Wednesday, March 18, 2026
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ऊर्जा निगम 26 करोड़ का कर्जदार

  • सैकड़ों के बिल पर कनेक्शन काटने वाले सबसे बड़े बकायेदार बिजली विभाग से बस अनुरोध कर रहे हैं नगर नगम के अधिकारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सैकड़ों और हजारों के बिल बकाया होने पर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने वाले ऊर्जा निगम की ओर नगर निगम के संपत्ति कर और किराये की राशि करीब 26 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इस बारे में नगर निगम की ओर से अपने सबसे बड़े बाकीदार के लिए डिमांड नोटिस कई बार जारी किए जा चुके हैं, लेकिन ऊर्जा निगम के अधिकारियों की निगाह में इन नोटिस के कोई मायने नहीं रह गए हैं।

नगर निगम की सीमा के अंतर्गत ऊर्जा भवन समेत कई दर्जन कार्यालय और हाइडिल कालोनियां आती हैं। इन सभी कार्यालयों और आवासीय क्षेत्रों में नगर निगम के गृहकर, जलकर, सीवर कर समेत विभिन्न संपत्ति करों की राशि मिलाकर 30 मार्च 2022 तक 24 करोड़ 40 लाख 53 हजार 753 रुपये हो चुकी है। इस कर राशि की डिमांड करते हुए नगर निगम की ओर से अनगिनत नोटिस ऊर्जा निगम के अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं।

10 मार्च 2022 को तत्कालीन नगर आयुक्त मनीष बंसल की ओर से प्रबंध निदेशक पीवीवीएनएल के नाम एक पत्र भेजा गया। जिसमें अवगत कराया गया कि ऊर्जा निगम के विभिन्न कार्यालयों-संस्था पर संपत्ति कर की धनराशि 24 करोड़ 40 लाख 53 हजार 753 रुपये 31 मार्च तक बकाया देय है। जिसको जमा करने के लिए नगर निगम कार्यालय की ओर से बिल तथा मांग पत्र समय समय पर भेजे गए। भुगतान के लिए नगर निगम के अधिकारियों की ओर से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करके भी प्रयास किया गया, लेकिन देय संपत्ति करों का भुगतान नहीं किया गया है।

जिससे शासन द्वारा महानगर के विकास कार्यों के लिए संचालित होने वाली योजनाओं के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस भारी भरकम राशि को जमा करने के लिए नगर निगम की ओर से कोई चेतावनी देने के बजाय केवल अनुरोध जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। इस नोटिस के बाद वर्तमान नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा की ओर से भी कुछ समय पहले एमडी को भेजे पत्र में संपत्ति कर की राशि जमा करने का आग्रह किया गया है।

एक ओर 24 करोड़ 40 लाख 53 हजार से अधिक के संपत्ति कर की डिमांड की गई है, वहीं नगर निगम के तीन भवन का किराया तक ऊर्जा निगम ने मुद्दत से नहीं दिया है। इन भवनों में नगर निगम परिसर स्थित अधीशासी अभियंता कार्यालय, स्टोर परिसर स्थित बिजली दफ्तर, घंटाघर कार्यालय शामिल बताए गए हैं। इन तीनों कार्यालय का किराया भी करीब डेढ़ करोड़ रुपये हो चुका है, लेकिन ऊर्जा निगम को बार-बार भेजे जाने वाले डिमांड लेटर को लेकर नगर निगम के सबसे बड़े बकायेदार बन चुके इस विभाग की ओर से कोई हलचल नहीं हो पाती है।

ऊर्जा निगम के अलावा वर्तमान में विवि की ओर पांच करोड़ 35 लाख, मेडिकल कालेज की ओर पांच करोड़ 78 लाख, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर 74 लाख, अपर मुख्य अधिकारी परिषद चैतन्यपुरम की ओर 35 लाख रुपये, क्रीड़ा अधिकारी कार्यालय (संभवतया: स्टेडियम) की ओर 32 लाख रुपये की संपत्ति कर राशि बकाया है। एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से केवल मेडिकल कालेज की ओर से तीन-तीन लाख 58 हजार रुपये नगर निगम के कोष में जमा कराए गए हैं।

सरकारी कार्यालयों में तालाबंदी करना ठीक नहीं रहेगा। बकायेदार विभागों ने अपनी-अपनी डिमांड उच्चाधिकारियों को भेजी हुई है।

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जब वहां से भुगतान आ जाएगा, वे लोग जमा कर देंगे। -ममता मालवीय, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम मेरठ

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