- कोरोना संक्रमण को लेकर जेल में मुलाकात पर कड़ी पाबंदी
- सिर्फ सप्ताह में एक बार फोन पर कर रहे बात
- अस्थाई जेल में 100 से अधिक संक्रमित निकल चुके
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अपराध के बाद जेल की जिंदगी। यह सामाजिक और कानूनी व्यवस्था और इसको सामाजिक मान्यता भी है। कोरोना ने इस पूरी व्यवस्था को ही बदल कर रख दिया है। मार्च में होली के बाद से जेल में बंद 2600 बंदियों के अपने परिजनों से मिलने पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है।
घर वालों की याद उनको सताती है, लेकिन मजबूरी उनके और परिवार के बीच आड़े आ रही है। इस मायूसी को दूर करने के लिये बंदियों को जेल में पीसीओ की सुविधा दी गई है। सप्ताह में एक बार पांच मिनट के लिये बात करने की इजाजत उनके जिंदगी में नई ऊर्जा भर रही है।
मार्च में कोरोना का आतंक शुरू होने के बाद से शासन ने प्रदेश भर की जेलों में बंदियों और उनके परिजनों के बीच होने वाली मुलाकात पर रोक लगा दी थी। एक दो नहीं पूरे सात महीनों से यह पाबंदी बदस्तूर चल रही है। अप्रैल महीने में सर छोटू राम इंजीनियरिंग कालेज को अस्थायी जेल बना दिया गया था।
ढाई सौ से अधिक बंदी वहां बंद है। कोरोना ने इस जेल पर कई बार हमला बोला और थोक के भाव लोगों को संक्रमित कर दिया। आंकड़ों पर नजर डालें तो अस्थाई जेल में अब तक सौ से अधिक बंदी संक्रमित हो चुके है। इसको देखते हुए मुलाकात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बीडी पांडेय ने बताया कि बंदियों की मुलाकात पर पाबंदी लगी हुई है। जेल में मौजूद दो पीसीओ इनका सहारा बने हुए है। इन पीसीओ से बंदी अपने परिजन से सप्ताह में एक बार पांच मिनट के लिये बात कर सकता है। दोनों के बीच बात पूरी तरह से रिकार्ड होती है। बंदी को अपने घर का एक नंबर देना पड़ता है और उस नंबर का पुलिस से वेरीफिकेशन कराया जाता है। बंदी को पांच मिनट के लिये तीन रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

