Friday, March 20, 2026
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भांजी के शव को कंधे पर लिए भटकता रहा मामा

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं किस तरह बदहाल हो चुकी हैं इसकी तस्वीरें हर दिन देखने को मिल रही हैं। हाल ही में छतरपुर में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया जहां एक पिता को बेटी का शव ले जाने के लिए शव वाहन नहीं मिला। बेबस पिता दो घंटे तक बेटी के शव को कंधे में लिए इधर-उधर भटकता रहा बाद में किसी तरह बस से बेटी के शव को गांव ले गया।

जानकारी के अनुसार जिले के बाजना थाना क्षेत्र के पाटन गांव में बुधवार सुबह नदी के पास 4 वर्षीय प्रीति अपनी सहेलियों के साथ खेल रही थी, इसी दौरान बच्ची की मिट्टी में दबने से मौत हो गई। हादसे के समय बच्ची का मामा वहीं नदी में नहा रहा था, तुरंत बच्ची को मिट्टी से निकाला और उसे गंभीर हालत में बिजावर अस्पताल ले जाया गया। बच्ची की हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया।

भांजी की मौत के बाद उसका मामा किशोरी शव को कंधे में लिए अस्पताल प्रबंधन और समाज सेवियों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन शव को घर ले जाने के लिए उन्हें शव वाहन नहीं मिल सका। बाद में बच्ची का मामा शव को लेकर नि:शुल्क वाहन की तलाश में समर्पण क्लब में गया लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी।

2 घंटे तक परेशान होने के बाद मामा किशोरी हताश होकर अपनी भांजी के शव को उठाकर अस्पताल से पैदल निकल पड़ा और चौराहे से टैक्सी लेकर पुराना बिजावर नाका तक पहुंचा, जहां बस में बैठकर बच्ची के शव को लेकर अपने गांव के लिए निकला।

बताया जा रहा है कि पिछले दिनों स्थानीय विधायक ने शव वाहन दिया था, इसके बावजूद यहां जरूरतमंद लोगों को समय पर वाहन नहीं मिल पाता है। इस के पूर्व भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

वहीं, इस मामले पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जीएल अहिरवारा ने बताया कि विधायक द्वारा दिया गया शव वाहन समर्पण क्लब के पास है। इसलिए वह ही उसे संचालित करते हैं। उन्होंने बच्ची के शव को गांव तक पहुंचाने वाहन क्यों नहीं दिया वे ही बता पाएंगे। तो वहीं समर्पण क्लब के सचिव हरि अग्रवाल ने बताया कि हमारे पास बाजना क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति शव वाहन के लिए नहीं आया। यदि आता तो जरूर भिजवाते, क्योंकि छोटी बच्ची का मामला था। जबकि बुधवार को वाहन के माध्यम से तीन शव पीड़ितों के घर तक भिजवाए गए हैं।

छतरपुर में शव वाहन नहीं मिलने का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ महीनों पहले भी जिला अस्पताल में एक युवक की मौत होने पर वाहन नहीं मिला था, जिसके बाद मोटरसाइकिल पर बांधकर शव घर ले जाना पड़ा था।

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