Thursday, May 7, 2026
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Shani Jyanti 2026: घर में क्यों नहीं करनी चाहिए शनि देव की पूजा? जानें मान्यता, तिथि और पूजा विधि

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा केवल श्रद्धा से ही नहीं, बल्कि नियम और विधि-विधान के अनुसार करने की परंपरा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही तरीके से की गई पूजा शुभ फल देती है, जबकि नियमों की अनदेखी करने पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।

इसी तरह शनि देव की पूजा को लेकर भी कई विशेष नियम बताए गए हैं। शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है, इसलिए उनकी आराधना में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि शनि देव की पूजा घर के अंदर करने से बचना चाहिए। शनि जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता, पूजा के नियम और शुभ मुहूर्त।

घर में शनि देव की पूजा क्यों मानी जाती है वर्जित?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव की पत्नी ने उन्हें श्राप दिया था कि उनकी दृष्टि जिस पर पड़ेगी, उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से शनि देव की दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली और कठोर माना गया है।

धार्मिक मान्यता है कि पूजा के दौरान भक्त प्रतिमा की ओर देखकर आराधना करते हैं, जिससे शनि देव की “वक्र दृष्टि” का प्रभाव घर पर पड़ सकता है। यही कारण है कि कई लोग घर में शनि देव की प्रतिमा स्थापित करने से बचते हैं।

मान्यता यह भी है कि घर में शनि देव की मूर्ति रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है, जिससे परिवार में अशांति, रुकावटें और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए शनि देव की पूजा मंदिर में करना अधिक शुभ माना जाता है।

शनि जयंती 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है।

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई 2026, शनिवार सुबह 4:12 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई 2026, रविवार रात 1:31 बजे

उदय तिथि के अनुसार शनि जयंती का पर्व 16 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन ही पड़ रही है, जिसे बेहद शुभ संयोग माना जा रहा है।

शनि जयंती पूजा विधि

शनि जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

पूजा करने का तरीका

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान को स्वच्छ कर चौकी पर काला कपड़ा बिछाएं।
  • उस पर शनि देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पंचा मृत या पंचगव्य से स्नान कराएं।
  • कुमकुम और काजल अर्पित करें।
  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • धूप-दीप से पूजा करें।
  • फूल और तेल से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
  • शनि मंत्रों का जाप करें।
  • शनि चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में आरती कर पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

शनि पूजा में किन बातों का रखें ध्यान?

  • शनि देव की पूजा करते समय सीधे आंखों में देखने से बचने की सलाह दी जाती है।
  • शनिवार के दिन गरीबों और जरूरत मंदों को दान करना शुभ माना जाता है।
  • काले तिल, उड़द और सरसों का तेल दान करने से शनि दोष कम होने की मान्यता है।
  • पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी लाभकारी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शनि पूजा व्यक्ति के जीवन से कष्टों को कम कर सकती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

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