- चंद सिक्कों के लिए विरासत को खत्म करने के गुनाह में क्या कैंट बोर्ड भी है शामिल
- बंगले के हिस्से में ग्रांट कैसल व्यू के नाम से किए जा रहे अवैध निर्माण पर कार्रवाई कब
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट बोर्ड की मिलीभगत से भूमाफियाओं ने आजादी की लड़ाई की गवाह और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की शरणस्थली रहे वेस्ट एंड रोड स्थित कैसल व्यू के पुरातात्विक विरासत को मिटाने की साजिश शुरू कर दी है। अगर इस पर रोक नहीं लगाई गई तो मेरठ एक स्वर्णिम इतिहास के गवाह बने कैसल व्यू को खो देगा। बंगले के हिस्से में ग्रांट कैसल व्यू के नाम से किए जा रहे अवैध निर्माण पर कार्रवाई कब। ये यक्ष प्रश्न सभी के दिमाग में गूंज रहा है।
वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला 210 में मौजूद हमारी समृद्ध वितरासत को चंद सिक्कों के लिए जमींदोज किया जा रहा है। बजाए इस बंगले के स्वरूप को बनाए रखने के लिए वहां विवाह मंडप के नाम पर अवैध निर्माण कर देशभक्तों की मौजूदगी की गवाह बनी तमाम निशानियों को जमीन में मिलाया जा रहा है।
हैरानी तो इस बात की है कि कैंट बोर्ड के अफसर और सदस्यों यहां तक कि पूरे देश को देशभक्ति का सर्टिफिकेट तक बांटने वाली भाजपा के बडेÞ नेता जिनका कैंट बोर्ड में कब्जा है वो भी चुप्पी साधे हुए हैं। खुद को आजादी की लड़ाई को सबसे बड़ा नंबरदार कहने वाले कांगे्रस के नेताओं को भी इतनी फुर्सत नहीं कि जाकर वहां एक बार झांक सकें कि किस प्रकार तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी के मौन गवाह बंगले के अलग अलग हिस्सों को खत्म कर दिया गया है।
कैसल व्यू का इतिहास
इसका निर्माण 1896/1897 में शुरू हुआ और भवन 1900 में पूरा हुआ। पहला ढांचा, भव्य द्वार, 1899 में बनकर तैयार हुआ। निर्माण के चार पांच साल की अवधि के बाद 1900 तक कैसल पूरा हो गया। इस संरचना का निर्माण नवाब मोहम्मद इशाक खान ने अपने पिता, फारसी और उर्दू कवि नवाब मुस्तफा खान अफता के सम्मान में किया था। नवाब एम इशाक खान ने 30 एकड़ जमीन पर खुद ही बिल्डिंग और प्रोजेक्ट तैयार किया था।
यह उन सहायकों की मदद से बनाया गया था जिनके पास ब्रिटिश सेना के लिए बैरक बनाने में काफी अनुभव था। मुस्तफा कैसल के निर्माण में नवाब ने वास्तुकला की कई शैलियों को शामिल किया था। देखने में ये ब्रिटिश बंगलों के लिए सुविधाएं प्रदान करता था और राजस्थान और अवध के भवनों के साथ प्रमुख विशेषताएं साझा करता था। मुस्तफा महल का भवन दिल्ली, हैदराबाद और लाहौर के शहरों में देखे जाने वाले अन्य लोगों के बीच देखने लायक था।
यह नवाब मोहम्मद इस्माइल खान था जिसने अपने घर, मुस्तफा कैसल को अपने शासनकाल के दौरान राजनीतिक कार्यवाही के लिए एक भवन में बदल दिया था। मुस्लिम लीग के अध्यक्ष होने के अलावा, कई अन्य भूमिकाओं के कारण इस ‘परिवर्तन’ का विस्तार हुआ जिसे उन्होंने राजनीति में बरकरार रखा।
महान स्वतंत्रता सेनानी रुके थे
महात्मा गांधी (खिलाफत आंदोलन के दौरान तीन दिन), जवाहर लाल नेहरू (खिलाफत आंदोलन के दौरान तीन दिन) मोहम्मद अली जिन्ना (पाकिस्तान आंदोलन के दौरान दो बार), सरोजिनी नायडू, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, मौलाना मोहम्मद अली, मौलाना हसरत मोहानी, विजया लक्ष्मी पंडित, हैदराबाद के बहादुर यार जंग, विट्ठलभाई पटेल, भूलाभाई देसाई, गोविंद वल्लभ पंत, नवाबजादा लियाकत अली खान, नवाब मुहम्मद अहमद खान आदि रुके थे।
अलग-अलग नाम से बिगाड़ा गया स्वरूप
मेरठ की शान समझी जाने वाली पुरानी इमारतों में शुमार कैंट का बंगला 210 का दामन बार-बार तार किया जाता है। अलग-अलग नामों से इसके सीने पर जख्म दिए जा रहे हैं। कभी महाराज वैकट के नाम से तो कभी कैसल व्यू के नाम से फिलहाल यहां ग्रांट कैसल व्यू के नाम से यहां भारी भरकम स्ट्रक्चर खड़ा किया गया है। इस बंगले में साफ साफ चेज आॅफ परपज व सब डिवीजन का मामला बनता है। दिन रात यहां काम चल रहा है। दर्जनों मजदूर काम यहां काम करते देखे जा सकते हैं।
खबर के बाद गेट पर ताले
जनवाणी द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित किए जाने के बाद यहां स्ट्रेक्टर खड़ा करने के काम में लगे लोगों ने इस बंगले के गेट पर ताला डाल दिया गया है। साथ ही वहां पहरा बैठा दिया गया है ताकि कोई अंदर न आने पाए। जिन पर अवैध निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी कैंट बोर्ड के वो अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अवैध निर्माण करने वाले उनके लिए चुनौती बने हुए हैं।

