Monday, April 6, 2026
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10 किमी रेस वाॅकिंग में चुनौती पेश करेंगी प्रियंका

जनपद के गढमलपुर सांगडी की हैं रहने वाली प्रियंका गोस्वामी

  • छोटे से गांव से काॅमनवैल्थ तक पहुंचने का सफर तय किया जनपद की बेटी ने
  • प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में की थी प्रियंका की प्रशंसा

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर की बेटियां जनपद का नाम रोशन करने में यहां के बेटों से पीछे नहीं हैं। ओलम्पिक खेलों में अपने नाम का डंका बजा चुकी दिव्या काकरान के बाद अब प्रियंका गोस्वामी भी नाम रोशन कर रही है। प्रियंका गोस्वामी बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 किमी रेस वाकिंग (पैदल चाल) में भारत की और से चुनौती पेश करेगी। मुजफ्फरनगर के गांव गढमलपुर सांगड़ी की बेटी का इस मुकाम तक पहुंचना दूसरों के लिए प्रेरणा देने वाला है। प्रियंका एक बस कंडेक्टर की बेटी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी प्रियंका की प्रशंसा मन की बात कार्यक्रम में भी की थी।

फुगाना थाना क्षेत्र के गांव गढमलपुर सांगड़ी की रेस वाकिंग सेनसेशन प्रियंका गोस्वामी ने शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। कक्षा 7 तक करीब के गांव कुरावा में प्रियंका ने पढ़ाई की। इसके बाद 2006 में परिवार मेरठ जाकर बस गया। पिता मदनपाल गोस्वामी परिवहन विभाग में बस कंडक्टर के पद पर कार्यरत रहे। कक्षा सात-आठ के दौरान प्रियंका का चयन केडी सिंह बाबू स्पोर्टर्स स्टेडियम में जिमनास्टिक के लिए हो गया था। प्रियंका की मंजिल तो एथेलेटिक्स थी। इसलिए वह वहां से जिमनास्टिक छोड़कर आ गईं और मेरठ के कनोहर लाल त्रिशला देवी कॉलेज में प्रवेश लिया।

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मन में ओलिंपिक का सपना सजाए प्रियंका ने 20 किमी रेस वाकिंग के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना शुरू किया। प्रियंका ने उस समय राष्ट्रीय स्तर पर पांच, 10 तथा 20 किमी रेस में बहुत से पदक जीते। फरवरी 2021 में प्रियंका ने रांची में हुई आठवीं ओपन एंड थर्ड इंटरनेशनल रेस वाकिंग चैंपियनशिप में एक घंटा 48 मिनट तथा 45 सेकंड का समय निकाल नया रिकॉर्ड बनाया। 10 व 20 किमी रेस वाकिंग प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड और सिल्वर मेडल जीत चुकी प्रियंका ने टोक्यो ओलिंपिक में भी हिस्सा लिया था।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाने वाली ओलंपियन प्रियंका गोस्वामी के संघर्ष की लम्बी कहानी है। प्रियंका को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा है। आर्थिक तंगी से जूझती प्रियंका को भूख मिटाने के लिए एक समय गुरुद्वारे के लंगर पर निर्भर रहना पड़ा। पिता की नौकरी छूटी, तो भी हार नहीं मानी। प्रियंका के पिता मदनपाल गोस्वामी परिवहन विभाग में बस कंडक्टर के पद पर कार्यरत थे। एक घटनाक्रम में पिता सस्पेंड हो गए, तो प्रियंका को तैयारी के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा। प्रशिक्षण के लिए प्रियंका पटियाला कैंप चली गईं।

पब्लिक कॉलेज समाना में पढ़ते समय उसे पिता 4 हजार रुपए प्रति माह भेजते थे। प्रियंका के अनुसार, ष्यह धनराशि किसी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए नाकाफी थी। इसके बावजूद परिवार की आर्थिक तंगी के मद्देनजर मैं इसमें से भी पैसा बचाना चाहती थी। इसलिए दोपहर को लंच करना छोड़ दिया था। भूख मिटाने के लिए गुरुद्वारा में जाकर लंगर खाती थी।

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