
जब कभी आप हंसों को ‘वी’ आकार का झुंड बनाकर उड़ता देखते हैं, तो सोचते होंगे कि ये क्यों इसी आकार में उड़ते हैं? क्या कभी इनके इस तरह से उड़ने का रहस्य मालूम करने की कोशिश की है? वे इस तरह क्यों उड़ते हैं, इसके पीछे भी बहुत अच्छी भावना छिपी होती है। हंसों की इस तरह की उड़ान का रहस्य यह है कि जब कोई हंस अपने पंख फड़फड़ाता है, तो उसके ठीक पीछे उड़ते हंस को उड़ान भरने में आसानी हो जाती है। इस तरह जब पूरा झुंड ‘वी’ आकार में उड़ान भरता है, तो हंसों की एकल उड़ान की अपेक्षा झुंड की उड़ान की क्षमता 71 प्रतिशत बढ़ जाती है। अगर कोई हंस अपने उड़ते झुंड से बिछड़ने लगता है, तो अचानक उसे ऐसा खिंचाव और प्रतिरोध महसूस होता है कि वह अकेले न उड़ सके और इसीलिए वह आगे वाले हंस की उड़ान शक्ति का लाभ लेने अपने झुंड में फौरन लौट आता है।
अगुआ दस्ते को पीछे वाले हंस रफ्तार बढ़ाने के लिए बोल-बोलकर प्रेरित करते रहते हैं। अगर कोई हंस बीमार हो जाए, तो वह झुंड से बाहर गिरने लगता है। ऐसे में दो हंस कतार तोड़कर उसके साथ गिरने लगते हैं, ताकि बीमार या घायल हंस को सुरक्षा और मदद दी जा सके। ये दो साथी हंस उसके साथ तब तक रहते हैं, जब तक वह मर न जाए या फिर उड़ान भरने लायक न हो जाए। वे किसी और उड़ते झुंड में शामिल हो जाते हैं या अपने झुंड से जा मिलते हैं। प्रकृति ने इन हंसों को सहज बुद्धि दी है। हमें उनकी सहयोगी भावना, एकता और एकता के प्रभाव से जरूर सीख लेनी चाहिए। यदि इंसान भी इसी भावना से काम करे, तो मानव समाज की बहुत परेशानियों का हल हो सकता है।


