Tuesday, January 25, 2022
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एलिवेटिड रोड को ध्वस्त होंगे थापरनगर के 75 मकान

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  • दिल्ली रोड से बच्चा पार्क तक एलिवेटिड रोड के लिए शुरू किया गया डिमार्केशन का काम
  • नगर निगम और तहसील समेत कई विभाग के अधिकारी पहुंचे, लोगों में मचा है हड़कंप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल्ली रोड से बच्चापार्क तक प्रस्तावित एलिवेटिड रोड के लिए थापर नगर के करीब 75 मकानों के एक बडेÞ हिस्से को जमीदोंज किया जाएगा। शुक्रवार को नगर निगम व तहसील समेत कई विभाग के अधिकारियों की टीम ने संयुक्त कार्रवाई कर ऐसे 75 मकान चिन्हित किए हैं जो थापर नगर नाला पटरी पर सरकारी जगह पर कब्जा कर अवैध रूप से बना गए हैं।

इनमें से कई मकान तो ऐसे हैं जो पूरे के पूरे सरकारी जगह पर बना लिए गए हैं। निगम की टीम की रेड मार्किंग की कार्रवाई से यहां रहने वालों में जबरदस्त दहशत व्याप्त है। सहायक नगरायुक्त इंद्र विजय ने बताया कि नगर निगम तथा तहसील टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर दिल्ली रोड स्थित सदर तहसील से थापर नगर पुलिस चौकी तक लगाए लाल निशान।

यहां बता दें कि नाले समेत कुल 13 मीटर चौड़ी सड़क है जिसे 75 अलग-अलग व्यक्तियों ने अवैध कब्जा किया हुआ है । इसी सड़क की पैमाइश तथा चित्रांकन के लिए नगर निगम से लेखपाल राजकुमार, लेखपाल कुंवर पाल तथा सदर तहसील से लेखपाल नरेंद्र वर्मा ने प्रवर्तन दल की टीम के साथ मिलकर नाले तथा नाला पटरी की पैमाइश की। जो मकान सरकारी जगह पर बने हुए हैं उनको ध्वस्त किए जाने के लिए रेड मार्किंग की गयी है।

दरअसल, दिल्ली रोड स्थित सदर तहसील से बच्चा पार्क तक एलिवेटेड रोड बनना प्रस्तावित है। इसी क्रम में जिलाधिकारी के. बालाजी ने टीम गठित कर उप परियोजना प्रबंधक, उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, अधिशासी अभियंता, नगर निगम तथा तहसीलदार सदर मेरठ आदि को अवैध अतिक्रमण हटवाने के आदेश दिए हैं।

नगर निगम प्रवर्तन दल की टीम में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट प्रवीण कुमार, हवलदार रुपेश तोमर, धीरज कुमार, यशपाल सिंह तथा मुनेंद्र कुमार आदि शामिल रहे। दिल्ली रोड से बच्चापार्क तक एलिवेटिड रोड के प्रोजेक्ट का काम शुक्रवार को शुरू कर दिया गया। यह बात अलग है कि अपने मकान टूटने से यहां रहने वाले तमाम लोग बुरी तरह डरे हुए हैं।

दरअसल, इनमें से कई मकानों के बडे हिस्से मसलन मकान का पूरा ड्राइग रूम ही कब्जाई गयी जमीन पर बनाया गया है। सबसे बड़ी मुसीबत तो यह है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में मकानों का जब अवैध हिस्सा तोड़ा जाएगा तो बाकि मकान इस लायक नहीं रह जाएगा कि वहां परिवार रह सके। यह भी माना जा रहा है कि निगम की तोड़फोड़ से बचने को यहां रहने वाले खुद ही अपने मकानों के अवैध बताए जा रहे हिस्से को गिराना शुरू कर दें।

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