Sunday, May 10, 2026
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भद्रा के कारण रक्षाबंधन पर बनी असमंजस की स्थिति

  • इस वर्ष दो दिन मनाया जाएगा यह पर्व

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भारत अपने त्योहारों और विशेष अवसरों के लिए जाना जाता है। ऐसा ही एक त्योहार रक्षाबंधन है, जो भाई बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित है। रक्षाबंधन के इस पावन त्योहार पर बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और रक्षा का वचन मांगती है। साथ ही साथ बहनें अपने भाई की सुख समृद्धि की कामना भी करती है।

इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व दो दिन मनाया जाएगा, क्योंकि भद्रा के चलते पर्व को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई। बता दें कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त यानि गुरुवार के दिन सुबह 10 बजकर 38 मिनट से शुरु होकर अगले दिन 12 अगस्त यानि शुक्रवार को सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर समाप्त हो रही है।

ज्योतिषाचार्य अमित के अनुसार त्योहर उदया तिथि के अनुसार मनाया जाता है इसलिए यह पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए कई अभूझ मुहूर्त रहेंगे। इस दिन सुबह 11 बजकर 37 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा। फिर दोपहर 2 बजकर 14 मिनट से 3 बजकर 7 मिनट तक विजय मुहूर्त होगा।

भद्रा का भी रहेगा साया

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रक्षाबंधन के त्योहार पर इस वर्ष भद्रा का साया भी रहेगा। 11 अगस्त यानि रक्षाबंधन को शाम 5 बजकर 17 मिनट से भद्रा पुंछ शुरू हो जाएगा जो कि एक घंटा रहेगा। उसके बाद 6 बजकर 18 मिनट से रात 8 बजे तक मुख भद्रा रहेगी। इस दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए।

रक्षाबंधन कथा

राखी का यह पर्व पुराणों से होता हुआ महाभारत तक प्रचलित है। राखी से जुड़ा एक प्रसंग महाभारत का भी प्रचलित है। शिशुपाल का वध करते समय श्री कृष्ण की तर्जनी अंगुली में चोट लग गई थी, जिसकी वजह से उनकी अंगुली से खून बहने लगा था। खून को रोकने को लिए द्रौपदी ने अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर श्री कृष्ण की अंगुली बांध दिया था। इस ऋण को चुकाने के लिए चीर हरण के समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी की मदद करी थी।

द्रौपदी ने श्री कृष्ण से रक्षा करने का वचन भी लिया था। वहीं एक कथा मध्यकालीन इतिहास से भी जुड़ी हुई है। बात उस समय की है जब राजपूतों और मुगलों की लड़ाई चल रही थी उस समय चित्तौड़ के महाराजा की विधवा रानी कर्णवती ने अपने राज्य की रक्षा के लिए हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने भी उस राखी की लाज रखी और स्नेह दिखाते हुए, उसने तुरंत अपनी सेनाएं वापस बुला ली थी।

इस ऐतिहासिक घटना ने भाई -बहन के प्यार को मजबूती प्रदान की। इस घटना की याद में भी रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार जब वामन अवतार लेकर राजा महाबलि को विष्णु भगवान ने पाताल लोक भेज दिया था तब महाबलि ने विष्णु भगवान से भी एक चीज मांगी थी कि वो जब भी सुबह उठें तो उन्हें भगवान विष्णु के दर्शन हो। अब हर रोज विष्णु राजा बलि के सुबह उठने पर पाताल लोक जाते थे।

ये देखकर माता लक्ष्मी व्याकुल हो उठी। तब नारद मुनि ने सलाह दी कि अगर वो राजा बलि को भाई बना लें और उनसे विष्णु की मुक्ति का वचन लें तो सब सही हो सकता है। इस पर मां लक्ष्मी एक सुंदर स्त्री का वेष धरकर रोते हुए बलि के पास पहुंची और कहा कि उनका कोई भाई नहीं है जिससे वे दु:खी हैं।

राजा बलि ने उनसे कहा कि वे दुखी न हो आज से वे उनके भाई है। भाई बहन के पवित्र रिश्ते में बंधने के बाद मां लक्ष्मी ने बलि से उनके पहरेदार के रूप में सेवाएं दे रहे भगवान विष्णु को अपने लिए वापस मांग लिया और इस प्रकार नारायण संकट से मुक्त हुए। इसलिए भी रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है।

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