Friday, March 27, 2026
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गांधी आश्रम: समिति और भू-माफिया का खतरनाक गठजोड़

गढ़ रोड स्थित गांधी आश्रम का जिक्र आते ही हर किसी के दिमाग में ये बात कौंधने लगती है कि हो न हो जमीन हड़पने की तैयारी चल रही हैं। वर्ष 2012 से गांधी आश्रम की जमीन पर कुछ भू-माफिया की कुदृष्टि पड़ी। तब से शहर के कई नामचीन लोगों ने इस जमीन को हथियाने की हर कोशिश की, मगर नाकामयाब रहे। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भू-माफिया तो लगातार इस प्रयास में है कब इस जमीन पर काबिज हो, लेकिन प्रशासन ने इसको लेकर भू-माफिया पर कभी शिकंजा नहीं कसा, जिसके चलते भू-माफिया यही प्रयास करता रहा कि जमीन पर कब्जा कैसे किया जाए? लखनऊ में मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन फिर भी दुस्साहस हुआ। नीलामी करने वालों पर ही प्रशासन लगाम नहीं कस पा रहा हैं, जिसके चलते बार-बार जमीन पर कब्जे की दिशा में आगे बढ़ने की पुनरावृत्ति हो रही हैं।

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गढ़ रोड स्थित गांधी आश्रम के पास करीब एक सौ बीघा जमीन हैं, जिसमें से पचास बीघा जमीन ओपन हैं। बाकी कवरड हैं। जमीन आबादी के बीचो-बीच आ चुकी हैं, जिसके चलते भू-माफिया की गिद दृष्टि इस पर पड़ गई हैं। पहली बार 2012 में मंडप निर्माण करने के लिए गांधी आश्रम समिति की तरफ से बेचने का षडयंत्र हुआ, जिसकी शिकायत हुई तो करोड़ों की सम्पत्ति बिकने से बच गई।

तब इसमें एफआईआर होने के बाद भू-माफियाओं के हाथों में खेलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो गई होती तो फिर इस तरह के प्रयास नहीं हुए होते। करोड़ों की सम्पत्ति को बेचने के कुचक्र चल रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं। आखिर शहर की राष्टÑीय धरोहर को किस तरह से खत्म किया जा रहा हैं, इसको लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

इसमें राजनीतिक दल भी कोई विरोध नहीं कर रहे हैं। ये शहर की जनता की सामूहिक सम्पत्ति हैं, जिसको कई बार बेचने के प्रयास हो चुके हैं। आखिर इस तरह का खेल कब तक चलता रहेगा? छोटे से मामले में भी गैंगस्टर-भू-माफिया की कार्रवाई प्रशासन कर रहा हैं, मगर इतना बड़ा जमीन हथियाने के प्रयास चल रहे हैं। मुकदमा भी दर्ज हो चुका हैं, फिर इसमें भू-माफिया की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं? आखिर प्रशासन के हाथ किसने बांध रखे हैं?

  • केस-1

वर्ष 2012 में बाबू लाल गुप्ता नामक व्यक्ति ने गांधी आश्रम की पांच हजार वर्ग मीटर जमीन में विवाह मंडप बनाने का प्रयास किया था। तब पहली बार गांधी आश्रम की जमीन को देने की कुचेष्ठा हुई थी। इसका विरोध हो गया था। कुछ लोगों ने तत्कालीन डीएम विकास गोठवाल ने संज्ञान लेते हुए गांधी आश्रम के जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाकर कार्रवाई करने के आदेश दिये थे, जिसके बाद ही जमीन बिकने से बच गई थी। बताया गया कि तब इस जमीन को बेचने का एडवांस गांधी आश्रम समिति के पदाधिकारियों के पास आ गया था। इसी वजह से कई वर्ष तक इस दिशा में जमीन देने के प्रयास होते रहे।

  • केस-2

वर्ष 2014 में गांधी आश्रम समिति ने माइंड का प्रयोग करते हुए क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम डीकेएस शिक्षा प्रचार समिति का गठन किया। इसके नाम से स्कूल का निर्माण किया जाना था, जबकि एमडीए में स्कूल का मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए गांधी आश्रम की तरफ से दिया गया। एमडीए ने तब गांधी आश्रम की जमीन पर स्कूल बनाने के लिए मानचित्र भी स्वीकृत कर दिया था तथा इसके लिए 54 लाख रुपये की फीस गांधी आश्रम ने जमा करा दी थी।

बीडीएस के मालिक धर्मेन्द्र शर्मा ने जो गांधी आश्रम की तरफ से दूसरी सोसायटी शिक्षा प्रचार समिति का पंजीकरण कराया गया था, उसमें बीडीएस वाले धर्मेन्द्र शर्मा को सचिव बनाया गया था, जबकि पृथ्वी रावत, संजीव सिंह, अरविन्द श्रीवास्तव, रामनरेश सिंह आदि को भी कमेटी में रखा गया था। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री से की गई तो इसकी जांच हो गई थी, जिसके बाद ही एमडीए ने मानचित्र को अस्वीकृत कर दिया था।

क्योंकि धोखाधड़ी से ये मानचित्र स्वीकृत कराया गया था। इसमें भी एफआईआर के आदेश तो हुए, मगर रिपोर्ट दर्ज नहीं करायी गयी। इसमें 54 लाख का घालमेल उजागर हुआ, जिसमें कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई। ये जमीन रोडवेज से लगी हुई हैं, जिसको लेकर मानचित्र भी स्वीकृत करा लिया गया था। करीब 7500 मीटर जमीन पर मानचित्र स्वीकृत हुआ था।

  • केस-3

वर्ष 2021 में रेणूका फर्म ने चार हजार वर्ग मीटर जमीन की लीज डीड कराई थी। इसको लेकर भी विवाद पैदा हो गया। गांधी आश्रम ने कैसे 99 वर्ष के लिए लीज डीड कर दी? इसको लेकर बड़ा हंगामा खड़ा हो गया था। रेणूका फर्म में शामिल लोगों ने तो ऐतिहासिक बिल्डिंग को ही तोड़ दिया था,

जिसके बाद महात्मा गांधी की राष्टÑीय धरोहर को ही नुकसान पहुंचा दिया गया था, फिर भी इसमें कोई कार्रवाई प्रशासन की तरफ से नहीं की गई। सिर्फ काम रुकवाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इस तरह से भू-माफिया के हौंसले बढ़ते चले गए, जिसके बाद ही जमीन कब्जाने के तमाम प्रयास होते रहे। एमडीए में भी इसका मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए आॅन लाइन डाला गया, जो फिलहाल पेडिंग पड़ा हैं।

  • केस-4

वर्ष 2022 में गांधी आश्रम नाले से सूरजकुंड रोड पर करीब नौ बीघा जमीन खाली पड़ी हैं। इसकी चार दीवारी हो चुकी हैं। इस जमीन को नीलामी करने के प्रयास हुआ। लोगों को इसका पता चला तो एसडीएम सदर मय स्टाफ के मौके पर पहुंचे गए तथा किसी तरह से आयोग के अधिकारियों को साथ लेकर नीलामी को रुकवाया गया।

इसके बाद नीलामी तो रुक गई, लेकिन भू-माफिया इस जमीन को कब्जाने के लिए तरह-तरह के प्रयास करते रहे। बड़ा सवाल यह है कि गांधी आश्रम समिति के पदाधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच खतरनाक गठजोड़ बना हुआ हैं। यही वजह है कि नीलामी रुक जाती हैं, फिर कुछ समय रुकने के बाद प्रक्रिया चालू कर दी जाती हैं।

इस मामले में गांधी आश्रम समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ लखनऊ में बारह लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। फिर भी जमीन कब्जाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। आखिर इन्हें प्रशासन भू-माफिया घोषित क्यों नहीं कर रहा हैं? आखिर इन पर प्रशासन इतना मेहरबान क्यों हैं?

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