- चेतन हत्याकांड में चार हत्यारों को आजीवन कारावास
- मृतक के भाई मितन ने लड़ी कानूनी लड़ाई
- एसएसपी मंजिल सैनी ने दी थी सुरक्षा
- कई बार मिली जान से मारने की धमकियां
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/रोहटा: छह साल पहले सरूरपुर थाना क्षेत्र के हसनपुर रजापुर गांव में हुए चेतन हत्याकांड के चार आरोपियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा के अलावा 50-50हजार का जुर्माना भी लगाया है। मृतक चेतन के भाई मितन ने इस पूरे मामले में तमाम धमकियों के बाद भी कानूनी लड़ाई लड़ी और भाई के हत्यारों को सजा दिलवाकर चैन की सांस ली। तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने मितन को न केवल सुरक्षा दी थी, बल्कि पिस्टल भी मुहैया कराई थी।
न्यायालय अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट मेरठ मोहम्मद गुलाम उल मदार ने गांव हसनपुर रजापुर में युवक की हत्या के आरोप में संजय, अशोक पुत्रगण जगपाल, सुमित पुत्र जगबीर व प्रकाश पुत्र चेतराम समस्त निवासी गांव हसनपुर रजापुर थाना सरूरपुर जिला मेरठ को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
विशेष लोक अभियोजक निशांत गर्ग ने बताया कि वादी मुकदमा मितन कुमार ने थाना सरूरपुर में 13 जुलाई 2016 को रिपोर्ट लिखाई की करीब डेढ़ माह पूर्व उसके गांव के सुजीत, सुमित पुत्रगण जगबीर से झगड़ा हो गया था। इसी बात को लेकर यह दोनों भाई उसके बड़े भाई चेतन उर्फ भूरा से रंजिश रखने लगे थे। 13 जुलाई 2016 को वह तथा उसका बड़ा भाई चेतन, मां सावित्री देवी वे लोग जंगल से घास लेकर सड़क के रास्ते से घर आ रहे थे।
जब वे तीनों वेदपाल के ईख के खेत के बराबर में पहुंचे तो पीछे से सड़क की तरफ से एक बाइक पर गांव के ही सुजीत, सुमित पुत्र जगबीर तथा संजय पुत्र जगपाल आए और पहले से चकरोड किनारे ईख की आड़ में छिपे खड़े हुए अशोक पुत्र जगपाल, प्रकाश पुत्र चेतराम भी सड़क पर निकल आए और कहने लगे कि आज इस चमटटे के भूरे को देख लो और आगे चल रहे उसके बड़े भाई चेतन उर्फ भूरे को घेरकर पांचों लोगों ने गोलियां चलाई, उसने तथा उसकी मां ने बचाने का प्रयास किया तो उन्होंने उनके ऊपर भी हथियार तान दिए और कहने लगे कि चुपचाप खड़े रहो नहीं तो तुम्हें भून देंगे, उसका भाई गोलियां लगने से रास्ते पर गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई तो यह पांचों लोग हाथों में हथियार लहराते हुए यह कहते हुए कि हम से पंगा लेने का यही अंजाम होता है और चले गए।
वे डर की वजह से उनका पीछा नहीं कर सके और उनके जाने के बाद उनके शोर मचाने व गोलियों की आवाज सुनकर भी गांव का कोई व्यक्ति इनके भय व आतंक से पास नहीं आया। इन लोगों का गांव में इतना आतंक व भय व्याप्त है कि इनके डर के कारण गांव के लोग इनकी शिकायत करने या इनके खिलाफ गवाही देने से भी डरते हैं। इस घटना के बाद गांव में सन्नाटा फैल गया और लोग डर और भय के कारण कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था और दहशत में अपने दरवाजे बंद कर लिए। पुलिस ने विवेचना कर आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
न्यायालय में सभी आरोपियों की ओर से कहा गया कि उन्हें इस मुकदमे में झूठा फंसाया जा रहा है। जिसका सरकारी अधिवक्ता ने कड़ा विरोध किया। न्यायालय में वादी अधिवक्ता हरेंद्र सिंह व विशेष लोक अभियोजक निशांत गर्ग ने आठ गवाह पेश किए। न्यायालय ने गवाहों व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को युवक की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। वहीं, अभियुक्त सुजीत की दौरान विचारण मृत्यु होने के कारण उसके विरुद्ध वाद की कार्रवाई उपसमित की गई।

