- तीन साल से विवाद के कारण नहीं हो पा रहा था मोबाइल कम्पेक्टर का प्रयोग
- पिछले दिनों एडीएम ने निरीक्षण कर ईओ को दिये थे कम्पेक्टर चलवाने के निर्देश
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: नगरपालिका परिषद् की चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के द्वारा शहर को कूड़ा और गन्दगी से मुक्त बनाने के लिए अपनाई गयी आधुनिक तकनीक में भले ही शुरूआती चरण में ही जंग लग गया हो, लेकिन उनके द्वारा कार्यकाल के अंतिम वर्ष में शहर को आधुनिक कूड़ा निस्तारण व्यवस्था को शुरू कराये जाने में तमाम अड़चनों के बाद भी लगातार काम किया गया। आज चेयरपर्सन की पहल पर ही जिला अस्पताल के बाहर कूड़ा डलाव घर खत्म कराने के उद्देश्य से स्थापित कराये गये मोबाइल कम्पेक्टरों को शुरू कराया गया।
तीन साल से इन मोबाइल कम्पेक्टरों को लेकर कंपनी के साथ पालिका प्रशासन का विवाद चला आ रहा था, कंपनी के भुगतान पर भी चेयरपर्सन ने रोक लगा रखी है, अब कहीं जाकर मोबाइल कम्पेक्टरों का जनहित में प्रयोग शुरू हुआ है। आज पालिका के स्टेनो ने चेयरपर्सन के आदेश पर इन मोबाइल कम्पेक्टरों को शुरू कराते हुए अस्पताल के बाहर बने खुले डलावघर की व्यवस्था को बंद कराया है।
नगरपालिका परिषद् के द्वारा शहर में कुछ प्रमुख स्थानों पर चल रहे कूड़ा डलाव घरों को बन्द करते हुए वहां पर आधुनिक तकनीक आधारित डलाव घर बनाकर कम्पेक्टर लगाने की योजना पर काम शुरू किया गया था। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शहर में जिला अस्पताल के डलाव घर का चयन किया गया और यहां पर दो मोबाइल कम्पेक्टर स्थापित कराने के लिए टैण्डर निकाले गये। यहां पर करीब 35 लाख रुपये की लागत से पंजाब के लुधियाना की कंपनी मैसर्स प्यारा सिंह एण्ड कंपनी ने टैण्डर लिया।
कंपनी द्वारा दो मोबाइल कम्पेक्टर आपूर्ति करने के बाद इनकी स्थापना कराई गयी, इन मोबाइल कम्पेक्टरों को जब पालिका प्रशासन के द्वारा चालू किया गया तो इनकी उपयोगिता मानक के अनुरूप नहीं पाये जाने पर इनको बंद कर इस आधुनिक डलावघर को ताला लगाकर बंद करा दिया गया था।
इसी बीच कंपनी ने कम्पेक्टर आपूर्ति करने के बाद पालिका प्रशासन से अपना भुगतान मांगा, पत्रावली चेयरपर्सन के पास पहुंची तो उन्होंने घटिया मशीन उपलब्ध कराने पर नाराजगी जताते हुए कंपनी के खिलाफ ही कार्यवाही करने के निर्देश दिये और भुगतान पर रोक लगा दी थी। तभी से इसको लेकर विवाद बना रहा। इसी बीच भाजपा सभासदों ने मोबाइल कम्पेक्टर लगवाने में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रशासन और शासन को चेयरपर्सन के खिलाफ शिकायत कर दी।
इस मामले में जिला प्रशासन ने जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसमें चेयरपर्सन को दोषी करार दिया गया और कार्यवाही की संस्तुति की गयी। शासन के द्वारा हाल ही में चेयरपर्सन को इसके लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। इससे साफ है कि शासन ने भी उनको दोषी माना, लेकिन जिस कार्य के लिए भ्रष्टाचार और अनियमितता साबित होने पर प्रशासन और शासन ने चेयरपर्सन को दोषी माना, उसी कार्य को प्रशासनिक स्तर पर शुरू कराने की कवायद की गयी। पिछले दिनों एडीएम प्रशासन नरेन्द्र बहादुर ने डीएम के निर्देश पर मोबाइल कम्पेक्टर का निरीक्षण किया और ईओ हेमराज सिंह को इसको शुरू करवाने के निर्देश दिये।
रविवार को चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के निर्देशन में उनके स्टेनो गोपाल त्यागी पूरी टीम के साथ अस्पताल पर पहुंचे और वहां पर अपने सामने ही खुले में चल रहा कूड़ा डलावघर बंद कराने के साथ ही दोनों मोबाइल कम्पेक्टर को चालू कराया। गाड़ियों से कूड़ा कम्पेक्टर में डाला गया और यहां पर कूड़े को कम्प्रेस्ड कर प्लांट पर भिजवाया गया। करीब तीन साल के बाद यह कम्पेक्टर जनहित में प्रयोग में आये हैं।
इनके चालू होने के बाद माना जा रहा है कि कंपनी को भी पालिका प्रशासन से भुगतान का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने 15वें वित्त आयोग की धनराशि से शहर में इसी प्रकार के आधुनिक कूड़ा घरों का निर्माण कराने की योजना बनाई है। ताकि शहर के प्रमुख स्थानों पर कूड़ा डलाव घरों की समस्या से निजात मिले और शहर को कूड़ा मुक्त बनाने में यह परियोजना कारगर साबित हो सके।

