- खिलाड़ियों को सुविधाएं मिले तो अनेक रूपल, अन्नू, प्रियंका और दिव्या काकरान निकलेंगी
- मेरठ में सिंथेटिक ट्रैक न होने से सप्ताह में दो बार जाना पड़ता था दिल्ली
जनवाणी संवाददाता |
रोहटा: बातचीत के दौरान रूपल ने जीत का श्रेय मां ममता और पिता ओमवीर सिंह तथा कोच विशाल सक्सेना व अमिता सक्सेना को देते हुए उनका धन्यवाद दिया रूपल ने कहा कि यदि जिले में सिंथेटिक ट्रैक होता तो सप्ताह में दो बार उन्हें दिल्ली नहीं जाना पड़ता

जिसके कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा भारी सर्दी और गर्मी में लगातार उनकी जीत के सामने मौसम भी हार गया और वह हर सप्ताह दिल्ली जाकर सिंथेटिक ट्रैक पर प्रैक्टिस करती थी।

जिसके कारण उन्होंने सफलता पाई। इसके लिए गए अपने भाग्य को भी अच्छा मानती हैं। रूपल ने कहा कि जिले में यदि सिंथेटिक ट्रैक होगा तो मेरे जैसी अनेक रूपल मेरठ से निकलकर दुनिया के पटल पर नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने मेरठ में और सरकार से खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के लिए अपील करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को हौसला अफजाई और सुविधाएं मिले तो बहुत कुछ कर दिखाने में सक्षम है। मेरे जैसी अनेक बेटियां रूपल, अन्नू, प्रियंका और दिव्या काकरान जैसी कितनी निकलेगी। अगली बार उनके मेडल का रंग गोल्डन होगा इसके लिए मैं भी से मेहनत करेंगी।
पिता बोले-बेटी जब तक चाहे खेले, शादी की कोई जल्दी नहीं
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धाक जमाकर गांव लौटी 17 वर्षीय रूपल चौधरी के पिता ओमबीर सिंह ने कहा कि बेटी जब तक चाहे नाम रोशन कर के खेल सकती हैं। अभी उन्होंने बेटी की शादी के बारे में कोई सपना नहीं देखा है। बेटी जब तक चाहे देश और दुनिया में नाम रोशन करके उनका सीना चौड़ा कर सकती है तो मां ममता ने भी कहा ने बेटी के हाथ पीले करने की कोई जल्दी नहीं है।

बस उन्होंने कहा कि बेटी यूं ही गांव का नाम दुनिया में रोशन करती रहे। उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। उन्होंने कहा कि उसकी जिद के आगे हम नतमस्तक थे और आज उसने अपनी जीत का लोहा मनवा कर हमें बौना साबित कर दिया। रूपल की तीन दिन की भूख हड़ताल का भी अपना जिक्र करते हुए कि बेटी की तीन दिन की भूख हड़ताल ने आज हमें उसका सपना दिखाकर आंखें खोल दी।
रूपल के अब तक के कमाल-दर-कमाल पदक

- रूपल ने छोटी उम्र बड़ा कारनामा के दौरान अपने छोटे से सफर की शुरुआत दिल्ली में 400 मीटर राष्ट्रीय एथलेटिक चैम्पियनशिप 2021 दिल्ली में स्वर्ण पदक, प्रदर्शन: 53.73 सेकंड पूरी करके की थी।
- असम में जूनियर नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2021 400 मीटर में कांस्य पदक, प्रदर्शन: 56.76 सेकंड।
- संगरूर में तीसरा स्कूल नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2019 में 400 मीटर में स्वर्ण पदक:प्रदर्शन 55.78 सेकंड।
- रांची में आयोजित जूनियर नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2018 पदक रजत, प्रदर्शन 1.37 सेकंड।
- विजयवाड़ा में आयोजित जूनियर नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2019 में 400 मीटर में स्वर्ण पदक: प्रदर्शन: 55.37 सेकंड।
- चंडीगढ़ में आयोजित सीनियर फेडरेशन कप में रजत पदक।
- गुजरात में राष्ट्रीय एथकेटिक्स में स्वर्ण पदक, प्रदर्शन 52:48 सेकंड।
- कोलंबिया में अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 4़400 मीटर में रजत पदक। प्रदर्शन: 3:17:76 मिनट।
- कोलंबिया में अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक, प्रदर्शन 51:85 सेकंड।

