्या लगभग 90 करोड़ और महिलाओं की संख्या 20करोड़ है। एक सर्वेक्षण के अनुसार धूम्रपान करने वाली महिलाओं की सं?या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। यह समाज के लिए गंभीर चुनौती है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए धूम्रपान अभिशाप है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से ?रूण में विकृति, शिशु के वजन में कमी होने व शिशु में विकलांगता की आशंका तीन गुना बढ़ जाती है। धूम्रपान महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता में करीब 4० प्रतिशत कमी ला देता है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं के बच्चे भी प्राय: बुखार व श्वास संबंधी विकारों से ग्रस्त रहते हैं क्योंकि ऐसी मां के रक्त से निकोटिन दूध के जरिए शिशु के शरीर में पहुंच जाता है।

पियो न पियो, सिगरेट का धुआं ही घातक

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप धूम्रपान करते हैं या नहीं। यदि आपके फेफड़ों में किसी और की सिगरेट का धुआं जाता है तो भी आपका वही हश्र हो सकता है जो सिगरेट पीने वाले का होगा यानी वास्तविक धूम्रपान करने से कहीं अधिक घातक है ‘पैसिव स्मोकिंग’।

वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार धूम्रपान के दौरान खींचे गये धुएं की तुलना में धूम्रपान न करने वालों द्वारा, श्वास द्वारा लिए गये धुएं में कम से कम 5 गुना कार्बन मोनो आक्साइड, तीन गुना टार व निकोटिन तथा 46 गुना अन्य हानिकारक पदार्थ होते हैं। अध्ययन में पाया गया कि दूसरों की सिगरेट का धुआं झेलने पर मजबूर एक तिहाई लोगों के फेफड़े उतने ही खराब हो गये थे जितने कि धूम्रपान कर रहे लोगों के। इस तरह पार्श्व धूम्रपान के कारण फेफड़े के कैंसर से लगभग 4000 मौतें प्रतिवर्ष होती है तथा हृदय रोग के हजारों मामले सामने आते हैं।

आज देश-विदेश में अनेक सरकारी और गैर सरकारी संगठन अपने अपने स्तर पर इस मुंह लगी जहर तंबाकू के खिलाफ सक्रि य है। कुछ राज्य सरकारों ने सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर पाबंदी लगा रखी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आह्वान पर दुनियां भर में प्रतिवर्ष 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है लेकिन इस तरह की सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए कानून पर्याप्त नहीं होते। जन जागरण अधिक प्रभावी हथियार साबित होता है।

अभिभावकों व समाज के प्रबुद्धजनों को इस अभियान में शामिल होकर आने वाली पीढ़ियों को इस धीमे जहर से बचाने का प्रण लेना होगा। युवाओं को भी चाहिए कि वे तंबाकू के दुष्परिणामों को भली-भांति जानकर दृढ़ संकल्पित हो खुद को और समाज को तंबाकू मुक्त बनाने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दें।

उमेश कुमार साहू


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