Thursday, May 7, 2026
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भ्रष्टाचार की मुहिम, 200 से ज्यादा दंडित

  • पहली बार एक साथ 75 पुलिसकर्मी हुए लाइन हाजिर
  • रिश्वत की शिकायत मिलते ही कार्रवाई होने से दहशत
  • लाइन हाजिर हुए सिपाही 10 महीने में भी बहाल नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने जब 15 जून को कार्यभार ग्रहण किया था तब उन्होंने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने को प्राथमिकता बताई थी। उस वक्त किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एसएसपी की पहली प्राथमिकता ही पूरे पुलिस फोर्स में दहशत पैदा कर देगी।

एसएसपी के 10 महीने से अधिक के कार्यकाल में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। पहली बार एक साथ भ्रष्टाचार में डूबे 75 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था जिनको अब तक बहाल नहीं किया गया है। हालात यह हो गए हैं कि रिश्वतखोरी की शिकायत हो या फिर जानबूझकर की गई लापरवाही जांच रिपोर्ट मिलते ही निलंबन या लाइन हाजिर होना तय हो गया है।

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एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने जुलाई महीने में जब अपना काम तेजी से शुरू किया तो सबसे पहले मेरठ के 30 थानों में जमे उन भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की सूची बनवाई जो अपने थानेदारों के लिये उगाही का काम कर रहे थे। एक साथ 75 पुलिसकर्मियों के लाइन हाजिर होने का संदेश जो पहले एक्शन में गया उसने मास्टर स्ट्रोक का काम किया।

लाइन हाजिर होने की सूची में दो दरोगा, चार थाने की जीप चलाने वाले चालक, 37 कांस्टेबल और 32 हेड कांस्टेबल शामिल थे। यही नहीं इन पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेजकर मौज करने को नहीं कहा गया, बल्कि इनके लिये गाइड लाइन तक जारी की गई कि लाइन हाजिर किये पुलिसकर्मियों की सुबह-शाम पुलिस लाइन में गणना होगा।

अवकाश, मेडिकल से जुड़ा विवरण रखा जाएगा और प्रशिक्षण की अवधि में जोड़ा नहीं जाएगा। प्रशिक्षण की अवधि में क्या क्या कार्य किये, इसका प्रदर्शन विवरण तैयार करेंगे। इसके बाद एसएसपी ने 15 दारोगाओं और 40 पुलिसकर्मियों को दूसरे जिलों का रास्ता दिखा दिया।

इन पुलिसकर्मियों में अधिकांश वो लोग थे जो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के रहमोकरम और सेटिंग से थानों में जमे हुए थे। इन पुलिसकर्मियों के तबादले गोरखपुर, नोएडा, आगरा जोन, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, हाथरस, डायल 112, लखनऊ और एटा किए गए हैं।

एसएसपी ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिये वाट्सऐप का नंबर लोगों में बांट दिया। इसमें आने वाली शिकायतों और वीडियो को एएसपी को देकर जांच करवाई जाती है और उनकी संस्तुति के आधार पर कार्रवाई होती है। सदर थाने के इंस्पेक्टर बी एस राणा को आरोपी को पकड़ कर छोड़ने और रिश्वत का आरोप लगने के बाद न केवल निलंबित कर दिया गया था बल्कि मुकदमा दर्ज करा दिया गया था।

राणा कई महीने फरारी काटते रहे थे। उनके साथ एक सिपाही 30 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया था। तीन दिन पहले एसएसपी ने खरखौदा थाने की बिजली बंबा पुलिस चौकी पर तैनात आरक्षी शिव बहादुर, अमित नागर व नवीन कुमार को भ्रष्ट आचरण व पुलिस छवि धूमिल करने का आरोपी पाए जाने के बाद निलंबित कर दिया है। जुलाई महीने में एसएसपी ने 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन लिया था।

किठौर थाने के दो दारोगा भी निलंबित किये गए थे। अभी हाल ही में एसएसपी ने एएसपी ब्रह्मपुरी के हमराह रहे सिपाही ओमवीर को उगाही के मामले में और मंडी चौकी प्रभारी प्रतीक यादव को अवैध शराब के आरोप में सस्पेंड किया है। भले ही एसएसपी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ रखा हो, लेकिन थानों और चौकी में पूरी तरह से प्रभावी नहीं हुआ है।

यह बात तो साफतौर पर दिख रही है कि जिस तरह भले ही पुलिसकर्मी पहले की तरह खुलेआम दबाव देकर पैसे न मांग रहे हो, लेकिन पुलिस में एक वर्ग ऐसा भी है जो एसएसपी के खौफ से बेखबर कमाई कर रहा है और इसके लिये कमाऊ पूत लगे हुए हैं। खुद एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि भ्रष्टाचार को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिसकर्मियों को पूर्ण निष्ठा के साथ मानवीयता दिखाते हुए अपराध नियंत्रण का काम करना होगा।

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