- सरकार को ठेकेदार हर रोज लगा रहे हैं लाखों के राजस्व का चूना
- ढिक्का कलां, बरथा कोरसी और अन्य स्थानों पर भी मची अंधेरगर्दी
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: अवैध खनन को लेकर एक बार फिर सहारनपुर सुर्खियों में आने लगा है। बेहट और मिर्जापुर के साथ अन्य स्थानों पर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। ढिक्का कलां में तो यमुना का सीना हर रोज छलनी हो रहा है। यही नहीं, बरथा कोरसी और गंगोह के नाई माजरा में भी अवैध रूप से खुदान किया जाने लगा है। मंगलवार को बेहट के एसडीएम ने कार्रवाई की और गाड़ियों को पकड़ा तो खलबली मच गई।
खनन के मामले में सहारनपुर कई दशकों से बदनाम रहा है। मिर्जापुर पोल के रहने वाले हाजी इकबाल ने तो इसी खनन के बूते अरबों की संपत्ति बना ली। फिलहाल, अब वह और उसका पूरा परिवार सांसत में है। हाजी के तीन बेटे और भाई महमूद जेल में हैं तो हाजी इकबाल खुद फरार है। फिलहाल, सहारनपुर का बेहट तहसील क्षेत्र इस समय फिर सुर्खियों में है। वजह कृषि पट्टा है। दरअसल, तीन माह में खुदने वाली जमीन को एक सप्ताह में ही 70 प्रतिशत से अधिक खोद कर उसमें क्रशर से निकलने वाली रेगी (डस्ट) पाटी जा रही है।
दरअसल, गत 1 अक्तूबर से खनन का कार्य शुरू हो चुका है। ढिक्का कलां में तो जमकर अवैध रूप से रेत खनन और परिवहन शुरू कर दिया गया है। कृषि पट्टा बेहट तहसील क्षेत्र के ग्राम बरथा कोरसी में भी अंधेरगर्दी मची हुई है। बता दें कि इस कृषि पट्टे के लिए अनुज्ञापत्र तो किसान के नाम से जारी हुआ है जबकि इसका संचालन उत्तराखंड के रुड़की और लोनी का एक खनन कारोबारी कर रहा है। पिछले कई कृषि पट्टों में ज्यादा खोदाई होने के कारण संबंधितों को जुमार्ना भी भरना पड़ा था। इस बार बचने के लिए जिन क्रसरों को मिश्रित खनिज दिया जा रहा है, उन्हीं से बहुत सस्ते में रेगी लेकर जमीन को पाटा भी जा रहा है। सूत्रों के अनुसार खनन की अनुज्ञा जारी करने से पहले विभाग जितनी जमीन की खोदाई का परमीशन देता है, उसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई अनुज्ञा पत्र में लिख देता है।
इस बार खोदाई गहराई में ज्यादा करने की गरज से रेगी से पटाई शुरू की गई है। जानकारों का कहना है कि लोनी के रहने वाले कारोबारी के तार लखनऊ तक जुड़े हैं। पिछली बार इस कारोबारी पर जिलाधिकारी ने अधिक खोदाई पर नियमानुसार रायल्टी और जुमार्ना लगाया था। इस बार उसी रायल्टी और जुमार्ने से बचने के लिए रेगी से पटाई शुरू हो गई है। वैसे कृषि पट्टे देने के पीछे प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि किसान अपनी जमीन से रेत और पत्थर हटा कर उसे खेती योग्य बना लें। लेकिन, इसकी आड़ में जमकर अंधेरगर्दी की जा रही है। हालांकि, एसडीएम ने मंगलवार को कई गाड़ियां पकड़ीं। पहले हुई टास्क फोर्स की बैठक में क्रशर यूनियन के अध्यक्ष प्रदीप राणा ने डीएम के समक्ष कहा था कि-जिस स्टोन क्रशर पर बिना परिवहन प्रपत्र के गाड़ी पकड़ी जाती है,उस पर पांच लाख का जुर्माना होना चाहिए।
उनके इस प्रस्ताव को डीएम ने गम्भीरता से लिया था। बहरहाल, अब देखना ये है कि जुर्माना होता है कि नहीं। इस संबंध में खान अधिकारी एसके दास का कहना है कि अवैध रूप से न तो खनन होने दिया जाएगा न ही परिवहन। उधर, एडीएम एफ एंड आर का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच होगी। कृषि पट्टों को लेकर प्रशासन गम्भीर है।

