- अपात्रों के कार्ड बनाए जाने और राशन वितरण के लग रहे हैं आरोप
- 63 राशन डीलरों के खिलाफ दर्ज करायी गयी एफआईआर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अपात्रों के राशन कार्ड बनाने तथा उन्हें खाद्यान्न वितरण के मामले में शासन के निर्देश पर आपूर्ति अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के मामले में हीलाहवाली को लेकर बुधवार 6 जनवरी को हाईकोर्ट में रिट दायर की गयी है। इस मामले में 63 डीलरों पर आपूर्ति अफसर पहले ही एफआईआर करा चुके हैं।
ये है पूरा मामला
साल 2018 में पूर्व विधायक डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की शिकायत पर सीएम ने एसआईटी का गठन कर जांच को मेरठ भेजा था। दरअसल आरोप था कि मेरठ में बड़ी संख्या में अपात्र के राशन कार्ड बनाए गए हैं। शासन की एसआईटी मेरठ में तीन दिन तक डेरा डाले रही। आपूर्ति विभाग के तत्कालीन अफसर एक पांव पर एसआईटी के सामने खडे रहे।
56 हजार कार्ड निरस्त: एसआईटी के अफसरों ने तब तमाम जगह छापे मारने के बाद करीब 56 हजार राशन कार्ड ऐसे पकडेÞ थे जो अपात्र के बनाए गए थे। इतना ही नहीं इन कार्ड को निरस्त भी किया गया। डीएसओ नीरज सिंह ने 56 हजार राशन कार्ड निरस्त किए जाने की पुष्टि की है। शासन के निर्देश पर यह कार्रवाई की गयी।
अफसरों को नहीं क्लीनचिट: एसआईटी की ओर से शासन को सौंपी गयी रिपोर्ट में जहां डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की वहीं दूसरी ओर तत्कालीन अफसरों को भी क्लीनचिट नहीं दी है। रिट दायर कराने वाले सरधना के डीलर मैराजुद्दीन ने बताया कि तत्कालीन डीएसओ विकास गौतम, एआरओ नरेन्द्र कुमार व सप्लाई इंस्पेक्टर रविन्द्र, अजय कुमार, आशाराम व एक अन्य को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ भी एसआईटी ने एफआईआर की संस्तुति की है। लेकिन सिर्फ 63 डीलरों के खिलाफ ही एफआईआर करायी गयी है। किसी आपूर्ति अफसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करायी गयी है।
कार्ड निरस्त फिर भी राशन वितरण: सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि जो कार्ड एसआईटी ने निरस्त कर दिए थे उन पर भी राशन वितरण किया गया। हालांकि डीलरों का कहना है कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है कि निरस्त किए गए कार्ड की सूचना या जानकारी आपूर्ति अफसरों ने राशन डीलरों को नहीं दी।
बचाव का तलाश रहे रास्ता
एसआईटी की रिपोर्ट की सिफारिश पर शासन ने तत्कालीन आपूर्ति अफसरों के खिलाफ एफआईआर के आदेश तो कर दिए, लेकिन बाद में यूटर्न लेते हुए जांच में फंसे आपूर्ति अफसरों को बचाने का भी खेल शुरू हो गया। इतना ही नहीं पिछले दिनों मेरठ के दो बडेÞ आपूर्ति अफसर कई दिन तक लखनऊ में भी डेरा डाले रहे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं कि राहत के प्रयासों को कहां तक कामयाबी मिली है। लेकिन बुधवार को इस मामले में हाईकोर्ट में रिट दायर किए जाने के बाद जांच में फंसे अफसरों की मुश्किल और बढ़ सकती है।

