- कोरोना काल के चलते ठप्प पड़े शैक्षणिक कार्य को पुनः शुरू करने पर हुई चर्चा
- संस्था का वार्षिक बजट भी होना है पारित, विभिन्न विभागों की रिपोर्ट हुई पेश
- पांच चरणों में सम्पन्न होगी शूरा की तीन दिवसीय बैठक
जनवाणी संवाददाता |
देवबंद: विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद की सुप्रीम कमेटी मजलिस-ए-शूरा की प्रथम चरण की बैठक में सरकार के निर्देशानुसार संस्था में शैक्षिक कार्य शुरू करने पर चर्चा हुई साथ ही विभिन्न विभागों की रिपोर्ट भी शूरा सदस्यों के सामने पेश की गई।
पांच चरणों में सम्पन्न होने वाली शूरा की इस बैठक में संस्था का वार्षिक बजट पारित करने के अलावा रिक्त चल रहे शेखुल हदीस व सदर मुदर्रिस के पद पर नियुक्ति भी की जा सकती हैं।
सोमवार की सुबह 9 बजे संस्था के अतिथिग्रह के सभागार में शुरू हुई शूरा सदस्यों की बैठक दोपहर करीब 1 बजे तक चली। बताया जाता है कि बैठक में कोरोना काल के चलते करीब 6 महीने से संस्था में ठप्प पड़े शैक्षणिक कार्य को सरकार के दिशा निर्देशानुसार पुनः शुरू किए जाने पर मंथन किया गया।
साथ ही छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर क्या क्या कदम उठाए जाए इस पर भी विचार विमर्श हुआ। प्रथम चरण की बैठक में शूरा सदस्यों के सामने विभिन्न विभागों की रिपोर्ट भी पेश की गई। पांच चरणों में सम्पन्न होने वाली शूरा की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस बैठक में संस्था का वर्ष 2020-21 का वार्षिक बजट भी पारित होना है साथ ही संस्था के शेखुल हदीस और सदर मुदर्रिस के पद पर भी नियुक्ति की जा सकती हैं, जिनके लिए कई महत्वपूर्ण नामों की चर्चाएं ज़ोरो पर हैं।
बैठक में सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना अनवारुल हक, मौलाना रेमतुल्लाह कश्मीरी, मौलाना शफीक बेंगलूर, मौलाना अलीम फारूकी, मौलाना महमूद, मौलाना ग़ुलाम मोहम्मद वुस्तानवी, मौलाना आकिल सहारनपुरी, सैयद अनज़र हुसैन मियां, मौलाना मलिक मोहम्मद इब्राहीम, मौलाना इस्माईल मालेगांव, हकीम कलीमुल्लाह अलीगढ़, सय्यद हबीब अहमद, मौलाना निज़ामुद्दीन और संस्था के मोहतमिम मुफ़्ती अबुल क़ासिम नौमानी मौजूद रहे।
मौलाना अरशद मदनी को बनाया जा सकता है सदर मुदर्रिस
दारुल उलूम के पूर्व शेखुल हदीस मुफ़्ती सईद अहमद पालनपुरी के निधन के बाद से रिक्त चल रहे शेखुल हदीस और सदर मुदर्रिस के पद पर नियुक्ति के लिए मजलिस-ए-शूरा की बैठक में विचार विमर्श किया जाएगा। इन पदों के लिए कई नाम ज़ेरे बहस भी हैं।
हालांकि सूत्रों की मानें तो शूरा सदस्यों द्वारा संस्था के मोहतमिम मुफ़्ती अबुल कासिम नौमानी को ही शेखुल हदीस बनाया जा सकता है जबकि संस्था के सदर मुदर्रिस पद की ज़िम्मेदारी जमीयत उलेमा के हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना अरशद मदनी को सौंपी जा सकती है।
कोरोना काल के चलते घट सकता है संस्था का वार्षिक बजट
कोरोना काल के चलते छह महीने से अधिक समय तक मदरसा बन्द रहने के कारण इस बार संस्था के वार्षिक बजट में भारी कटौती की जा सकती है। वर्ष 2019-20 में संस्था का वार्षिक बजट करीब 36 करोड़ रुपए का था, लेकिन चर्चा है कि कोरोना के वैश्विक असर के चलते इस बार संस्था का वार्षिक बजट घट कर काफी कम हो सकता है।

