
निर्देश निधि की कहानी संग्रह ‘सरोगेट मदर’ की कहानियां खुद बखुद बता देती हैं कि लेखिका के पास विविधता के साथ जीवन के कई सवालों को छूने,आधी दुनिया की समस्याएं,उनके साथ हुए अन्याय और विषमता की बातें करने की छटपटाहट है। निर्देश निधि अपनी कहानियों में समाज के सवालों पर केवल ऊंगली ही नहीं रखती बल्कि, उसकी तह तक जाती हैं। ‘सरोगेट मदर’ संग्रह में गहरे जीवन बोध की बड़ी कहानियां हैं।
कहानी में रवानी और सादापन के साथ जीवंतता और सहजता भी है। कुछ कहानियों में घटनाएं घटित होती हैं। संग्रह में ग्यारह कहानियां हैं। सभी में नारी का पक्ष,उसका संघर्ष और उसके सुख-दुख की सौंधी गंध है। ‘खो गया है मन मराला’ औरत की जिंदगी के उस पल की कथा है, जब पत्नी को पति समय नहीं दे पाता है, उसके हिस्से का प्यार उसे नहीं मिलता, तब वह भीगने के लिए कोई और सावन ढूंढती है।
लेखा की तन्हाई के होंठों को छूता है सीआरपीएफ का जवान अविराज। लेखा को समझाता है, जब पुरुष अपने मद में खुद को स्त्री से स्मार्ट मानता है, तो बड़ी उम्र की स्त्री प्रेम क्यों नहीं कर सकती? उसके तर्कों से लेखी नि:शब्द हो जाती है। चूंकि आगे कहानी नहीं बढ़ने से पता नहीं चलता, अविराज की ओर लेखा पूरी तरह झुकती है या नहीं अथवा उसे किस मोड़ पर छोड़ देती है। ‘नहीं देखा उसी में उसका होना’ में अपने से कम उम्र की दिशा को ट्यूशन देने वाले मलय का मन कई बार उसकी ओर झुका। मगर उसके पिता के एहसान के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहा।
दिशा के इंजीनियरिंग के बाद भी कभी जानने की कोशिश नहीं किया कि उसके मन में क्या चल रहा है। संयोग्य से घर में एसी के शार्ट सर्किट से आग लग जाती। धुएं में दम घुटने से दिशा की मौत हो जाती है। जानने पर मलय पछताता है, यदि वो वक़्त पर दिशा के घर पहुंँच जाता, तो आज वो उसकी होती। सच्ची भावुकता के अक्स में भीगी कहानी है जीकाजि। मां के मना करने के बावजूद रीवा अपाहिज जीकाजि से अपने प्रेम को दूसरा नाम देने अड़ जाती है। कहानी में व्यक्तित्व, दोस्ती,और हालात के जरिये कई सवाल उठाये गए हैं। जैसे-शादी के बाद यदि जीकाजि के साथ जो हुआ, मेरे साथ हो जाता या जीकाजि को होता तो…? स्त्री के मन के एहसास से गुजरना है, तो इन कहानियों को एक बार जरूर पढ़ें।
पुस्तक : सरोगेट मदर, लेखिका : निर्देश निधि, प्रकाशक : अनन्य प्रकाशन, मूल्य : 350 रुपये।


