- रुड़की रोड पर जगह-जगह खुले अवैध कटों को बल्लियां लगाकर किए गए कवर
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: एनएच-58 पर कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। हाइवे पर जहां अवैध रूप से खुले कटों को बंद कर दिया गया है। वहीं, रुड़की रोड पर खुले काटों को बल्लियां लगाकर बंद कर दिया गया है। प्रशासन इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान कोई गड़बड़ी न हो इसको लेकर पूरी सतर्कता बरते हुए हैं।
कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन पिछले 15 दिनों से तैयारियों में जुटा हुआ है। तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी खुद अपनी देखरेख में तैयारियों में जुटे हुए हैं। हाइवे पर किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी न हो।
इसके लिए प्रशासन द्वारा इस बार कांवड़ यात्रा में अधिक भीड़ होने के चलते पहले ही हाइवे पर खुले अवैध कटों को बंद करा दिया। एनएच-58 पर जो भी कट अवैध रूप से खुले हुए थे। उन्हें बंद कर दिया गया है। रुड़की रोड पर भी अवैध बल्लियों को कट लगाकर बंद कर दिया गया।
पथ प्रकाश व्यवस्था शुरू जगमग होगा कांवड़ मार्ग
कोरोना काल के बाद एक बार फिर से शुरू हो रही देश की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा में किसी तरह से कावड़ियो को परेशानी न हो इसको लेकर जिला पंचायत खास ध्यान दे रहा है। कांवड़ यात्रा से पहले पथ प्रकाश व्यवस्था कार्य शुरू कर दिया है। जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने कांवड़ियों के लिए 70.3 किलोमीटर लंबे कांवड़ मार्ग पर लाइटें लगाने के आदेश दिए हैं, जिसका काम जोरों से चल रहा है।

बता दें कि ये पहला मौका है जब किसी जिला पंचायत अध्यक्ष ने इतनी बड़ी संख्या में लाइट लगाने का काम शुरू कराया है। पथ प्रकाश व्यवस्था कार्य 70.30 किलोमीटर पर जारी है। लाइटें पिछले सालों के मुकाबले लगभग दोगुनी संख्या में लग रही हैं।
लाइटें लगने का काम विभिन्न मार्गों पर जारी
- सलावा माइनर पटरी डाहर गेट से वाया पाली खेड़ा सलावा की ओर
- चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर पूठ खास नहर के पुल से लेकर जानी नहर के पुल तक
- सलावा माइनर की पटरी पाली मंदिर से लेकर मेरठ की सीमा तक
- उकसिया से पुरा महादेव रोड तक
- चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर नानू नहर के पुल से लेकर सरधना नहर के पुल तक
- लाहौरगढ़ माइनर पुल से वाया थिरोट-कल्याणपुर हिंडन नदी तक
- लाहौरगढ़ माइनर की पटरी से लेकर डाहर गेट तक
- चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर नानू नहर के पुल से लेकर पूठखास नहर के पुल तक
- चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर सरधना नहर के पुल से लेकर सलावा मेरठ सीमा तक
इन सभी मार्गों पर काम लगभग पूरा कर लिया गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने बताया की अक्सर देखा जाता है कि गर्मी होने के कारण बहुत से कांवड़िए रात के समय यात्रा करते हैं, लेकिन लाइट न होने से कांवड़ियो को असुविधा होती है और कोई न कोई हादसा होने का भी भय बना रहता है ऐसे में हमारी ये कोशिश है कि जिला पंचायत के अन्तर्गत आने वाला कोई भी कांवड़ मार्ग अधेरे में न रहे और कांवड़ यात्रा जगमग लाइटों के नीचे हो। इसके लिए लगातार काम चल रहा है काफी लाइट लगा ली गई हैं और जल्द ही पूरा काम कर लिया जाएगा।
कांवड़ पटरी पर दौड़ रहे कैंटर को किया सीज
रविवार को कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी पर प्रतिबंध के बाद भी एक कैंटर दौड़ता नजर आया। मामले की सूचना पुलिस को मिली तो तत्काल उसे कब्जे में ले लिया गया। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि चालक के पास गाड़ी के कागजात तक नहीं है। जिस पर पुलिस कैंटर को कोतवाली ले आई और कार्रवाई करते हुए उसे सीज कर दिया। कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी पर भारी संख्या में कांवड़िया गुजर रहे हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर पटरी पर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। प्रतिबंध के बाद रविवार को एक कैंटर गंगनहर पटरी पर चढ़ गया। तेज गति से दौड़ रहे कैंटर को सेवादारों ने देखा तो पुलिस को सूचना कर दी। पुलिस ने नानू पुल के पास कैंटर को पकड़ लिया। चेकिंग की तो पता चला कि चालक के पास गाड़ी के कागजात ही नहीं है। जिस पर पुलिस कैंटर को कोतवाली ले आई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कैंटर को सीज कर दिया।
मेडिकल में शिवभक्तों के लिए तैयार हुआ कांवड़ वार्ड
मेरठ से राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और यूपी के ही अन्य जिलों से शिवभक्त होकर गुजरते हैं। ऐसे में शिवभक्तों के बीमार होने या किसी हादसे में घायल होने पर यदि स्वास्थ्य सेवा की जरूरत पड़ती है तो इसके लिए मेडिकल कॉलेज में कांवड़ वार्ड तैयार किया गया है। मेडिकल प्रशासन का दावा है कि शिवभक्तों को हर तरह की स्वास्थ्य सेवा देने की पूरी व्यवस्था की गई है। मेडिकल की इमरजेंसी में कुल 65 बेड है। इनमें से 42 बेडों पर आक्सीजन की व्यवस्था है। वहीं शिवभक्तों के लिए तैयार किए गए वार्ड में इस समय कुल पांच बेड है।
जिन्हें शिवभक्तों के लिए सुरक्षित रखा गया है। जबकि बाकी बेडों पर अन्य मरीजों के इलाज की सुविधा है। इमरजेंसी में रोज सुबह सात बजे बेडों पर मौजूद मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है। जबकि गंभीर मरीजों को नार्मल होने तक यहां रखा जाता है। इसी तरह कांवड़ वार्ड में स्वास्थ्य सेवा लेने के लिए भर्ती होने पर शिवभक्तों को भर्ती रखा जाएगा।

कांवड़ यात्रा के दौरान यदि कोई शिवभक्त हादसे का शिकार हो जाता है तो उसके लिए माइनर ओटी में पांच बेडों पर इलाज करने के लिए भी सुविधा है। हैड व चेस्ट इंजरी होने पर माइनर ओटी में पूरी व्यवस्था बनाई गई है कि मरीजों को हर सुविधा मिल सके।

