Sunday, March 8, 2026
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कारगिल युद्ध में 13620 प्वाइंटों पर किया था कब्जा

  • वीर जवानों के बलिदान को किया नमन
  • शौर्य और बलिदान की गाथा से भरा है 17वीं पंजाब रेजिमेंट का इतिहास

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मवाना रोड स्थित भगत लाइन में 60 साल बाद फिर से उसी जगह पर 17 पंजाब बटालियन ने डायमंड जुबली मनाई। तीन दिवसीय समारोह में रेजिमेंट के पूर्व अफसरों व अधिकारियों ने हिस्सा लिया। भारत-चीन युद्ध के दौरान ही मेरठ छावनी में खड़ी हुई भारतीय सेना के पंजाब रेजिमेंट की 17वीं बटालियन ने मेरठ में ही 60वां स्थापना दिवस मनाया। वीरता और पराक्रम से भरे गौरवपूर्ण सफर को तय करने वाली 17 पंजाब का गठन गत 15 नवंबर 1962 को मेरठ की भगत लाइन में ही हुआ था।

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गत 18 मार्च 1969 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. जाकिर हुसैन ने रेजीमेंट को कलर प्रदान किया था। इस अवसर पर बटालियन ने अपने वीर जवानों के बलिदान को नमन किया और पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को याद किया।
जिन्होंने देश सेवा की खातिर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। बलिदान की बुनियाद पर स्वर्णिम इतिहास को समेटे 17 पंजाब रेजीमेंट ने डायमंड जुबली के मौके पर वेटनर्स, एक्स सर्विस मैन और वीर नारियों को सम्मानित किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

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बटालियन के जवानों ने जोश, जुनून और जज्बे के साथ हिन्दुस्तान के साथ हुई सभी लड़ाइयों में हिस्सा लिया और अपनी वीरता से साहस और हिम्मत की एक नई परिभाषा लिखी। बटालियन ने 1965, 1971 और कारगिल युद्ध में अपना पराक्रम दिखाया। कारगिल युद्ध में 17 पंजाब रेजीमेंट ने कारगिल के प्वाइंट पर 13620 कब्जा किया था। 1971 के युद्ध में बोकारो स्टील प्लांट यानि की आपरेशन कैक्टस लिली में अदम्य साहस का परिचय दिया था।

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इसके अलावा बटालियन ने आॅपरेशन पराक्रम, आॅपरेशन रहिनो और आॅपरेशन रक्षक में भी सफलतापूर्वक हिस्सा लिया। जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्व क्षेत्र में तैनाती के दौरान असंख्य आंतकवादियों को मौत के घाट उतारा। युद्ध के मैदान से लेकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में सदैव तत्तपर 17 पंजाब रेजीमेंट ने दुश्मनों को नेस्तानाबूद करके 60 साल का शानदार इतिहास लिखा है। इसके लिए बटाालियन को कई बार वीरता पुरस्कार और साईटेशन से नवाजा गया।

रब राखा के मूलमंत्र के साथ दुश्मनों पर कहर बनकर टूटने वाली 17 पंजाब रेजीमेंट को दो कीर्ति चक्र, सात शौर्य चक्र और नौ सेना मेडल मील हैं। साइमंड जुबली समारोह में आपरेशन बोकारो स्टील प्लांट की अगुवाई करने वाले कर्नल केएस एस पनवर को सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्त मेजर जनरल त्रिपत सिंह मुख्य अतिथि रहे।

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शौर्य और बलिदान की गाथा से भरा है। 17 पंजाब रेजिमेंट का इतिहास, कमान अधिकारी कर्नल निखिल शर्मा ने बलिदानी सूबेदार त्रिलोक सिंह की धर्मपत्नी मनजीत कौर, बलिदानी नायब सूबेदार कुंदन सिंह की धर्मपत्नी मंजीत कौर, बलिदानी सिपाही बलजीत सिंह की धर्मपत्नी मुनीश कुमारी को स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित। कर्नल केएसएस पनवर ने रेजिमेंट को द गैलेंट वन्स ट्रॉफी प्रदान की।

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