Monday, April 20, 2026
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धरने पर बैठे ​पहलवान, यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे बृजभूषण, पढ़िए- पूरी कहानी

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। कई नामी पहलवानों कुश्ती संघ के अध्यक्ष व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहलवान प्रदर्शन कर रहे हैं और गंभीर आरोप भी लगा रहे हैं हालांकि आरोपों को लेकर अभी तक मीडिया कोई सुबूत नहीं रखा गया जबकि दावे किए गए जा रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। इतना ही नहीं इनके समर्थन में कई राजनीतिक पार्टियां भी बयानबाजी कर रही हैं।

बताया जा रहा है कि भाजपा कुश्ती संघ के अध्यक्ष के विरोध में अब वेस्ट यूपी, हरियाणा और पंजाब की कुछ खाप पंचायतें भी आ गई हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह लड़ाई किस बात लेकर है, कुछ पहलवानों ने गंभीर आरोप बृजभूषण शरण सिंह पर लगाए हैं हालांकि इससे पहले कभी ऐसे आरोप सामने नहीं आए।

यहा एक और गंभीर सवाल उठ रहा है कि इस विरोध के बाद भी बृजभूषण शरण सिंह पर सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? बृजभूषण शरण सिंह की छवि कैसी है, सियायत में कितना असर है? आइए जानते हैं…

मनमुताबिक कार्रवाई की मांग पर अड़े पहलवान

प्रदर्शनकारी पहलवानों ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर मनमाने तरीके से संघ चलाने और महिला पहलवानों का यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों के बाद बृजभूषण को कुश्ती संघ के कामकाज से जरूर दूर कर दिया गया है, लेकिन प्रदर्शनकारी पहलवानों के मुताबिक कार्रवाई नहीं हुई है।

साल 2023 जनवरी में पहलवानों ने पहली बार कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन किया था। पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर में धरने पर बैठे थे। पहलवानों कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर मनमाने तरीके से संघ चलाने और कई महिला पहलवानों के यौन शोषण करने का आरोप लगाया था।

इसके बाद बृजभूषण शरण सिंह को कुश्ती संघ के कामकाज को दूर कर दिया गया और उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए समिति बना दी गई। इस समिति ने पांच अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया।

जांच समिति की सदस्य रहीं बबीता फोगाट ने समिति की रिपोर्ट से असहमति जताई है और एक सदस्य पर बदसलूकी के आरोप भी लगाए हैं। इसके बाद पहलवानों ने रविवार (23 अप्रैल) को फिर से दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ओलंपिक संघ की अध्यक्ष ने क्या कहा?

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने आईओए की कार्यकारी समिति की बैठक के बाद कहा, ‘पहलवानों का सड़क पर प्रदर्शन करना अनुशासनहीनता है। इससे भारत की छवि खराब हो रही है।’ पीटी उषा की बात सुनते ही साक्षी और विनेश रो पड़ीं।

साक्षी ने कहा- ये सुनकर बहुत दुख हुआ क्योंकि एक महिला खिलाड़ी होकर भी वह महिला खिलाड़ियों की नहीं सुन रही हैं। हम बचपन से उनको फॉलो करते आए हैं। हमने कहां अनुशासनहीनता कर दी? हम तो शांति से यहां बैठे हैं। अगर हमारी सुनवाई हो जाती तो हम यहां बैठते भी नहीं। तीन महीने इंतजार करने के बाद हम यहां बैठे हैं।

कहीं यह राजनीतिक खेल तो नहीं क्योंकि…

बृजभूषण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले ज्यादातर खिलाड़ी हरियाणा से ही हैं। अगले साल देशभर में लोकसभा चुनाव होना है। इसके ठीक बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी है। अब हरियाणा की खाप पंचायतों ने भी इन पहलवानों का समर्थन कर दिया है। किसान संगठन भी इनके समर्थन में उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी ज्यादातर खिलाड़ी जाट समुदाय से आते हैं। यही कारण है कि अब भाजपा के खिलाफ ये राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अशोक कुमार कहते हैं कि ‘बृजभूषण सिंह बाहुबली नेता हैं। बृजभूषण खुद छह बार के सांसद रह चुके हैं। उनकी पत्नी भी सांसद रह चुकी हैं। उनके बेटे प्रतीक भी दो बार से विधायक हैं। इनपर कभी ऐसे आरोप राजनीतिक जीवन में लगे ही नहीं। यहां लड़ाई कुछ और है इनके पीछे कुछ और भाजपा विरोध के लिए काम कर रहे हैं। क्योंकि अगर जरा भी इनके आरोपों में सच्चाई होती तो पूरे देश के खिलाड़ी इनके साथ होते।

डॉ. अशोक कुमार ने कहा, ‘बृजभूषण के समर्थन में भी बड़ी संख्या में खिलाड़ी और खेल संघ के पदाधिकारी हैं। ऐसे में उनको भी मैनेज करना जरूरी है। इन खेल संघों का कहना है कि अगर इस तरह से अध्यक्ष पर कार्रवाई होने लगी तो आने वाले दिनों में अपने हित के लिए कोई भी खिलाड़ी किसी भी पदाधिकारी पर आरोप लगाने लगेगा। इसका काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।’

आइए जानते हैं बृजभूषण शरण की प्रोफाइल

गोंडा के रहने वाले बृज भूषण सिंह कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी सांसद हैं। छात्र जीवन से ही राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहे बृज भूषण शरण सिंह का युवा जीवन अयोध्या के अखाड़ों में गुजरा। पहलवान के तौर पर वे खुद को ‘शक्तिशाली’ कहते हैं। कॉलेज के दौर में ही वे छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए।

1991 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने जाने वाले बृज भूषण सिंह, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 में भी लोकसभा पहुंचे। बृज भूषण सिंह 2011 से ही कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भी हैं। 2019 में वे कुश्ती महासंघ के तीसरी बार अध्यक्ष चुने
गए थे।

1988 में वह भाजपा से जुड़े और फिर पहली बार 1991 में रिकॉर्ड मतों से सांसद बने। हालांकि मतभेद के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और 2009 के लोकसभा चुनाव में वे सपा के टिकट पर कैसरगंज से जीते। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए। 2014 और 2019 में फिर से भाजपा के टिकट पर जीते।

बृजभूषण शरण सिंह का प्रभुत्व गोंडा के साथ-साथ बलरामपुर, अयोध्या और आसपास के जिलों में भी है। बृजभूषण 1999 के बाद से अब तक एक भी चुनाव नहीं हारे हैं। बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण भी राजनीति में हैं। प्रतीक गोंडा से बीजेपी विधायक हैं।

बृजभूषण शरण सिंह की छवि एक हिंदुवादी नेता के तौर पर रही है। अयोध्या के बाबरी विध्वंस मामले में भी बृजभूषण अभियुक्त भी रहे। हालांकि, सितंबर 2020 में कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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