
सुनीता गाबा |
शरीर हमें समय समय पर कई संकेत देता है पर हम उन्हें नजरअंदाज कर जाते हैं और बड़ी समस्या या बीमारी हमें घेर लेती है। बीमारियों से स्वयं को बचा कर सकते हैं। मसूड़ों से खून का आना, नींद न आना, त्वचा का रूखा रहना, शरीर में झनझनाहट होना, हमारी पुअर डाइट को दर्शाता है कि हम पूरे मिनरल्स और विटामिन्स नहीं ले पा रहे हैं।
मसूड़ों से खून आना
विटामिन सी की कमी से शरीर के टिश्यू क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इससे ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आने लगता है। यह तो एक मुख्य कारण है। इसके अतिरिक्त धूम्रपान अधिक करना, शराब पीना, स्टेराइडस का लेना या एंटीडिप्रेसेंट दवाएं लेने से भी मसूड़ों से खून निकलने लगता है। विटामिन सी कोलेजन का निर्माण करने में मेदद करता है, त्वचा को मुलायम बनाता है ओर त्वचा के कसाव को बनाए रखने में मदद करता है। अपने आहार में संतरा, नींबू, आंवला, अमरूद का नियमित सेवन करें।
ठीक से नींद न आना
लंबे समय तक नींद ठीक न आना विटामिन डी की कमी को दर्शाता है। विटामिन डी की कमी से हड्डियों का भुरभुराना तो होता ही है, इसके अतिरिक्त डिप्रेशन का कारण भी बनता है। कई बार नींद की इतनी कमी हो जाती है कि अनिद्रा रोग होने की आशंका तक बढ़ जाती है। शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा से नींद का चक्र सामान्य बना रहता है। विटामिन डी के लिए प्रात: 8 से 10 बजे के बीच आधा घंटा धूप का सेवन करें। इसके अतिरिक्त दूध और अनाज अपने दैनिक आहार में शामिल करें। अधिक कमी होने पर सप्लिमेंटस का सेवन डाक्टर के परामर्श अनुसार करें।
रेखादार और कमजोर नाखून
रेखादार और कमजोर नाखून शरीर में आयरन की कमी को दर्शाते हैं। शरीर में आयरन के कम होने से हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, जिसका प्रभाव आक्सीजन के प्रवाह पर पड़ता है। शरीर में आयरन की कमी से नाखून के साथ-साथ बालों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। आयरन की कमी को दूर करने के लिए अंडे का पीला भाग, खट्टे फल, भुने चने, किशमिश आदि का नियमित सेवन करें।
एड़ियों का फटना
त्वचा में खुरदरापन, फटी त्वचा, फटी एड़ियां शरीर में मॉस्चर की कमी को बताता है। शरीर में मॉस्चर की कमी विटामिन बी-3 की कमी के कारण होती है जिससे त्वचा में खुश्की आ जाती है। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्राउन राइस और मूंगफली के 15-20 दाने नियमित लें। मूंगफली में विटामिन बी-3 प्राप्त होता है।
कब्ज का बने रहना
मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है। मैग्नीशियम की मात्रा हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। मैग्नीशियम की कमी से मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं, जिससे कब्ज की शिकायत हो जाती है। मैग्नीशियम की कमी से मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं जिससे कब्ज की शिकायत हो जाती है।
मैग्नीशियम आंतों के पानी को रोक कर रखता है जिससे मल मुलायम रहता है। इससे भोजन एक जगह से दूसरी जगह जाने में मदद मिलती है। मैग्नीशियम की प्राप्ति हम हरी पत्तेदार सब्जियों, सीताफल के बीजों से और सोयाबीन के सेवन से प्राप्त कर सकते है।
मुंह में छाले होना और किनारों का फटना
विटामिन बी-2 की कमी से मुंह में छाले व होंठों के किनारे फट जाते हैं। जीभ पर भी जलन महसूस होती है। बादाम, मशरूम और पालक के सेवन से विटामिन बी-2 की कमी दूर होती है।


