Thursday, May 21, 2026
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फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर नहीं नर्सिंग होम

  • दमकल विभाग की सर्वे रिपोर्ट के बाद डीजी हेल्थ ने भेजा नोटिस
  • मेरठ में करीब 350 नर्सिंग होम में से मात्र तीन पर ही फायर सेफ्टी एनओसी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नोटिस के बाद भी फायर सेफ्टी को लेकर नर्सिंग होम गंभीर नहीं। अग्नि शमन के एक सर्वे रिपोर्ट के बाद महानिदेशक स्वास्थ्य के निर्देश पर सीएमओ ने तमाम नर्सिंग होम संचालकों को नोटिस भेजे थे, लेकिन नोटिस के बाद भी शहर के नर्सिंग होम फायर एनओसी को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।

इतना ही नहीं उन्होंने इसके लिए साफ ना कह दिया है। वहीं, दूसरी ओर यदि फायर सिस्टम की बात की जाए तो तीन सौ नर्सिंग होम में मात्र एक पर ही फायर एनओसी है। अस्पतालों में आए दिन होन होने वाली आग की घटनाओं की यदि बात की जाए तो फायर सेफ्टी को लेकर न तो नर्सिंग होम संचालक नींद से जागने को तैयार है।

बेकुसूर चुकाते हैं लापरवाही की कीमत

आग सरीखे हादसों में हमेशा ही बेकसूर ही लापरवाही की कीमत चुकाते हैं। बात भले ही विक्टोरिया पार्क आग हादसे की हो या फिर दिल्ली के अंसल सिनेमा अग्निकांड की या फिर गुजरात के अहमदाबाद में गत गुरुवार की सुबह हुए आग हादसे की जिसमें कोविड-19 हॉस्टिपल में भर्ती नौ मरीजों की जान चली गयी। वहीं, दूसरी ओर यदि कार्रवाई की बात की जाए तो वह तभी सार्थक है जब इस प्रकार के हादसे रोकने तथा फायर सेफ्टी का पालन किए जाने को लेकर कठोर कानून बनें। कानून भी बने और सिस्टम चलाने वाले अफसर उनका पालन कराने को भी गंभीर हों। आमतौर पर होता है ये है कि केवल नोटिस जाता है, उसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में। अफसर सिर्फ उतनी ही कार्रवाई करते हैं जिससे किसी आदसे की स्थिति में खुद की गर्दम फंसे से बचायी जा सके।

ऊंची पहुंच, अफसर लाचार

दरअसल ज्यादातर नर्सिंग होम संचालक जो फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर नजर नहीं आते बताया जाता है कि सभी ऊंची पहुंच वाले हैं। यह पहुंच सरकार के मंत्रियों के अलावा शासन प्रशासन के बडेÞ अफसरों तक होती है। ऐसी स्थिति में यदि कोई अफसर फायर सेफ्टी को लेकर अनदेखी करने वाले नर्सिंग होम संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत भी जुटाता है तो ऊंची पहुंच के चलते उसकी भी हिम्मत जवाब देने लगती है।

350 में से सिर्फ दो पर फायर एनओसी

जनपद में करीब 350 प्राइवेट अस्पताल व नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं। ये संख्या मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के यहां से बतायी गयी है। इसके अलावा करीब 150 नर्सिंग होम ऐसे हैं जिनका पंजीकरण सीएमओ कार्यालय में नहीं हैं। आमतौर पर इन नर्सिंग होम को आईएमए बूचड़खानों की संज्ञा देता है। कुल 500 नर्सिंग होम हैं जो संचालित किए जा रहे हैं, इनमें से सिर्फ दो के पास ही फायर एनओसी है, बाकी भगवान भरोसे संचालित किए जा रहे हैं।

सरकारी में अस्पताल भी लापरवाह

फायर सेफ्टी को लेकर सरकारी अस्पताल भी परले दर्जे की लापरवाही बरत रहे हैं। यहां तक कि प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल, कैंटोनमेंट हॉस्पिटल तथा गांव देहात में खुली सीएचसी और पीएचसी तक पर फायर सेफ्टी सिस्टम की एनओसी नहीं है। केवल मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक ने ही सरकारी अस्पतालों में से फायर एनओसी ली हुई है। इसके अलावा जितने भी नए नए बडेÞ-बडेÞ मेडिकल खुल रहे हैं। जिनमें से कई में कोविड-19 मरीजों का इलाज भी चल रहा है फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर वो भी पूरी तरह से लापरवाह नजर आ रहे हैं। लगता है कि सभी को किसी बडेÞ हादसे का इंतजार है।

ये कहना है सीएफओ का

जिला अग्नि शमन अधिकारी का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गयी है। किसी भी नर्सिंग होम संचालन का लाइसेंस तभी दिया जा सकता है। जब फायर एनओसी ले ली गयी हो। इसको लेकर एक सर्वे किया गया था जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गयी है।

ये कहना है आईएमए स्टेट सेक्रेटरी का

आईएमए के स्टेट सेक्रेटरी डा. शिशिर जैन का कहना है कि फायर सिस्टम को लेकर भारत सरकार का गजट है। जो प्रावधान तय किए गए हैं, उसके अनुरूप मेरठ में नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन शर्तो पर फायर एनओसी दी जाती है वह संभव नहीं।

ये कहना है सीएमओ का

सीएमओ डा. राजकुमार का कहना है कि फायर सेफ्टी को लेकर शासन गंभीर हैं। वहीं, दूसरी शहर के नर्सिंग होम संचालक लापरवाह बने हुए हैं। यदि किसी ने फायर सेफ्टी एनओसी नहीं ली तो लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।

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