Friday, June 5, 2026
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ठेकेदारों के बहिष्कार से बैकफुट पर आए नगर आयुक्त

  • बकाया भुगतान के लिए 15वें वित्त आयोग की राशि से करीब 15 करोड़ के चेक भी काटे
  • पुरानी शर्तों पर ही निर्माण के टेंडर डालने की दी व्यवस्था, 19 तक बढ़ाई तिथि
  • शेष 25 करोड़ के निर्माण की धनराशि के भुगतान के लिए जल्दी व्यवस्था कराने का आश्वासन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बोर्ड फंड से कराए जाने वाले करीब 16 करोड़ रुपये की लागत के 188 कामों की टेंडर प्रक्रिया में नए नियम लागू किए जाने के खिलाफ ठेकेदारों ने लामबंद होकर कार्य बहिष्कार की घोषणा कर डाली। जिसमें उन्हें पार्षद रंजन शर्मा और उनके साथी पार्षदों का भी साथ मिला।

इसका असर यह हुआ कि बुधवार को ठेकेदारों के साथ नगर आयुक्त ने बैठक करते हुए काम शुरू कराने पर बल दिया। और पुरानी टेंडर शर्तों को ही बहाल करते हुए कई महीने से रोके गए भुगतान में 15 करोड़ के चेक भी आनन-फानन में काट दिए गए। शेष 25 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए शीघ्र व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया गया है।

बुधवार को नगर निगम कार्यालय में बोर्ड फंड से कराए जाने वाले करीब 16 करोड़ रुपये की लागत के 188 कार्यों के लिए टेंडर डाले जाने थे। लेकिन ठेकेदारों ने टेंडर डालने का बहिष्कार कर दिया। दरअसल अब तक जारी टेंडर शर्तों के अनुसार एक ठेकेदार अगर कई कार्यों के लिए टेंडर डालता है, तो उसे एक ही शपथ पत्र देना होता है। इसके अलावा धरोहर राशि के रूप में टेंडर राशि का पांच प्रतिशत भाग धरोहर के रूप में जमा कराया जाता है।

इन दोनों शर्तों को बदलने के आदेश नगर आयुक्त की ओर से जारी किए गए थे। जिसमें कहा गया था कि हर काम के लिए ठेकेदार को अलग-अलग शपथ पत्र जमा कराना होगा। साथ ही धरोहर राशि पांच प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत जमा करानी होगी। बताया गया है कि कार्यालय से टेंडर खरीदते समय ठेकेदारों को नई शर्तों के बारे में पहले ही बता दिया गया था। जिसको लेकर उनमें रोष पैदा हो गया और उन्होंने नई शर्तों के साथ टेंडर डालने का बहिष्कार करने का निर्णय लिया।

इस बीच रंजन शर्मा और उनके सहयोगी पार्षदों ने भी धरना प्रदर्शन के दौरान निर्माण के टेंडर की शर्तों में बदलाव का विरोध किया था। बुधवार को टेंडर डालने की अंतिम तिथि के साथ ही यह भी निर्धारित होना था, कि ठेकेदार अपना बहिष्कार का निर्णय वापस लेते हैं, या नगर निगम अधिकारी बैकफुट पर आते हैं। इसमें बाजी ठेकेदारों के पक्ष में रही, और नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा ने ठेकेदारों के साथ सभागार में बैठक की।

जिसमें लंबी चर्चा के बाद नगर आयुक्त की ओर से घोषणा की गई कि पुरानी शर्तों के आधार पर ही टेंडर स्वीकार किए जाएंगे। यानी अब पांच प्रतिशत धरोहर राशि जमा कराई जाएगी, साथ ही अनेक टेंडर डालने वाले एक ठेकेदार को एक ही शपथ पत्र देना होगा। बैठक के दौरान ठेकेदार अतुल दीक्षित, राजू अरोरा, दलजीत सिंह बत्रा, जकी अहमद, सचिन ठाकुर, ब्रजमोहन, शकील अहमद आदि ने कई महीने से ठेकेदारों को निर्माण कार्य का भुगतान न किए जाने की बात उठाई।

उनका कहना था कि बकाया राशि 40 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इस पर नगर आयुक्त ने 15वें वित्त आयोग से तत्काल 15 करोड़ रुपये के चेक काटकर देने की व्यवस्था दी। और शेष 25 करोड़ की शीघ्र व्यवस्था कराने का भरोसा दिलाया। इस पर ठेकेदार काम के लिए टेंडर डालने पर सहमत हुए। नगर निगम ने इसके लिए एक सप्ताह की अवधि बढ़ाते हुए टेंडर भरने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर करने की घोषणा की है।

नगर निगम के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई आज

पुराना कमेला क्षेत्र में व्याप्त गंदगी को लेकर यहां के लोगों द्वारा नगर निगम के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुनवाई होगी। वार्ड-82 के अन्तर्गत आशियाना कॉलोनी में पुराने कमेले के पास नगर निगम द्वारा बनाए गए अस्थाई ढलाव घर हटाने तथा यहां पार्क विकसित करने को लेकर क्षेत्रवासी पिछले काफी दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। नागरिक सेवा संस्था के बैनर तले चलाए जा रहे आंदोलन को लगभग डेढ़ माह हो चुका है।

हालांकि नगर निगम ने यहां से अस्थाई कूड़ा घर तो हटा दिया, लेकिन निगम यहां क्षेत्रीय लोगों को पार्क विकसित नहीं करने दे रहा है। इस संबध में संस्था के अध्यक्ष मोे. अफजाल ने बताया कि उन्होंने नगर आयुक्त से मांग की थी कि यदि नगर निगम अपने स्तर से यहां पूर्व की भांति पार्क विकसित करने में असमर्थ है तो इलाके के लोग खुद ही अपने पैसे से यहां बाउंड्री वॉल कराकर पार्क विकसित कर लेगें।

मो. अफजाल ने आरोप लगाया कि निगम न तो खुद कुछ कर पा रहा है और न ही क्षेत्रवासियों को ही कुछ करने दे रहा है। इन्ही सब मुद्दों पर संस्था की ओर से हाईकोर्ट में नगर निगम के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई थी। मो. अफजाल के अनुसार इस याचिका पर हाई कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करने जा रहा है।

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