जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप में भी बासमती चावल की अच्छी खासी डिमांड रही है। विदेशों में भी बासमती की डिमांड में लगातार इजाफा हुआ है। जिसके चलते बासमती के किसानों को फायदा मिला है, लेकिन इस बार बासमती की किस्म 1509 का उत्पादन अधिक होने के कारण इसके दामों में बेहद गिरावट आई है। हालांकि बासमती की अन्य किस्मों के दाम अच्छे खासे रहने की उम्मीद है।
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप में विश्व में शाकाहार को बढ़ावा मिला है। मांसाहार से लोगों ने दूरी बनाई है। इसके मद्देनजर बासमती चावल की डिमांड भी बढ़ी है। अगर देखा जाए तो इस बार बासमती की किस्मों के दामों में अच्छा खासा दाम मिलने की उम्मीद है। लेकिन अभी बासमती की जो किस्म पूसा बासमती 1509 के दामों में गिरावट आई है।
यह किस्म पिछले वर्ष 2600 रुपये प्रति कुंतल बिकी थी। लेकिन इस बार 2000 रुपये प्रति कुंतल बिकी है। इसके दामों में गिरावट आने का मुख्य कारण किसानों द्वारा इस किस्म को ज्यादा लगाना है। क्योकि यह किस्म कम दिन की प्रजाति है। जिससे किसान ज्यादा पसंद करते है।
दूसरा कारण देश में इस प्रजाति का अधिक उत्पादन होना बना है। जिसके चलते इस प्रजाति के दामों में गिरावट आई है। जबकि बासमती की अन्य किस्मों में पूसा बासमती 1121 के दाम 2800 रुपये प्रति कुंतल एवं पूसा बासमती 1718 के दाम 2900 रुपये प्रति कुंतल रहने की संभावना बनी हुई है।
बीईडीएफ के प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश शर्मा ने बताया कि बासमती 1509 के दामों में गिरावट आई है। उसका कारण अधिक उत्पादन है। जबकि अन्य किस्मों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। कोरोना काल में बासमती की डिमांड में इजाफा हुआ है।
बासमती की पराली से पशुओं का बढ़ता है दूध
बीईडीएफ के प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश शर्मा ने बताया कि बासमती की पराली का प्रयोग किसान अपने पशुओं को खिलाने में करते हैं। क्योंकि बासमती की पराली खिलाने से पशुओं का दूध बढ़ता है। हरियाणा और पंजाब के किसान तो वेस्ट यूपी में बासमती की पराली को बेचने के लिए प्रतिदिन ट्रैक्टर-ट्रॉली से आते हैं। इसकी पराली किसानों के लिए कोई समस्या नही बल्कि लाभदायक है। किसानों के पशुओं के दूध के उत्पादन में बढ़ोतरी करती है।

