Wednesday, April 22, 2026
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मातृ मृत्यु सर्विलांस-रिस्पांस कार्यक्रम की समीक्षा, मिशन निदेशक ने दिए निर्देश

  • हर तीन माह में मातृ मृत्यु दर की समीक्षा करेंगे जिलाधिकारी

वरिष्ठ संवाददाता |

सहारनपुर: मातृ मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के लिए सूबे में मातृ मृत्यु सर्विलांस एवं रिस्पांस (एमडीएसआर) कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। सितंबर माह में राज्य स्तरीय वर्किंग ग्रुप द्वारा इस कार्यक्रम की समीक्षा की गई। प्रदेश स्तर पर हुई इस समीक्षा के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सूबे के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को वर्किंग ग्रुप की अनुशंसा का अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) स्तर के अधिकारी को एमडीएसआर का नोडल अधिकारी (डिस्ट्रिक्ट नोडल अधिकारी यानी डीएनओ) नियुक्त किया जाए।

डीएनओ जनपद में हर माह होने वाली मातृ मृत्यु की लाइन लिस्टिंग एवं उनमें से किसी एक की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। जनपद में जो भी मातृ मृत्य होगी, चाहे वह निजी अस्पताल, सरकारी अस्पताल, अस्पताल जाते समय या फिर घर पर हुई हो, एमडीएसआर के प्रपत्र-5 में मौखिक शव परीक्षण भरा जाएगा।

हर तीन माह में जिलाधिकारी एमडीएसआर की समीक्षा करेंगे और कम से कम दो केस स्टडी डीएनओ की ओर से प्रस्तुत की जाएंगी। जनपद में हुई मातृ मृत्यु की सूचनाओं का डाटा एचएमआईएस एवं यूपीएचएमआईएस पोर्टल पर त्रुटि रहित अंकित करने के लिए डीएनओ जिम्मेदार होंगे।

प्रसव के लिए सीधे एफआरयू लेकर जाएं

वर्किंग ग्रुप की अनुशंसाओं में उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) वाली महिलाओं को सीधे फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) लेकर जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही एफआरयू स्तर पर ब्लड स्टोरेज यूनिट (बीएसयू) का सुदृढ़ीकरण करने की बात भी कही गई है। ताकि प्रसूता को जरूरत पड़ने पर तत्काल रक्त चढ़ाया जा सके और ब्लड ट्रांसफ्यूजन पूरी तरह निशुल्क हो और बदले में रक्तदान का इंतजार न किया जाए। पंजीकृत गर्भवती यानी मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड धारक गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सीधे निकटतम सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) पर ही ले जाया जाए।

इसलिए जरूरी है गर्भवती का पंजीकरण

परिवार कल्याण अधिकारी डॉ बीएस पुंडीर ने बताया गर्भवती को गर्भ के तीसरे माह में अपना पंजीकरण कराना होता है। इसके लिए वह अपने नजदीकी अस्पताल या आंगनबाड़ी केंद्र में जा सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने आशा कार्यकतार्ओं और एएनएम को पंजीकरण की जिम्मेदारी दी हुई है। पंजीकरण कराने के बाद गर्भवती को एमसीपी कार्ड जारी किया जाता है। जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन कम होता है उन्हें हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) मानते हुए एमसीपी कार्ड पर एचआरपी की मुहर लगा दी जाती है ताकि प्रसव के समय कार्ड देखते ही यह समझा जा सके कि गर्भवती को सीधे एफआरयू लेकर जाना है।

प्रसूताओं को परिवार नियोजन के साधन देकर किया जाएगा डिस्चार्ज

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ बीएस सोढ़ी ने बताया मिशन निदेशक द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि प्रसव के बाद प्रसूता की परिवार नियोजन के लिए काउंसलिंग के साथ परिवार नियोजन के विभिन्न उपायों जैसे पीपीआईयूसीडी, छाया गोली या फिर कंडोम देकर ही डिस्चार्ज करें। इसके अलावा ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर और एएनसी के समय ही प्रसवोपरांत परिवार नियोजन अपनाने हेतु काउंसलिंग की जाए।

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