Sunday, May 3, 2026
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‘मर कर भी जाएं तो जाएं कहां’

  • कोरोना काल के समय फुल हो गए कब्रिस्तान, मुर्दे दफनाने के लिए जगह का टोटा
  • साइइड इफेक्ट्स: शहर के कई कब्रिस्तानों का यही हाल
  • बाले मियां कब्रिस्तान में आर्इं सबसे ज्यादा मय्यतें

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ‘कितना है बद नसीब जफर दफ्न के लिए, दो गज जमीन भी न मिली कू-ए-यार में’। भारत के आखिरी मुगल शासक बहादुर शाह जफर का यह कलाम भले ही आशिकों की ‘आशिकी’ पर लिखा गया हो लेकिन आज यह पंक्तियां कोरोना काल के बाद के साइइड इफेक्ट्स पर सटीक बैठती हैं।

दरअसल कोरोनाकाल में हई बेतहाशा मौतों के बाद आज कई कब्रिस्तानों में मुर्दे दफनाने के लिए जगहों का टोटा पड़ा हुआ है और हालत यह है कि कब्रिस्तान प्रबंधक कमेटियों को मुर्दे दफनाने के लिए नई गाइड लाइनें तक जारी करनी पड़ी हैं।

दरअसल, कब्रिस्तान प्रबंधक कमेटियों के पदाधिकारियों के अनुसार कोरोनाकाल से पूर्व जिन बड़े कब्रिस्तानों में प्रतिदिन दो सो पांच मुर्दे दफन होने के लिए आते थे वहीं कोरोनोकाल में यह संख्या आठ से 10 गुना तक बढ़ गई। बाले मियां कब्रिस्तान के मुतवल्ली एम. अशरफ मुफ्ती के अनुसा उनके यहां भी कोरोनाकाल से पूर्व प्रतिदिन के हिसाब से दो से पांच जनाजे ही आते थे लेकिन कोरोनाकाल में एक एक दिन में 25 से 30 तक जनाजे आए।

कबिस्तानों में खत्म हो गई मिट्टी

बताया जाता है कि कोरोनाकाल में दफन हुए मुर्दों की संख्या अधिक होने के कारण कई कब्रिस्तानों में मिट्टी तक की कमी पड़ गई है, ऐसे में विभिन्न कब्रिस्तानों की कमेटियां अपने स्तर से मिट्टी का इं तेजाम कर रहीं हैं ताकि कोरोनाकाल के बाद अब मुर्दे दफनाने में दिक्कत न आए।

छोटे कब्रिस्तानों का और बुरा हाल

छोटे कब्रिस्तानों का तो और भी बुरा हाल है। एक तो जगह की कमी ऊपर से मिट्टी का टोटा। कुछ छोटे कब्रिस्तानों के प्रबंधक बताते हैं कि उन्होंने अब नई गाइडलाइन बनाई है कि जगह की तंगी के कारण अब कब्रों को लाइनों में तरतीब से खुदवाया जाएगा ताकि जगह की कमी न पड़े।

भयावह मंजर था वो: मुफ्ती अशरफ

बाले मियां वक्फ के मुतवल्ली मुफ्ती अशरफ बताते हैं कि कोरोनाकाल का पीक भयावय मंजर के सिवा कुछ नहीं था। उन्होंने बताया कि बाले मियां कब्रिस्तान में जहां कोरोनाकाल से पूर्व हर माह औसतन लगभग 90 जनाजे आते थे वहीं पिछले साल (अकले मई 2021 में) 1080 मुर्दों को दफन किया गया।

बकौल मुफ्ती अशरफ उस समय कब्र खोदने वालों की की पड़ गई और किराए पर कब्र खोदने वालों को हायर करना पड़ा। वो बताते हैं कि कोरोनाकाल में तो एक बार जिला प्रशासन ने ही बाले मियां कब्रिस्तान लगभग छह सात लाख रुपए की मिट्टी डलवाई जब उससे भी काम नहीं चला तो फिर आम पब्लिक की मदद से प्रबंधक कमेटी ने और सात लाख रुपए की मिट्टी डलवाई तब कहीं जाकर कब्रिस्तान में मिट्टी की कमी पूरी हो पाई।

कोरोना के पीक टाइम में बाले मियां कब्रिस्तान में दफन की स्थिति

1 मई                                                    23 जनाजे दफ्न हुए

2 मई                                                   27 जनाजे दफ्न हुए

3 मई                                                   16 जनाजे दफ्न हुए

4 मई                                                   25 जनाजे दफ्न हुए

5 मई                                                   24 जनाजे दफ्न हुए

6 मई                                                   13 जनाजे दफ्न हुए

7 मई                                                   24 जनाजे दफ्न हुए

8 मई                                                   23 जनाजे दफ्न हुए

9 मई                                                   19 जनाजे दफ्न हुए

10 मई                                                  15 जनाजे दफ्न हुए

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